प्रवासी श्रमिकों पर राष्ट्रीय नीति का मसौदा - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

हाल ही में नीति आयोग द्वारा प्रवासी श्रमिकों पर एक राष्ट्रीय नीति का मसौदा प्रस्तावित किया गया हैं।

परिचय

  • एक "प्रवासी श्रमिक " वह व्यक्ति होता है जो या तो अपने देश के भीतर या इसके बाहर काम करने के लिए पलायन करता है। प्रवासी श्रमिक आमतौर पर उस देश या क्षेत्र में स्थायी रूप से रहने का इरादा नहीं रखते हैं जिसमें वे काम करते हैं। Covid-19 लॉकडाउन के दौरान बड़े शहरों से लगभग 10 मिलियन प्रवासन (सरकारी अनुमान के अनुसार) हुए जिनमे अधिकतम प्रवासी श्रमिक थे।
  • इस पलायन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को भिन्न भिन्न प्रकार के कष्ट उठाने पड़े। प्रवासी श्रमिकों की समस्या के निदान तथा भविष्य के संकट से रक्षा हेतु नीति आयोग द्वारा अधिकारियों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों के एक कार्यसमूह के साथ, एक राष्ट्रीय प्रवासी श्रम नीति का मसौदा बनाया गया है ।

नवीन नीति की आवश्यकता क्यों ?

  • 2019 में प्रवासी श्रमिकों के लिए कानूनी संरचना और दक्षता विकास संबंधी पहल सहित अन्य मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए विदेशी मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी ने बताया था कि भारत में प्रवास से संबंधित कोई नीति नहीं है। इससे भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में अपने नागरिकों की क्षमताओं का उपयोग नहीं कर पाता।
  • श्रमिकों से सम्बंधित 2017 की रिपोर्ट ने प्रवासी श्रमिकों के लिए विशिष्ट सुरक्षा कानून को अनावश्यक बताया था ।यह रिपोर्ट प्रवासी श्रमिकों को अन्य श्रमिकों के साथ रखने की पक्षधर थी जिससे किसी भी प्रकार की योजनाओ को एक विस्तृत आयाम प्राप्त हो सके।
  • रिपोर्ट में द इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स एक्ट- 1979 की सीमाओं पर चर्चा की गई, जिसका अधिनियमन गैर-भेदभावपूर्ण वेतन, यात्रा और विस्थापन भत्ते, और उपयुक्त कार्य स्थितियों के लिए अपने अधिकार की रक्षा करके ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को शोषण से बचाने के लिए किया गया था। हालाँकि यह कानून मात्र ठेकेदारों से अन्य राज्य के श्रमिकों की रक्षण हेतु निर्मित किया गया था।
  • 2017 की रिपोर्ट ने देश के असंगठित क्षेत्र के आकार को देखते हुए द इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स एक्ट- 1979 के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया। इसने सभी श्रमिकों के लिए एक व्यापक कानून बनाने का आह्वान किया, जो सभी श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए विधिक आधार तैयार करेगा। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत असंगठित क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्यम आयोग द्वारा 2007 की रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुरूप था।
  • परन्तु 2019 में कोरोना संकट ने यह स्पष्ट किया कि सामान्य श्रमिक तथा प्रवासी श्रमिक दो भिन्न वर्ग हैं तथा कुछ स्थितियों इन दोनों वर्गों के लिए में अलग विधान की आवश्यकता है।

