कोविड-19 के दौर में सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकता - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


कोविड-19 के दौर में सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकता - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

  • कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने हेतु सरकार ने लॉकडाउन लगाया था और अब धीरे-धीरे विभिन्न चरणों के तहत लॉकडाउन को खोला जा रहा है।
  • लॉकडाउन के हटने से सार्वजनिक परिवहन में कोरोना वायरस के बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • सरकार द्वारा अपनायी जा रही अनलॉक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप सार्वजनिक परिवहन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अपनी पूरी क्षमता से न सही लेकिन ट्रेन, बस और हवाई यात्रएँ शुरू हो चुकी हैं।
  • हालाँकि अधिक संख्या में यात्रियों का आवाजाही सुनिश्चित करने वाली दिल्ली मेट्रो एवं मुम्बई की लोकल ट्रेनों का अभी पूरी तरह संचालन नहीं हो रहा है।
  • सार्वजनिक परिवहन को लेकर सरकार के अतिरिक्त जनता भी डर रही है, क्योंकि उन्हें लगता है कि सार्वजनिक परिवहन के साधनों को अपनाने से वो संक्रमित हो सकते हैं।
  • कोविड-19 महामारी की वजह से शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को लेकर लोगों का भरोसा डगमगाने लगा है।
  • एक सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरों में पुरानी परिवहन व्यवस्था को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती होगी। शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के उपभोग में लगभग 90 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गयी है।
  • कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से लोग व्यक्तिगत वाहनों पर अधिक जोर दे रहे हैं।

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

  • परिवहन व्यक्तियों और वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन करने की सेवा या सुविधा को कहते हैं। ऐसा गमनागमन स्थल, जल एवं वायु में होता है। सड़कें और रेलमार्ग स्थलीय परिवहन का भाग हैं, जबकि जलमार्ग एवं वायुमार्ग परिवहन के अन्य दो प्रकार हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एकसाथ भारी संख्या में व्यक्तियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन किया जाता है, यथा-मेट्रो सेवा आदि।
  • भारत में अभी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूर्णतया विकसित नहीं है तथा कोविड-19 महामारी ने इसके समक्ष और अधिक चुनौतियाँ उत्पन्न की है।

सार्वजनिक परिवहन से खतरा

  • ट्रेन, बस, मेट्रो, हवाई जहाज आदि सार्वजनिक परिवहन के साधनों में कोरोना वायरस का संक्रमण इस बात पर निर्भर करता है कि इन साधनों में लोगों की भीड़ कितनी है और वो सोशल डिस्टेसिंग का कितना पालन कर रहे हैं। यह बात सिर्फ परिवहन वाहनों पर ही लागू नहीं होगी बल्कि यह उनके स्टॉप या स्टेशनों पर भी लागू होती है।
  • मेट्रो जैसे परिवहन साधनों में इनडोर एयरकंडीशन की पद्धति मौजूद है। वैज्ञानिकों का ऐसा दावा है कि इनडोर एयरकंडीशन से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें ताजी हवा का प्रवेश नहीं हो पाता है। इनडोर एयरकंडीशन में यदि एकबार हवा संक्रमित हो जाती है तो वह अपने चक्रीय प्रवाह के क्रम में भारी संख्या में लोगों को संक्रमित कर सकती है।
  • बस, मेट्रो, ट्रेन आदि में हाथ से पकड़ने वाली जगहों के भी संक्रमित होने का खतरा काफी अधिक रहता है, क्योंकि जब कोई संक्रमित व्यक्ति इन जगहों को छू लेता है तो कई घंटों बाद कोरोना वायरस अपने-आप मरता है या फिर इन्हें सैनिटाइज किया जाये तब वायरस का खात्मा होता है।
  • वायरस से संक्रमित व्यक्ति जब छींकता या खांसता है तो उसके मुंह से छोटी-छोटी बूँदें निकलकर वातावरण में कुछ दूरी तक फैल जाती हैं। ये बूँदें सीधे या फिर किसी दूषित वस्तु को छूने के बाद आँखों, नाक और मुँह से शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। ऐसे में बस, ट्रेन, मेट्रो, हवाई जहाज आदि में यात्र करना और भी खतरनाक हो जाता है।
  • हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बात को स्वीकार किया है कि वायु के माध्यम से भी कोरोना वायरस फैल सकता है। इसलिए सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों में हवा के माध्यम से एकसाथ भारी संख्या में लोग संक्रमित हो सकते हैं।
  • सार्वजनिक जगहों (यथा-सार्वजनिक परिवहन आदि) में सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों से होता है जो कोरोना वायरस से संक्रमित तो होते हैं लेकिन उनमें लक्षण प्रकट नहीं हो रहे होते हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन से कई लोगों की एकसाथ गतिशीलता बढ़ जाती है। इस स्थिति में यदि कोई कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ तो उसके संक्रमण के स्रोत का पता भी लगाना लगभग असंभव होता है।
  • भारत में अभी भी कोविड-19 महामारी को लेकर जागरूकता काफी कम है, खासकर उस तबके में जो आर्थिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं। इस स्थिति में जब लोग एकसाथ सार्वजनिक परिवहन से यात्र करेंगे तो स्वाभाविक रूप से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भारत में लोगों के द्वारा मॉस्क लगाने की दर काफी कम है, जो स्थिति की गंभीरता को प्रकट करती है।
  • भारत में जनसंख्या अधिक होने से कई सार्वजनिक परिवहन के रूटों पर पीक (peek)समय पर भीड़ काफी अधिक मात्र में बढ़ जाती है, जो कोविड-19 महामारी में एक प्रमुख चुनौती है।
  • लोगों के द्वारा सार्वजनिक परिवहन के अलग-अलग रूटों व साधनों के प्रयोग करने से भी संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है।

