यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: व्हाट्सएप बनाम सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (WhatsApp vs Information Technology Rules, 2021)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): व्हाट्सएप बनाम सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (WhatsApp vs Information Technology Rules, 2021)

व्हाट्सएप बनाम सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (WhatsApp vs Information Technology Rules, 2021)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में मोबाइल मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सएप ने भारत सरकार के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। व्हाट्सएप ने केंद्र सरकार द्वारा जारी सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उल्लेखनीय है कि नए आईटी नियमों के तहत व्हाट्सएप और उस जैसी कंपनियों को अपने मैसेजिंग ऐप पर भेजे गए मैसेज के ऑरिजिन, यानी जहां से सबसे पहले संदेश भेजा गया, का पता रखना अनिवार्य होगा।

मोबाइल मैसेजिंग सर्विस कंपनी व्हाट्सएप का तर्क

  • ये नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्याभूत ‘निजता के मौलिक अधिकार’ का उल्लंघन करते हैं।
  • के. एस. पुट्टूस्वामी मामले में शीर्ष अदालत द्वारा ‘निजता का अधिकार’ संविधान के तहत प्रत्याभूत मौलिक अधिकार बताया गया है।
  • पहचान जाहिर न करने का अधिकार (right to anonymity) हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि करते हुए कहा है, कि, ‘पहचान जाहिर न करने का अधिकार’, ‘निजता के अधिकार’ में शामिल है।
  • भारत में ‘सूचना के मूल जनक’ की पहचान जाहिर करने को शुरू से महत्वपूर्ण नुकसान होगा, जिसमे ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को तोड़ना’ तथा विधिसम्मत अभिव्यक्ति को भयभीत करना भी शामिल होगा।
  • वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघनः निजता, अलंघनीय रूप से वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा होती है, क्योंकि यह लोगों को अलोकप्रिय, लेकिन विधिसम्मत, विचारों को व्यक्त करने के परिणामस्वरूप उत्पन्न प्रतिशोध से बचाती है।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थारनों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021के बारे में

  • सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म को उपयोगकर्ताओं या पीडि़तों से मिली शिकायतों के समाधान के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।
  • सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म को ऐसे कंटेंट की शिकायत मिलने के 24 घंटों के भीतर इसे हटाना होगा या उस तक पहुंच निष्क्रिय करनी होगी, जो किसी व्यक्ति के निजी क्षेत्रों को उजागर करते हों, किसी व्यक्ति को पूर्ण या आंशिक रूप से निर्वस्त्र या यौन क्रिया में दिखाते हों। ऐसी शिकायत या तो किसी व्यक्ति द्वारा या उनकी तरफ से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई जा सकती है।
  • स्वैछिक रूप से अपने खातों का सत्यापन कराने के इच्छुक उपयोगकर्ताओं को अपने खातों के सत्यापन के लिए एक उचित तंत्र उपलब्ध कराया जाएगा।
  • सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म द्वारा ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं करनी चाहिए जो भारत की सम्प्रभुता और अखंडता, सार्वजनिक आदेश, दूसरे देशों के साथ मित्रवत संबंधों आदि के हित के संबंध में किसी कानून के तहत निषेध हो।
  • यह संहिता ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन समाचार और डिजिटल मीडिया इकाइयों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश सुझाती है। डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से संबंधित डिजिटल मीडिया आचार संहिता का पालन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा कराया जाएगा।
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को पांच उम्र आधारित श्रेणियों- यू (यूनिवर्सल), यू/ए 7+, यू/ए 13+, यू/ए 16+, और ए (वयस्क) के आधार पर कंटेंट का खुद ही वर्गीकरण करना होगा।
  • डिजिटल मीडिया पर समाचार के प्रशासकों को भारत में एक शिकायत समाधान अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो खुद को मिली शिकायतों के समाधान के लिए जवाबदेह होगा। अधिकारी खुद को मिली हर शिकायत पर 15 दिन के भीतर फैसला लेगा।
  • डिजिटल मीडिया पर समाचार के प्रशासकों की एक या ज्यादा स्व-विनियामकीय संस्थाएं हो सकती हैं। ऐसी संस्था की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय का एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश या एक स्वतंत्र प्रतिष्ठित व्यक्ति करेगा और इसमें छह से ज्यादा सदस्य होंगे। इस संस्था को सूचना और प्रसारण मंत्रालय में पंजीकरण कराना होगा।
  • डिजिटल मीडिया पर समाचार के प्रशासकों हेतु भारत सरकार का सूचना और प्रसारण मंत्रालय एक निरीक्षण तंत्र विकसित करेगा। यह आचार संहिताओं सहित स्व-विनियमित संस्थाओं के लिए एक चार्टर का प्रकाशन करेगा। यह शिकायतों की सुनवाई के लिए एक अंतर विभागीय समिति का गठन करेगा।