ग्रामीण भारत में बढ़ता कोरोनावायरस संक्रमण - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

संदर्भ

  • 25 मार्च, 2020 से लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन ने शहरों में काम करने वाले ग्रामीणों की जिंदगी में भूचाल ला दिया, रातोंरात बहुत से लोगों की नौकरी चली गई। सभी प्रकार के सार्वजनिक परिवहन के निलंबित होने से इन प्रवासियों के पास अपने मूल स्थानों की ओर पैदल चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसे "भारतीय इतिहास के सबसे बड़े पलायन" के रूप में देखा गया।
  • शहरों में नोवेल कोरोनावाइरस के विनाशकारी प्रभाव के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रसार बढ़ रहा है। प्रवासियों की इस उलट प्रवृत्ति के चलते कई जिलों के ग्रामीण इलाकों में कोविड के मामलों की संख्या में वृद्धि हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ग्रामीण भारत कोरोनवायरस तेजी से फैल सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड के मामलों के बढ़ने के मुख्य कारक

प्रवास की उलट प्रवृत्ति:

  • उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड वे राज्य हैं जहाँ प्रवासियों का उच्चतम उत्प्रवास हुआ है। इन राज्यों में अब कोविड के मामलों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जा रही है।
  • केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संकलित प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, शहरी केंद्रों से छह राज्यों के 116 जिलों में लगभग 6.7 मिलियन प्रवासी लौटे हैं।
  • लौटे प्रवासियों का लगभग 4.4 मिलियन या दो-तिहाई 53 जिलों में आए हैं। जिसमें से अकेले बिहार के 32 जिलों में 2.36 मिलियन प्रवासी लौटे हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश है, जहाँ 1.748 मिलियन लोग 31 जिले में लौटे।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा का खस्ताहाल बुनियादी ढाँचा:

  • ग्रामीण भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा बहुत निराशाजनक है। यहाँ डॉक्टरों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ, अस्पताल में बिस्तरों और उपकरणों सहित अन्य चिकित्सा पेशेवरों की बहुत कमी है।
  • कोविड-19 के अपर्याप्त परीक्षण और क्वारंटीन सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण भारत में यह महामारी विशेष चुनौती प्रस्तुत करती है।
  • इसके अलावा, गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, आदि), संक्रामक रोग (तपेदिक, दस्त, आदि) और ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण का स्तर भी उच्च है।
  • कई जिलों के गांवों स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत दूर हैं विशेषकर दूरदराज के इलाकों में। यहाँ यातायात की उचित व्यवस्था न होने के कारण समय पर कोविड जाँच और उपचार भी उपलब्ध नहीं हो पता है।

ग्रामीण घरों में पानी और साबुन की सुविधा की कमी:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वच्छता जरूरतों का पूरा न होना इस चुनौती और गंभीर बना देता है। बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में 60 प्रतिशत से अधिक घरों में पानी और साबुन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। ये उन राज्य में से हैं जहाँ प्रवासियों का का सबसे अधिक उत्प्रवास हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के संदर्भ में जागरूकता का अभाव

  • ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता एवं अंधविश्वास के कारण प्रायः कई बीमारियों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। बीमारियों में संस्थागत सुविधाओं से इलाज के बजाय प्रायः झोलाछाप डॉक्टर या झाड़-फूंक का सहारा लिया जाता है। इसके अलावा कई बार ऐसा भी होता है कि रोग के इलाज में बिना डॉक्टर से सलाह लिए मेडिकल की दुकानों से दवा लेकर उसका उपभोग कर लिया जाता है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में प्राया स्वच्छता मानकों का अभाव पाया जाता है जिसमें स्वच्छ जल,जल निकासी, शौचालय इत्यादि जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल है। इस स्थिति में कोविड-19 का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में काफी चिंता का विषय है।

शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड का प्रसार चिंताजनक क्यों है?

  • शिक्षा और जागरूकता अभाव के कारण ग्रामीण क्षेत्र में सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के मामले में शहरों की तुलना में काफी पीछे हैं।
  • कोरोनावायरस बीमारी बुजुर्गों के लिए काफी घातक है वहीं दूसरी ओर सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत 'एलडर्ली इन इंडिया 2016' रिपोर्ट के अनुसार 71 प्रतिशत बुज़ुर्ग गाँवों में रहते हैं।
  • नेशनल हेल्थ प्रोफ़ाइल 2019 के आंकड़ों के अनुसार देश के करीब 26000 सरकारी अस्पतालों में से 21000 अस्पताल ग्रामीण इलाकों में अवस्थित है लेकिन वही अगर इसे बेड के संदर्भ में देखा जाए तो जहां पूरे देश में 1700 मरीजों पर एक बेड उपलब्ध है वहीं ग्रामीण इलाकों में यह प्रति 3100 मरीजों पर एक बेड उपलब्ध है।
  • शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में क्वारंटाइन एवं आइसोलेशन सेंटर का अभाव स्थिति को और विकट बना देती है।
  • स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी अवसंरचना के साथ सड़क एवं परिवहन की निम्न गुणवत्ता भी आपातकालीन स्थितियों में कोविड-19 वायरस के संक्रमण के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में हताहत को बढ़ा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड के प्रसार को रोकने के उपाय