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के न अपनाने से हानि

  • विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कमजोर पड़ गयी तो इस स्थिति में निम्नलिखित प्रकार के नुकसान हो सकते हैं-
  • सार्वजनिक परिवहन में कोरोना वायरस के संक्रमण के डर की वजह से लोग इसकी जगह निजी वाहनों का अधिक उपयोग करेंगे, इससे सड़कों पर गाडि़यों की भीड़ बढ़ जायेगी और वो संकुल (ब्वदहमेजमक) हो सकती हैं।
  • निजी वाहनों के अधिक उपयोग से सड़कों पर सड़क दुर्घटना का भी खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। सड़क दुर्घटना में मानव की असामयिक मृत्यु होती है जिसके आर्थिक, सामाजिक, भावनात्मक आदि कई नुकसान होते हैं। यही कारण है कि हर देश की सरकार अपने यहाँ सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए नियम-कानून बनाती रहती हैं और परिवहन ढाँचा को मजबूत करती हैं।
  • सड़कों पर ज्यादा वाहनों के दौड़ने से वायु प्रदूषण भी बढ़ जाता है क्योंकि ज्यादा वाहन अधिक मात्र में हानिकारक धुआँ उत्पन्न करते हैं और सड़कों के किनारे एकत्रित मिट्टी के महीन कणों को उड़ाकर वायु को प्रदूषित करते हैं।
  • वायु प्रदूषण के बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें वृद्ध एवं बच्चें को अपेक्षाकृत अधिक हो जाती हैं। यह स्थिति पहले से कोविड-19 महामारी के कारण दबाव में चल रहे स्वास्थ्य ढाँचा के लिए और भी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती है।
  • अधिक निजी वाहनों के उपयोग से पेट्रोलियम ईंधन की खपत बड़ जाती है। भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के लिए मुख्यतः आयात पर ही निर्भर है। इसलिए पेट्रोलियम की खपत बढ़ने से भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है और भुगतान संतुलन की समस्या खड़ी हो सकती है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक स्थिति होगी।
  • वाहनों से निकलने वाले धुएँ में ग्रीन हाउस गैसें भी होती हैं जो भूमण्डल के ताप को बढ़ाने में मदद करती हैं। उल्लेखनीय है कि बढ़ता हुआ पृथ्वी का तापमान जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है।

