जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम में परिवर्तन - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

हाल ही में कैबिनेट ने जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के नियमो में परिवर्तन को मंजूरी दी है।

परिचय

  • हाल ही में कैबिनेट ने जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम -2015 के नियमो में परिवर्तन को मंजूरी दी है। यह नियम उन बच्चों से संबंधित है जिन्होने कानून की दृष्टि में कोई अपराध किया हो और जिन्हें देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता हो। एक जुवेनाइल या बच्चा वह व्यक्ति होता है जिसकी आयु 18 वर्ष से कम होती है।
  • भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 82 के तहत, सात वर्ष वह न्यूनतम आयु है जब किसी व्यक्ति पर अपराध के लिए आरोप लगाया जा सकता है। जुवेनाइल से सम्बंधित अधिनियम जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन एक्ट, 2000 है जिसे पुनः 2015 में संसोधित किया गया है। हाल में किया गया संसोधन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है।

परिवर्तनों की आवश्यकता क्यों?

  • 2015 में हुए परिवर्तनों ने मात्र एक विशेष वर्ग पर ध्यान रखा जिससे कई समस्याएं उत्पन्न हुईं। संसोधनो के 1 वर्ष उपरान्त ही चाइल्ड केयर इंस्टीटूशन्स में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार तथा अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगीं।
  • लगभग 30% संस्थानों में बड़े पैमाने पर प्रबंधकीय समस्याएं दृष्टिगोचर हुईं।
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट ने बताया कि सम्पूर्ण राष्ट्र में कोई भी ऐसा चाइल्ड केयर सस्थान नहीं है जो जुवेनाइल जस्टिस के मानकों को पूर्ण करने में समर्थ हो।
  • 1.5 % संस्थानों में किसी भी नियमो का पालन किया जा रहा है।
  • कई चाइल्ड केयर संस्थान जुवेनाइल जस्टिस केयर के अंतर्गत पंजीकृत ना होकर भी वित्तीयन का लाभ उठा रहे थे।
  • पिछले 10 वर्षो में जुवेनाइल अपराधो में बढ़ोत्तरी भी देखी गई है जिनमे बलात्कार तथा हत्या जैसे अपराध भी सम्मिलित हैं।

जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम में परिवर्तन

  • पहली बार जघन्य अपराध की श्रेणी से हटकर एक गंभीर अपराध की श्रेणी बनाई गई है।
  • जघन्य अपराध करने की स्थिति में जुवेनाइल को "एडल्ट"(18 वर्ष से अधिक ) के समान समझा जाएगा।
  • 16 से 18 आयु वर्ग के बच्चो को ड्रग्स से सम्बंधित अपराधों के मामले में "एडल्ट" की तरह ही समझा जाएगा।
  • संसोधनो द्वारा जिला मजिस्ट्रेट को और अधिक शक्तियां दी गई हैं। अब जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना चाइल्ड केयर संस्थान नहीं खुलेंगे।
  • जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों की निगरानी का अधिकार भी जिला मजिस्ट्रेट को दिया गया है इस कार्य में वह एडीएम की सहायता ले सकता है।
  • सीडब्लूसी में सम्मिलित सदस्यों के आपराधिक पृष्ठ्भूमि , शैक्षिक योग्यता इत्यादि की जांच होनी अनिवार्य कर दी गई है, तथा यह कार्य जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ही सम्पादित किया जाएगा।
  • बच्चो को गोद लेने की प्रक्रिया का नियमन किया जाएगा तथा इसके लिए डीएम को शक्तियां दी गई हैं।

भारत में बच्चो के संरक्षण से संबधित प्रावधान

संवैधानिक प्रावधान -

  • अनुच्छेद 21 (ए) - 6-14 आयु वर्ग की अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान
  • अनुच्छेद 24 - यह 14 वर्ष की आयु तक खतरनाक कार्य में बाल श्रम पर प्रतिबंध लगाता है
  • अनुच्छेद 39 (ई) - यह सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है कि निविदा आयु के बच्चों का आर्थिक विषमता के कारण दुरुपयोग न हो
  • अनुच्छेद 45 - राज्य का कर्तव्य है की वह 0-6 आयु वर्ग के बच्चो की देखभाल का प्रावधान करे
  • अनुच्छेद 51 (ए) - माता-पिता का मौलिक कर्तव्य है कि वे अपने बच्चे को 6 से 14 आयु वर्ग के लिए शिक्षा प्राप्त करने के लिए सुनिश्चित करें

राष्ट्रीय बाल नीति 2013

  • यह 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति के रूप में एक बच्चे को परिभाषित करता है
  • यह जीवन, अस्तित्व, विकास (मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सकारात्मक) शिक्षा, स्वास्थ्य और भागीदारी के अधिकार की रक्षा हेतु हिंसा और शोषण के खिलाफ प्रावधान करता है।
  • इसके सिद्धांतो के अनुसार बच्चो को प्रभावित करने वाले समस्त निर्णयों में बच्चो के हित की प्राथमिकता होनी चाहिए।

महिला और बाल विकास मंत्रालय - बच्चों के कल्याण के लिए योजनाओं का अवलोकन करता है

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग -

  • यह बाल अधिकार अधिनियम 2005 के तत्वाधान में निर्मित एक वैधानिक निकाय है
  • इसका उद्देश्य बाल अधिकारो की सुरक्षा तथा संरक्षण तथा बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन के अनुरूप नीतियों सुनिश्चित करना है

निष्कर्ष

बच्चे देश का भविष्य हैं तथा कई बार आर्थिक तथा सामाजिक विषमता के कारण अपराध में लिप्त हो जाते हैं। इस स्थिति में जहाँ एक तरफ मौजूदा कानूनों का पालन आवश्यक है वहीँ दूसरी तरफ आर्थिक तथा सामाजिक न्याय को जल्द से जल्द स्थापित करने का प्रयत्न करना होगा। इस सन्दर्भ में चाइल्ड केयर संस्थानों को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • सामाजिक न्याय
  • केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • आर्थिक तथा सामाजिक विषमता के कारण अपराध में लिप्त हुए बच्चो के कल्याण में जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के प्रावधानों की विवेचना करें?