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को मजबूत बनाना:

  • महामारी मौजूदा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) की वास्तविक क्षमता के सही उपयोग और इसके संबद्ध बजट आवंटन में सुधार का अवसर प्रस्तुत करती है।
  • ग्रामीण भारत में COVID-19 के प्रभावी प्रबंधन के सभी प्रयासों को NRHM की व्यापक छतरी के नीचे रणनीतिक तरीके से किया जाना चाहिए। ताकि इस प्रक्रिया में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण तंत्र को भी मजबूत किया जा सके।
  • चूंकि भारत की 12 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण आबादी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHCs) पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहुँचती है, इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (CHCs) / ग्रामीण अस्पतालों और COVID-19 के निकटतम परीक्षण और उपचार सुविधाओं के लिए एक मजबूत रेफरल प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है
  • 4-5 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के समूह में से किसी एक में कोविड परीक्षण सुविधा उपलब्ध उन सभी के बीच समन्वय के माध्यम से परीक्षण और क्वारंटीन सुविधा बढ़ाने की रणनीति अपनायी जा सकती है।
  • इस तरह के सीएचसी के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण किट, अभिकर्मकों और संबंधित उपकरणों की व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में COVID-19 का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।
  • सीएचसी के स्वास्थ्य कर्मियों को निकटतम COVID परीक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी आवश्यकता है।
  • इसके अलावा आरटी-पीसीआर परीक्षणों के लिए नमूने एकत्र करने के लिए नोडल कोविड-19 सीएचसी का एक परीक्षण वाहन सप्ताह के निश्चित दिनों में अपने आस- पास के दो सीएचसी में पूर्व-निर्धारित समय भेजा चाहिए। इससे ग्रामीणों को नियमित रूप से कुछ निश्चित दिनों में कोविड परीक्षण के नमूने देने में परेशानी नहीं होगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा कोविड-19 के प्रसार को रोकने में एवं कोविड-19 के संदर्भ में सूचनाओं की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। अतः इन आशा कार्यकर्ताओं को समुचित प्रशिक्षण देकर ग्रामीण लोगों के मध्य स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध करवाए जाने का प्रयास करना चाहिए।
  • ग्रामीण इलाकों में कोविड-19 के संक्रमित लोगों की त्वरित जांच के लिए अत्यधिक मात्रा में मोबाइल वैन, कैंप शिविर इत्यादि जैसे माध्यमों का अत्यधिक सहारा लेना होगा।

विकेन्द्रीकृत प्रशासन:

  • यदि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोनोवायरस के प्रसार पर अंकुश लगाना है तो प्रशासन को एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। पंचायतों के हाथों में प्रभावी निर्णय लेने और कार्यान्वयन की शक्तियों के साथ पूर्व नियोजन और एक विकेन्द्रीकृत प्रशासन को अपनाए जाने की आवश्यकता है।
  • ग्राम पंचायतों को इस महामारी के संकट से निपटने के उपायों से सुसज्जित किया जाना चाहिए। क्वारंटीन केंद्रों को स्थापित और कुशलतापूर्वक प्रबंधित किए जाने करने की आवश्यकता है। इसके अलावा निजी और स्थानीय डॉक्टरों को भी COVID-19 के प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।/li>
  • इन सबके अतिरिक्त यह सुनिश्चित करने के लिए भी पर्याप्त उपाय होने चाहिए कि COVID- 19 रोगियों या उनके परिवारों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव अथवा अत्याचार न हो। स्व-देखभाल और स्वच्छता सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान भी आयोजित किए जाने चाहिए।

निष्कर्ष

  • यदि कोविड के मामले मौजूदा दर से बढ़ते रहते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण को रोकने के पर्याप्त उपाय नहीं अपनाए जाते है तो यह यह भारत और इसकी खराब स्वास्थ्य प्रणाली दोनों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
  • इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों को यथासंभव कोविड महामारी के दुष्प्रभावों से अलग रखने के लिए रणनीतिक प्रयास किए जाने चाहिए। साथ हाथों की सफ़ाई और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।