बजट 2021-22 (भाग 1) - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

01 फरवरी 2021 को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जी ने बजट को संसद में प्रस्तुत किया।

परिचय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत के वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में निर्दिष्ट किया गया है जिसे आम भाषा में केन्द्रीय बजट के रूप में जाना जाता है। यह भारतीय गणराज्य का वार्षिक बजट होता है, जिसे वर्ष फरवरी के पहले दिवस को भारत के वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता है (पहले औपनिवेशिक परम्परा के कारण बजट 28 फरवरी को प्रस्तुत होता था परन्तु 2017 से बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत किया जा रहा है ) । इस बार का बजट केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जी द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

इस वर्ष के बजट के आर्थिक आकड़े

व्यय:

  • सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2021-22 में 34,83,236 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही सरकार ने बताया कि 2020-21 में 34,50,305 करोड़ रुपये खर्च किए गए जो 2020-21 के बजट अनुमान से 13 % अधिक हैं।

प्राप्तियां :-

  • सरकार को 2021-22 के वित्त वर्ष में 19,76,424 करोड़ रूपये (ऋणेत्तर प्राप्तियां ) प्राप्त होने का अनुमान है जो 2020-21 के संशोधित अनुमानों से 23% अधिक है।2020-21 में, प्राप्तियों के लिए संशोधित अनुमान बजट अनुमानों से 29% कम था यह कमी मुख्य रूप से कोरोना के प्रभाव से उत्पन्न हुई है।
  • जीडीपी वृद्धि: वित्त वर्ष 2021-22 में नॉमिनल जीडीपी (मुद्रास्फीति का प्रभाव जोड़कर ) लगभग 14.4% दर से वृद्धि करने का अनुमान है ।

घाटा :-

  • 2021-22 के वित्त वर्ष में राजस्व घाटे के जीडीपी के 5.1% रहने का अनुमान है जो वित्त वर्ष के 2020-21 में संशोधित अनुमान जीडीपी के 7.5% से कम है।
  • 2021-22 के वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के जीडीपी के 6.8 % रहने का अनुमान किया गया है जो वित्त वर्ष के 2020-21 में संशोधित अनुमान जीडीपी के 9.5 से कम है।
  • यहाँ यह ध्यातव्य है कि 2019-20 में जहाँ राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.6% था वहीँ राजस्व घाटा जीडीपी का 3.3% था। सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.5% तक कम करना है।

मंत्रालय का आवंटन:

  • उच्चतम आवंटन वाले शीर्ष 13 मंत्रालयों में, 2019-20 में सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि जल शक्ति मंत्रालय (64%) में देखी गई है। इसके बाद उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (48%) और संचार मंत्रालय (31%) आवंटन में वृद्धि हुई है ।

बजट के महत्वपूर्ण कर प्रस्ताव

  • व्यक्ति तथा निगमों के आयकर की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
  • भविष्य निधि में कर्मचारियों के योगदान पर ब्याज आय पर कर छूट 2.5 लाख रुपये तक सीमित किया गया है।
  • सरकार द्वारा वित्तवर्ष 2021-22 तक के लिए कर प्रोत्साहन को बढ़ाया गया है जिसके अंतर्गत आवास ऋण पर ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक की कर कटौती, और कर अवकाश के लिए किफायती आवास परियोजनाओं , स्टार्टअप का लाभ और स्टार्ट-अप में पूंजीगत लाभ के निवेश को सम्मिलित किया गया है।
  • कुछ वस्तुओं जैसे कपास, रेशम, कुछ ऑटो और मोबाइल भागों पर शुल्क बढ़ाया गया है।
  • वे व्यवसाय जो अपने लेनदेन का 95% डिजिटल रूप से ले जाते हैं और जिनका टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से कम है, को ऑडिटेड खातों को रखने से छूट दी गई है। इसकी सीमा को बढ़ाकार 10 करोंड किया जा सकता है।
  • आयकर मूल्यांकन को री-ओपन करने की समय सीमा 6 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष कर दी जाएगी।
  • सर्कल दर से ऊपर अचल संपत्ति लेनदेन के लिए सेफ हारबर सीमा 10% से 20% तक बढ़ा दी गई है।
  • बजट में किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए 100 प्रतिशत तक के कृषि आधारभूत ढांचा एवं विकास उपकर का प्रस्ताव किया। कुछ आयातित वस्तुओं पर उपकर लगाया जाएगा जिसमें सोना, चांदी, मादक पेय, कोयला, और कपास सम्मिलित हैं।
  • एक्साइज ड्यूटी में बराबर कटौती के साथपेट्रोल और डीजल पर क्रमशः 2.5 और 4 रुपये प्रति लीटर की दर से उपकर (सेस) लगाया जाएगा। चूंकि सेस राज्यों के साथ साझा किए गए राजस्व के विभाज्य पूल का हिस्सा नहीं है, इसलिए उनकी राजस्व प्राप्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
  • वित्त मंत्री ने प्रस्ताव दिया है कि वरिष्ठ नागरिकों (75 वर्ष से ऊपर) को केवल पेंशन और जमा से ब्याज आय अर्जित करने के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी।

महत्वपूर्ण विधायी परिवर्तन

इस बजट के द्वारा कई अधिनियमों में परिवर्तन किये जा रहे हैं।

  • सेबी अधिनियम, 1992 और सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2007 सहित चार अधिनियमों को समेकित करने के लिए एक प्रतिभूति बाजार कोड प्रस्तुत करने का प्रस्ताव दिया गया है।
  • बीमा अधिनियम, 1938 में संसोधन कर बीमा कंपनियों में एफडीआई सीमा को 49% से 74% तक को बढ़ाने के लिए का प्रस्ताव किया गया है तथा सुरक्षा उपायों के साथ विदेशी स्वामित्व और नियंत्रण की अनुमति भी दी जाएगी।
  • कंपनी अधिनियम, 2013 को संशोधित कर लघु कंपनियों (स्माल कंपनियों ) की परिभाषा को संसोधित किया गया है। स्माल कंपनियों के लिए पूंजी (50 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये) और वार्षिक टर्नओवर (2 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये) तक की सीमा की गई है।
  • डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन एक्ट, 1961 में जमाकर्ताओं को अपने बीमा कवर की सीमा तक अपनी जमा राशि तक समयबद्ध और आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संशोधन किया जाएगा।
  • सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 में भी परिवर्तन किये जाएंगे।
  • SARFAESI अधिनियम, 2002 के अंतर्गत गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के लिए ऋण वसूली के लिए न्यूनतम ऋण का आकार 50 लाख रुपये से घटाकर 20 लाख रुपये किया जाएगा।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • अर्थव्यवस्था
  • सरकारी बजट

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट के महत्वपूर्ण कर प्रस्तावों का वर्णन करें ? इसके संभावित लाभों को बताइये ? उन अधिनियमों का वर्णन कारण जिनमे इस बजट के द्वारा परिवर्तन किया जा रहा है।