कारपोरेट सामाजिक दायित्व - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

हाल ही में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने भारतीय कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय के नियमों में संशोधन किया है।

परिचय

  • कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों को बहु-वर्षीय परियोजनाएँ शुरू करने की अनुमति देने के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) व्यय के नियमों में संशोधन किया है।
  • सामाजिक दायित्व से आशय ऐसे कृत्यों के लिए नीतिबद्ध अथवा किसी कृत्य हेतु नैतिक रूप से उत्तरदायी होने से हैं जहाँ किसी व्यक्ति, संस्था अथवा समूचे समाज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में योगदान करते हैं।
  • व्यावसायिक उद्यमों के लिए सामाजिक दायित्व का अर्थ है व्यावसायिक गतिविधि के साथ सामाजिक दायित्वों की पूर्ती से है जिससे सतत उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त हो सके।

कारपोरेट सामाजिक दायित्व का दार्शनिक आधार

यहाँ कारपोरेट सामाजिक दायित्व के दार्शनिक आधार को एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं। कम्पनियाँ किसी उत्पाद को बनाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करती हैं जिससे प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं।

  • इस गतिविधि का लाभ कंपनी को होता है परन्तु लेकिन इस ख़राब प्रदूषण का नुकसान समाज में रहने वाले विभिन्न लोगों को उठाना पड़ता है। परन्तु इस असुविधा हेतु समाज के विभिन्न वर्गों को किसी प्रकार का मुआवजा प्राप्त नहीं होता। अतः समाज की इस असुविधा का दायित्व कंपनियों पर है।
  • इस कारण ही भारत सहित पूरे विश्व में कंपनियों के लिए यह अनिवार्य बना दिया गया कि वे अपनी आमदनी का कुछ भाग उन लोगों के कल्याण पर भी करें जिनके कारण उन्हें असुविधा हुई हैइसे कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (CSR) कहा जाता है।

कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व नियमो में हुए परिवर्तन

  • भारत में कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (CSR) के नियम अप्रैल 1, 2014 से लागू हैं। अभी हाल ही में इसकी नियमावलियों में परिवर्तन किये गए हैं।
  • ऐसी सभी कम्पनियाँ जो 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की कुल संपत्ति, 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का टर्नओवर या 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध लाभ के श्रेणी में आती हैं उन्हें कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी के रूप में अपनी तीन वित्तीयवर्ष के औसत लाभ का 2 % व्यय करना होता है।
  • इस नवीन परिवर्तन में सरकार ने तीनो वित्त वर्षो के औसत लाभ के 2% तक की सीमा को परिवर्तित कर किसी वर्ष में 2% तक निर्धारित किया है।
  • इसके साथ यह आवश्यक प्रावधान बनाया गया कि केवल उन्ही कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ सीएसआर का प्रयोग किया जा सकता है जो कम्पनियाँ सरकार के साथ पंजीकृत हों। इसके अलावा, ऐसी सभी संस्थाओं को 1 अप्रैल तक सरकार के पास पंजीकृत होना होगा।
  • रकार उन कॉर्पोरेट्स की अनुमति देने पर विचार कर सकती है, जिनके पास भविष्य में सीएसआर व्यय की अधिकता है, ताकि भविष्य में सीएसआर व्यय आवश्यकताओं के लिए इसे निर्धारित किया जा सके
  • नया संशोधन कंपनियों को कंपनी अधिनियम की धारा 8 कंपनी या एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट को अधिकृत करने से प्रतिबंधित करता है। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक धारा 8 कंपनी ऐसी कंपनी है जो ललित कला, विज्ञान, साहित्य, या ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजीकृत (रजिस्टर्ड) एक संगठन है। ये कंपनी अधिनियम के तहत स्थापित सीमित कंपनियां हैं।

सरकार इन कंपनियों को धारा 8 कंपनी अधिनियम के तहत एक विशेष लाइसेंस देती है। लाइसेंस देने के लिए तीन मुख्य शर्तें हैं।

  1. कंपनी को धर्मार्थ (भलाई के लिए) उद्देश्य के लिए निर्मित किया जाए।
  2. इन वस्तुओं की ओर आय और मुनाफे (लाभ ) का उपयोग किया जाना चाहिए।
  3. कंपनी को अपने सदस्यों को कोई लाभांश नहीं दे रही हो।
  • इन परिवर्तनों के फलस्वरूप निजी ट्रस्टों को या तो पंजीकृत सार्वजनिक ट्रस्टों में परिवर्तित करना होगा, या सीएसआर कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में कार्य करना बंद करना होगा। अभी तक भारत में य सीएसआर की एक बड़ी राशि को ब्लू-चिप कंपनियों सहित कई कंपनियों द्वारा अपने निजी ट्रस्टों के माध्यम से योगदान दिया जा रहा था। इस परिवर्तन के बाद सीएसआर का अधिकांश हिस्सा सार्वजनिक संस्थाओ में होगा।
  • रिलायंस फाउंडेशन, भारती फाउंडेशन और डीएलएफ फाउंडेशन जैसे निजी ट्रस्ट, जो संबद्ध कंपनियों के लिए सीएसआर खर्च का अधिकांश भाग प्राप्त करते थे, इस परिवर्तन से प्रभावित होंगे।

निष्कर्ष

  • नीतिबद्ध रूप में व्यवहार करने और समाज के जीवन में सुधार लाने के साथ-साथ आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में योगदान करना व्यवसाय की वचबद्धता और जिम्मेदारी है इस दृष्टिकोण से कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व भारत में समाज सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण यंत्र बन कर उभरा है परन्तु कई बार कानूनों के दुरूपयोग से कारपोरेट घराने अपने से ही सम्बंधित ट्रस्ट को सीएसआर देते हैं जिससे यह उस वर्ग तक नहीं पहुँच पाता जिसके लिए यह बनाया गया था।
  • उद्योगों के विनियामक के रूप में यदि सरकार का यह दायित्व है कि उद्यमों को सुगमता प्रदान की जाए तो कल्याणकारी राज्य के कारण सीएसआर को लोगों तक पहुंचाना भी सरकार का उत्तरदायित्व है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 तथा 3
  • शासन तथा अर्थव्यवस्था

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • उद्योगों के विनियामक के रूप में यदि सरकार का यह दायित्व है कि उद्यमों को सुगमता प्रदान की जाए तो कल्याणकारी राज्य के कारण सीएसआर को लोगों तक पहुंचाना भी सरकार का उत्तरदायित्व है। कथन का विश्लेषण करें?