वित्तीय समस्या

  • कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन विभिन्न चरणों में लगाया था, जिसने परिवहन क्षेत्र के सरकारी विभागों से लेकर निजी कम्पनियों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
  • वर्तमान में कई विमानन कम्पनियाँ घाटे में चल रही हैं, क्योंकि कोरोना वायरस के डर से उन्हें अपेक्षित मात्र में यात्री नहीं मिल पा रहे हैं।
  • विमानन कम्पनियों से लेकर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सभी साधनों को कोविड-19 महामारी से सावधानी बरतते हुए परिचालन करने में काफी खर्च करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें बार-बार अपने परिवहन साधनों एवं अन्य ढाँचों को सैनिटाइज करना पड़ रहा है और अपने स्टॉफ को अतिरिक्त सावधानी हेतु ट्रेनिंग देनी पड़ रही है।
  • कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने हेतु सार्वजनिक वाहनों मेें सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना अनिवार्य होता है। इस स्थिति में वाहनों में कम यात्रियों की आवाजाही सुनिश्चित हो पाती है, जो वित्तीय समस्याओं को उत्पन्न करती है।

सुझाव

  • सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा हेतु मॉस्क को अनिवार्य बना देना चाहिए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी यात्रियों के मोबाइल में आरोग्य सेतु एप उपस्थित हो।
  • मेट्रो जैसी अधिक क्षमता वाली परिवहन व्यवस्थाओं में अंदर घुसने से पहले हाथों को सैनिटाइज करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • यात्रियों को हैंड टिश्यू पेपर के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • मेट्रो एवं ट्रेन प्लेटफॉर्म, बस अड्डों, हवाई अड्डों आदि को नियमित तौर पर सैनिटाइज किया जाये और परिवहन साधानों को भी एक यात्र (व्दम ज्तपच) के बाद सैनिटाइज किया जाये। उन जगहों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है जिन्हें यात्री बार-बार छूते हैं, यथा-हत्थे, स्वचलित सीडि़यों की रेलिंग, दरवाजा आदि।
  • एयरकन्डीशन की केन्द्रीकृत प्रणाली (Centralised system) को हतोत्साहित करना चाहिए और ताजी हवा से युक्त विधियों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा।
  • सरकार को लोगों को जागरूक करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए और कुछ ऐसी रणनीतियों पर कार्य करना चाहिए जिससे यात्री कम से कम एक-दूसरे के संपर्क में आ सकें, यथा-
  • ऑफ-पीक समय (Off-peak time) पर यात्र के लिए प्रोत्साहन इसके लिए ऑफिस टाइमिंग को अलग-अलग किया जा सकता है।
  • लोगों को कम व्यस्त मार्गों पर यात्र हेतु प्रोत्साहित करें और उन्हें अपने नियमित परिवहन साधनों में कम से कम परिवर्तन की सलाह दें।
  • जहाँ संभव हो वहाँ दो मीटर की सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराया जाये।
  • लोगों को पैदल, साइकिल आदि के लिए प्रोत्साहित किया जाये।
  • चूँकि अधिकांश शहरी यात्रएँ पाँच किलोमीटर के आसपास होती हैं, इसलिए सरकार को गैर-मोटर चालित परिवहन (Non-motorised transport) पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए, क्योंकि इसमें कम लागत, कम मानव संसाधन की आवश्यकता होती है और इसे लागू करना आसान व त्वरित है।
  • इस संकट की घड़ी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के क्षेत्र में भी सरकार को आर्थिक रियायतें प्रदान करनी चाहिए।

निष्कर्ष

  • सरकार को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित बनाने हेतु हर संभव प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि लोगों का इस पर पुनः विश्वास बहाल हो सके और कोविड-19 की महामारी के प्रसार को भी रोका जा सके।

सामान्य अध्ययन पेपर-2

  • सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न मुद्दे।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/ सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • "देश में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए सार्वजनिक परिवहन एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा है। कोविड-19 महामारी के दौरान, सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से संक्रमण फैलने का जोिखम काफी अधिक है।" दिए गए कथन के प्रकाश में, सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव की चर्चा करें और नुकसान को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर प्रकाश डालें।