कोरोना के दौरान प्रवासी श्रमिकों की समस्याएं

  • कोरोना के दौरान तथाकथित स्मार्ट सिटीज में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों को भिन्न भिन्न संकटो का सामना करना पड़ा है जिनका वर्णन निम्न है
  • इस दौरान सभी राज्य अपने -अपने नागरिको के रक्षण में लगे रहे परन्तु प्रवासी श्रमिक जो सामान्यतःजिस राज्य में काम करता है उस राज्य का नागरिक नहीं होता अतः प्रवासी श्रमिकों को अपने कार्यस्थल वाले राज्य में सुविधाएं नहीं मिल सकीं। यथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत किसी अन्य राज्य में रहने वाले प्रवासी श्रमिक प्राप्त हुआ।
  • अपने कार्यस्थल से अपने निवासस्थल तक आने में प्रवासी श्रमिकों के सम्मुख कई विषम परिस्थितियां आईं। श्रमिक परिवारों ने मीलो का सफर पैदल तंय किया। मार्ग में भोजन तथा जल का अभाव उन पर दोहरा संकट उत्पन्न कर रहा था।
  • कोरोना प्रसार प्रारम्भ होने के समय कई श्रमिक नौकरियां छोड़कर प्रवास कर चुके हैं। पुनः अनलॉकडाउन की स्थिति में उनपर आजीविका संकट उत्पन्न हो गया।
  • विदेश में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की स्थिति कोरोना काल में और अधिक सुभेद्य हो गई थी।
  • इन समस्याओं के साथ ही प्रवासी श्रमिक बलात श्रम, कार्यस्थल पर शोषण ,न्यून वेतन जैसी कई समस्याओं से पीड़ित रहते हैं। ये समस्याएं यह स्पष्ट करती हैं कि प्रवासी श्रमिकों के लिए अलग नीति आवश्यक है।

ड्राफ्ट के मुख्य अनुशंसाएं

  • मसौदा नीति निर्माण दो दृष्टिकोणों पर आधारित है। प्रथम दृष्टिकोण एक नकद हस्तांतरण, विशेष कोटा, और आरक्षण से सम्बंधित है वहीँ अन्य दृष्टिकोण संस्थागत कमियों को दूर करने के प्रयास पार आधारित है। इस प्रकार यह नीति प्रवासी श्रमिकों के लिए अधिकार आधारित अप्रोच को बढ़ावा देती है।
  • यह ड्राफ्ट पंचायती राज, ग्रामीण विकास और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालयों को उच्च प्रवास क्षेत्रों में प्रवास संसाधन केंद्र के निर्माण की अनुशंसा हेतु कहता है। यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय को इन केंद्रों में कौशल निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहता है।
  • यह मसौदा शिक्षा मंत्रालय को प्रवासी बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लाभान्वित करने की नीति के लिए कहता है।
  • यह मसौदा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को शहरों में प्रवासियों के लिए रैन बसेरों, मौसमी आवासो से सम्बंधित मुद्दों को हल करने की अनुशंसा करता है।
  • राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) और श्रम मंत्रालय को प्रवासी श्रमिकों के लिए तस्करी, न्यूनतम मजदूरी उल्लंघन, और कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार और दुर्घटनाओं के लिए शिकायत निवारण कक्ष और फास्ट ट्रैक कानूनी प्रक्रिया स्थापित करनी चाहिए।

ड्राफ्ट के लागू होने पर लाभ

  • अन्तराष्ट्रीय श्रम बाजार में क्षमता का पूर्ण उपयोग होगा
  • इस ड्राफ्ट में अधिकार आधारित अप्रोच को बढ़ावा देने पर प्रवासी श्रमिकों में विश्वास घाटे में कमी आएगी जो राष्ट्र की एकता को बढ़ाने में सहायक होगा ।
  • यह कोरोना जैसे संकटो के समय में प्रवासी श्रमिकों की सुभेद्यता को कम करेगा।
  • इस ड्राफ्ट के उपरान्त प्रवासी श्रमिकों का समावेशी विकास संभव है जो आगे चलकर असमानता को कम करेगा।

निष्कर्ष

इस नीति में भिन्न भिन्न संस्थाओ को प्रवासी श्रमिकों के लिए कल्याण के लिए कहा गया है जिससे इन्क्लूजन तथा एक्सक्लूशन एरर संभव है। परन्तु यह नीति प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा को एक विधिक आधार प्रस्तुत करेगी तथा प्रवासी श्रमिकों के लक्षित कल्याण को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय तथा अंतर्राजीय प्रवासी श्रमिक समाज की मुख्य धारा से जुड़ाव प्राप्त करेंगे।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 तथा 2
  • भारतीय समाज तथा सामाजिक न्याय
  • जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।
  • केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • हाल ही में नीति आयोग द्वारा प्रवासी श्रमिकों पर राष्ट्रीय नीति का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है ? इस ड्राफ्ट की आवश्यकता पर चर्चा करें ? क्या आप सहमत हैं कि यह ड्राफ्ट प्रवासी श्रमिकों की सुभेद्यता को कम करेगा ?