भारत में बढ़ती खाद्य असुरक्षा - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में जारी स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन (SOFI) रिपोर्ट, 2020 दिखाती है कि दुनिया “सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी)-2 शून्य भूख” को प्राप्त करने की राह से भटक गयी है। कई संयुक्त राष्ट्र संगठनों द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य असुरक्षित आबादी है। भारत में 2014 से 2019 के बीच भारत में खाद्य असुरक्षा की व्यापकता 3.8 प्रतिशत बढ़ गई है।

स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन (SOFI) रिपोर्ट

विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति के संबंध में इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र संघ की निम्नलिखित संस्थाओं के द्वारा तैयार किया जाता है:

  • खाद्य और कृषि संगठन।
  • कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष।
  • संयुक्त राष्ट्र बाल निधि।
  • विश्व खाद्य कार्यक्रम।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन।
  • रिपोर्ट का उद्देश्य भूख को समाप्त करने, खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने और पोषण में सुधार की दिशा में हुई प्रगति का आंकलन करना है। साथ ही यह रिपोर्ट सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के संदर्भ में इन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों का गहराई से विश्लेषण भी करती है।

2017 से ही एसओएफआई द्वारा खाद्य असुरक्षा के दो प्रमुख संकेतकों का उपयोग किया जा रहा है:

भारत में खाद्य असुरक्षा की स्थिति

  • SOFI रिपोर्ट में भारत के अल्पपोषण के प्रसार (POU-Prevalence of Undernourishment) के आकलन के लिए NSSO के उपभोग व्यय सर्वेक्षण (CES) के आंकड़ों का उपयोग किया जाता है। हालांकि, कई अन्य देशों की तरह भारत न ही आधिकारिक रूप से FIES सर्वेक्षण करता है और न ही एफएओ- जीडब्ल्यूपी अनुमानों को स्वीकार करता है। हालांकि एफएओ-जीडब्ल्यूपी सर्वेक्षण भारत में आयोजित किए जाते हैं लेकिन भारत कई अन्य देशों की तरह इन सर्वेक्षणों के आधार पर रिपोर्ट के प्रकाशन की अनुमति नहीं देता हैं।
  • 2017-18 के लिए NSSO के उपभोग व्यय सर्वेक्षण (CES) के आंकड़े अभी भी प्रकाशित नहीं हुये है। इसलिए SOFI में भारत के सन्दर्भ में अल्पपोषण के प्रसार वर्तमान अनुमान सटीक नहीं हैं।
  • यह अल्पपोषण के प्रसार के आंकलन में सिर्फ प्रति व्यक्ति भोजन उपलब्धता पर आपूर्ति-पक्ष डेटा के उपयोग पर आधारित है।
  • लेकिन यह विश्वसनीय नहीं है कि भारत में खाद्य भंडार की उच्च उपलब्धता के बावजूद, लोगों तक पहुंच और सामर्थ्य कम है।
  • आधिकारिक FIES के अनुमानों की कमी और FAO- GWP(Gallup®World) Poll को प्रकाशित न किए जाने से खाद्य असुरक्षा पर विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं।

SOFI रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार भारत में खाद्य असुरक्षा की स्थिति निम्नानुसार है:

  • भारत में खाद्य असुरक्षा के सन्दर्भ में कुल वैश्विक संख्या का 22% है जो 2017-19 में किसी भी देश के लिए सबसे अधिक है।
  • 2014 से 2019 की अवधि के दौरान भारत में पीएमएसएफआई में 3.7 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई, जबकि शेष दक्षिण एशिया में यह 0.5 प्रतिशत अंक गिरावट हुयी है।
  • इन अनुमानों से पता चलता है कि जहां भारत की 27.8% आबादी 2014- 16 में मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित थी, वहीं 2017-19 में यह अनुपात बढ़कर 31.6% हो गया।

खाद्य असुरक्षा बढ़ने के कारण

SOFI रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार खाद्य असुरक्षा में महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए निम्नलिखित प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं:

  • कृषि संकट
  • विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की कमी और आर्थिक मंदी
  • रोजगार के घटते अवसर जैसा कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि बेरोजगारी दर 6.1% थी जो 4 दशकों में सबसे अधिक है।
  • विमुद्रीकरण और जीएसटी सुधार लागू करने से उत्पन्न आर्थिक मंदी एक प्रमुख कारण रही।

निष्कर्ष

  • COVID-19 महामारी के मद्देनजर अचानक लागू किए गए एक अभूतपूर्व और लंबे लॉकडाऊन ने भूख और खाद्य असुरक्षा की समस्याओं पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है। आजीविका के संकट से भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खाद्य असुरक्षा, भूख और भुखमरी का सामना कर रहा है। इसे देखते हुए आबादी के विभिन्न वर्गों की खाद्य सुरक्षा के मुद्दों को हल करने के लिए विश्वसनीय डेटा एकत्र करने की आवश्यकता है। साथ ही एसडीजी -2, शून्य भूख के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को पुनः प्राप्त करने के लिए इस डेटा पर कार्रवाई की जानी चाहिए।