सऊदी अरब तथा पाकिस्तान सम्बन्धो का भारत हेतु निहितार्थ - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • जम्मू और कश्मीर को लेकर पाकिस्तान और सऊदी अरब के मतभेद अब सामने आ चुके हैं। अभी हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सऊदी अरब का दौरा किया, लेकिन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बैठक से इनकार कर दिया गया।

परिचय:-

  • भारत द्वारा जम्मू कश्मीर की विशेष स्थिति (संविधान की अनुच्छेद 370) को पुनर्संरचित करने के बाद से ही पाकिस्तान भारत के इस आंतरिक मुद्दे को वैश्विक बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को पुनर्संरचित करने के उपरांत सऊदी अरब द्वारा कोई टिप्पड़ी नहीं की गई जबकि मलेशिया तथा टर्की जैसे देशो ने इसका विरोध किया था । पिछले 1 वर्ष से पाकिस्तान सऊदीअरब से जम्मू कश्मीर मुद्दे पर बात करने का प्रयास कर रहा है परन्तु उसका प्रयास अब धूमिल होता दिख रहा है

सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंध : सहयोग तथा तनाव सहयोग :-

  • 1970 के समय में सऊदी अरब पाकिस्तान के मुख्य समर्थक देशो में था। 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उसने स्पष्ट रूप से भारत को इस्लाम विरोधी बताते हुए पाकिस्तान का समर्थन किया था। न सिर्फ नैतिक रूप से वरन सऊदी अरब ने हथियार तथा धन से भी पाकिस्तान की सहायता की ।
  • युद्धोपरांत , सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 1977 तक लगभग 1 मिलियन डॉलर के हथियार खरीदने के लिए ऋण दिया, जिसमें अमेरिका से F-16s और हार्पून मिसाइलें शामिल थीं। परमाणु परीक्षणों के बाद प्रतिबंधों के बाद सऊदी तेल और डॉलर ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। पिछले दो दशकों में, सऊदी अरब ने आर्थिक कठिनाई से घिरे पकिस्तान को आस्थगित भुगतान पर तेल उपलब्ध कराया है।
  • सऊदी अरब ने पाकिस्तान के मदरसों में भी फंडिंग की परन्तु पाक द्वारा इसका उपयोग धार्मिक चरमपंथ के लिए लिया गया।
  • 1990 में, इराक के कुवैत पर आक्रमण के खिलाफ सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान ने अपनी जमीनी सेनाएँ भी भेजी।

तनाव :-

  • सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच कुछ समय से तनाव चल रहा है। 2015 में, पाकिस्तान की संसद ने यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल करने के लिए सऊदी सैन्य प्रयास का समर्थन नहीं किया ।
  • पुलवामा आतंकी हमले के बाद फरवरी 2019 में, यह सऊदी अरब और यूएई था जिसने विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने हेतु दबाव बनवाया था
  • सऊदी क्राउन प्रिंस ने उस समय पाकिस्तान और भारत का दौरा किया, और यह स्पष्ट किया कि उन्हें आर्थिक अवसरों का महत्व था। उन्होंने भारत में कश्मीर मुद्दे, या पाकिस्तान में आतंकवाद के मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया।
  • धारा 370 के निरस्त होने के एक साल बाद, पाकिस्तान कश्मीर पर सऊदी अरब की निष्क्रियता से परेशान हो चुका है। पाक ने आरोप लगाया कि ओआईसी में भी भारत के विरोध के लिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया था।
  • इससे सऊदी अरब नाराज था, जिसके चलते उसने नवंबर 2018 में पाकिस्तान के लिए घोषित 6.2 बिलियन डॉलर पैकेज में( जिसमे ऋण में $ 3 बिलियन और 3.2 बिलियन डॉलर की तेल क्रेडिट सुविधा शामिल थी) से $ 3 बिलियन ऋण की वापसी की मांग की और स्थगित भुगतान पर इस्लामाबाद को तेल बेचने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान ने तुरंत 1 बिलियन डॉलर लौटाए, जिससे तनाव बढ़ता हुआ दिख रहा था।
  • लेकिन, मौजूदा आर्थिक स्थिति में, पाकिस्तान अगले किश्त का भुगतान करने में असमर्थ है। जनरल बाजवा एक पैच-अप अभ्यास में रियाद गए, लेकिन क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया।
  • सऊदी अरब ने कहा है कि कि पाकिस्तान तुर्की और मलेशिया के लिए भटकने की कोशिश कर रहा है।

कश्मीर पर ओआईसी

  • जम्मू और कश्मीर में उग्रवाद शुरू होने के बाद, 1990 के बाद से इस्लामिक सम्मेलन (OIC) के संगठन में कश्मीर मुद्दे पर बात हुई ।
  • पिछले साल, भारत द्वारा कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद, पाकिस्तान ने भारत के इस कदम की निंदा के लिए ओआईसी के साथ पैरवी की। परन्तु , सऊदी अरब और यूएई ने ऐसे बयान जारी किए भारत की कठोर आलोचना नहीं कर रहे थे।
  • पिछले एक साल में, पाकिस्तान ने इस्लामी देशों के बीच भावनाओं को भड़काने की कोशिश की है, लेकिन उनमें से मात्र तुर्की और मलेशिया ने सार्वजनिक रूप से भारत की आलोचना की है।

सऊदी अरब परिपेक्ष्य :-

  • क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के शासन के अंतर्गत सऊदी अरब की स्थिति में बदलाव एक क्रमिक प्रक्रिया है। जैसा कि यह अपनी भारी तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था से विविधता लाने का प्रयास कर रहा है तथा इस क्षेत्र में भारत को एक मूल्यवान भागीदार के रूप में देखता है।
  • भारत अब अरब राष्ट्रों का महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोगी बन चुका है , लगातार की यात्राओं ने दोनों क्षेत्रों के मध्य राजनयिक सम्बल प्रदान किया है।
  • सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार (चीन, अमेरिका और जापान के बाद) और ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है: भारत अपने कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 18% यहीं से आयात करता है। सऊदी अरब भारत के लिए रसोई गैस का एक प्रमुख स्रोत भी है।
  • तुर्की के राष्ट्रपति को सऊदी अरब लंबे समय से मुस्लिम दुनिया के नए नेता के रूप में स्थान प्राप्त करने के आकांछी के रूप में देखता है जो सऊदी अरब के हितो के अनुरूप नहीं है।
  • और, अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी के कारण भारत ईरान से तेल आयात रोक रहा है, साथ ही सऊदी अरब इस संबंध में महत्वपूर्ण पक्षकार साबित होगा ।

भारत के लिए निहितार्थ

  • भारत, जो पाकिस्तान और सऊदी अरब घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है। लेकिन, जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ सीएए-एनआरसी पर सऊदी अरब के मौन समर्थन ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत किया है।
  • भारत तथा साउदी अरब दोनों अपने रिश्ते के मूल्य को समझ रहे हैं। ऐसे समय में जब भारत और चीन एक सीमा तनाव में हैं तथा भारत , पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ का सामना कर रहा है ऐसे में सऊदी अरब का पाक को समर्थन भारत के लिए समस्या उत्पन्न करेगा परन्तु सऊदी निश्चित ही क्षेत्रीय अस्थिरता नहीं चाहेगा।
  • भारत के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान-चीन और पाकिस्तान-सऊदी की स्थिति एक साथ आकर सऊदी-पाकिस्तान-चीन त्रिकोण नहींमें परिवर्तित न हो। यही भारत के साथ साथ क्षेत्रीय शांति हेतु आवश्यक होगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2

  • अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध