यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट - 2021 (World Economic Outlook Report - 2021)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट - 2021 (World Economic Outlook Report - 2021)

वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट - 2021 (World Economic Outlook Report - 2021)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने विश्व आर्थिक आउटलुक (World Economic Outlook) जारी किया, इसका शीर्षक ''Managing Divergent Recoveries'' है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9% रखा गया है। यह जनवरी 2021 में 12.5% के पिछले अनुमान की तुलना में 1% अधिक है। यह उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के कुलीन समूह के बीच सबसे अधिक है।
  • साथ ही, वर्ष 2023 के लिए भारत का विकास अनुमान 8% से बढ़कर 6.9% हो गया है। इससे पहले IMF ने भारत की विकास दर 6.8% रहने की भविष्यवाणी की थी।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था 2021 में 6% की दर से बढ़ेगी है और इसके 2022 में 4.4% तक बढ़ने की उम्मीद है। 2020 में, वैश्विक अर्थव्यवस्था 3.3% संकुचित हुई है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2020 में प्री-कोविड जीडीपी में लौट आया है। हालांकि, अन्य देशों के 2023 तक इस स्तर तक लौटने की उम्मीद नहीं है।
  • COVID-19 के कारण होटल और रेस्तरां क्षेत्र को भारी उत्पादन और रोजगार का नुकसान हुआ है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी अमेरिका, भारत और चीन में अच्छी रिकवरी की उम्मीद है।
  • यूके और अमेरिका वैक्सीन के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी ओर, एशिया वैक्सीन रोल-आउट पर पिछड़ रहा है।
  • पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।

IMF के महत्वपूर्ण सुझाव

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार लोगों के टीकाकरण, उपचार और स्वास्थ्य देखभाल से संबन्धित बुनियादी ढाँचे पर बजट बढ़ाने की आवश्यकता है। सरकार की प्राथमिकता यह होनी चाहिए की स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए आवश्यक उपायों पर जोर देने के साथ ही राजकोषीय खर्च प्रभावित परिवार अच्छी तरह से लक्षित होना चाहिये।
  • मौद्रिक नीति को व्यवस्थित होना चाहिये जबकि स्थायी उपायों द्वारा वित्तीय स्थिरता के जोखिमों को दूर किया जाना चाहिये।
  • नीति निर्माताओं को महामारी से पहले की तुलना में अधिक सीमित नीति और उच्च ऋण स्तर से निपटने के लिये अपनी अर्थव्यवस्था का समर्थन जारी रखने की आवश्यकता है।
  • लंबे समय तक समर्थन के लिये बेहतर लक्षित उपायों की आवश्यकता होती है। मल्टी-स्पीड रिकवरी के साथ एक अनुकूलित दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसमें महामारी के चरण में अच्छी तरह जाँची-परऽी नीतियों, आर्थिक सुधार और देशों की संरचनात्मक विशेषताएँ शामिल हैं।
  • सरकारों की प्राथमिकताओं में जलवायु परिवर्तन को कम करना, उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, बढ़ती असमानता को रोकने के लिये सामाजिक सहायता को मजबूत करना आदि को शामिल किया जाना चाहिये।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्र कोष की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् युद्ध प्रभावित देशों के पुनर्निर्माण में सहायता के लिये विश्व बैंक के साथ की गई थी। इन दोनों संगठनों की स्थापना के लिये अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में आयोजित एक सम्मेलन में सहमति बनी। इसलिये इन्हें ‘ब्रेटन वुड्स ट्विन्स’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • वर्ष 1945 में स्थापित IMF विश्व के 189 देशों द्वारा शासित है तथा यह अपने निर्णयों के लिये इन देशों के प्रति उत्तरदायी है। भारत 27 दिसंबर, 1945 को IMF में शामिल हुआ था। IMF का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना है। अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली से आशय विनिमय दरों और अंतर्राष्ट्रीय भुगतान की उस प्रणाली से है जो देशों (और उनके नागरिकों) को एक-दूसरे के साथ लेन-देन करने में सक्षम बनाती है। IMF के अधिदेश में वैश्विक स्थिरता से संबंधित सभी व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों को शामिल करने के लिये वर्ष 2012 में इसे अद्यतन/अपडेट किया गया था।

वर्ल्ड इकॉनमी आउटलुक

  • यह IMF का एक सर्वेक्षण है जिसे आमतौर पर अप्रैल और अक्टूबर के महीनों में साल में दो बार प्रकाशित किया जाता है। यह भविष्य के चार वर्षों तक के अनुमानों के साथ निकट और मध्यम अवधि के दौरान वैश्विक आर्थिक विकास का विश्लेषण तथा भविष्यवाणी करता है। इसके पूर्वानुमान के अपडेट्स की बढ़ती मांग के कारण वर्ल्ड इकॉनमी आउटलुक अपडेट जनवरी और जुलाई में प्रकाशित किया जाता है, जो आमतौर पर अप्रैल और अक्टूबर में में प्रकाशित होने वाली मुख्य WEO रिपोर्टों के बीच का समय है।