यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: वैक्सीन राष्ट्रवाद (Vaccine Nationalism)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): वैक्सीन राष्ट्रवाद (Vaccine Nationalism)

वैक्सीन राष्ट्रवाद (Vaccine Nationalism)

चर्चा का कारण

  • चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में इन दिनों सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन बनाने की होड़ जारी है। लेकिन जानकारों ने खोजी जाने वाली दवा के इस्तेमाल में ‘राष्ट्रवादी रवैये’ को लेकर चेताया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन ने संकेत दिया है कि वह COVID-19 वैक्सीन की खुराक के लिए प्राथमिकता का उपयोग (स्वयं के नागरिकों के लिए) सुरक्षित करना चाहेंगे। घरेलू बाजारों के इस प्राथमिकता को वैक्सीन राष्ट्रवाद के रूप में जाना जाता है।

वैक्सीन राष्ट्रवाद क्या है?

  • चीन में एक हजार से ज्यादा वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, चीन पहले दवा बनाकर विकासशील और कमजोर देशों को प्रभाव में लेने की कोशिश में है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने औषधि अधिकारियों को दवा के विकास में अमेरिका को बढ़त दिलाने को कहा है।
  • वैक्सीन राष्ट्रवाद तब होता है जब कोई देश अपने नागरिकों या निवासियों के लिए पहले वैक्सीन की खुराक सुरक्षित करता है इसके बाद वह वैक्सीन की खुराक अन्य देशों में उपलब्ध कराता है।
  • यह सरकार और वैक्सीन निर्माता के बीच पूर्व में किए गए खरीद समझौतों के माध्यम से सम्पन्न किया जाता है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2009 में जब स्वाइन फ्रलू के प्रकोप के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने इसकी वैक्सीन खोजी लेकिन अमेरिका और अन्य देशों को निर्यात करने से पहले अपनी मांग पूरी की।

वैक्सीन राष्ट्रवाद से चिंताएँ

  • वैक्सीन राष्ट्रवाद से दुनिया में आपूर्ति में बाधा आएगी, जिसका खामियाजा लोगों को ही भुगतना पड़ेगा।
  • विश्लेषकों के अनुसार, जिस तरह से चीनी दूरसंचार कंपनी हुवावे ने 5जी नेटवर्क लगाने को लेकर जो रवैया अपनाया, वैसा चीन में कोरोना वैक्सीन को लेकर भी दिख सकता है।
  • वह कमजोर देशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे संकेत हैं कि चीन मौजूदा हालात को अपने भू-राजनीतिक फायदे में बदलने की जुगत में लगा है।

विशेषज्ञों की आपत्ति

  • विशेषज्ञों का मानना है कि कम जोिखम वाले देशों में टीकाकरण बाद में सुनिश्चित करना चाहिए साथ ही ज्यादा खतरे वाले देशों में टीकाकरण पहले सुनिश्चित करना चाहिए।

भारत की स्थिति

  • 40 करोड़ खुराक पाने के लिए भारत ने एस्ट्राजेंका से करार किया है ताकि अमीर देशों की होड़ से यहां टीकाकरण में बाधा न आए।

वैक्सीन बनाने को लेकर कितनी प्रगति हुई?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि 31 दिसंबर 2019 को हुई थी। जिस तेजी से वायरस फैला उसे देखते हुए 30 जनवरी 2020 को इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया।
  • लेकिन शुरुआती वत्तफ़ में इस वायरस के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी और इस कारण इसका इलाज भी जल्द नहीं मिल पाया। फिलहाल दुनिया- भर में 120 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें 13 जगहों पर मामला क्लीनिकल ट्रॉयल तक पहुंचा है।
  • इन तेरह जगहों में पांच चीन, तीन अमरीका और दो ब्रिटेन में हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, रूस और जर्मनी में एक-एक जगहों पर ट्रॉयल चल रहा है।

सुझाव

  • डब्ल्यूएचओ सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों को सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान टीकों के समान पहुंच के लिए एक रूपरेखा तैयार कर अगले महामारी से बचाव के लिए पहले बातचीत कर समन्वय स्थापित करना चाहिए।