यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: फेक न्यूज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (Supreme Court Strict on Fake News)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): फेक न्यूज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (Supreme Court Strict on Fake News)

फेक न्यूज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (Supreme Court Strict on Fake News)

चर्चा का कारण

  • कोरोना महामारी की शुरुआत में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम पर मीडिया रिपोर्टिग को लेकर केंद्र सरकार की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने असहमति जताई है।
  • कोर्ट ने कहा कि सरकार को टीवी पर इस तरह के मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक नियामक तंत्र स्थापित करने पर विचार करना चाहिए।

क्या है फेक न्यूज?

  • फेक न्यूज में काल्पनिक लेख/ समाचार/ सूचनाएं इत्यादि को शामिल किया जाता है जिसे पाठकों को गुमराह करने के उद्देश्य जानबूझकर प्रसारित किया जाता है।
  • फेक न्यूज को एलो जर्नलिज्म कहा जाता है।
  • फेक न्यूज की घटनाएं लगातार बढती जा रही है जिसके निम्न कारण है
  • समुचित विनियमन का अभाव।
  • ऑनलाइन समाचार/ सूचना पोर्टल के खोलने के लिए आवश्यक बाध्यकारी नियमों की कमी।
  • सांप्रदायिक एवं वैचारिक स्तर पर ध्रुवीकरण के कारण फेक न्यूज का प्रसार आसान हो गया है।
  • ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म विस्तार से फेक न्यूज में और तेजी आई है।
  • कई बार टीआरपी बढ़ाने के लिए विशुद्ध रूप से फेक न्यूज गढ़े जाते हैं जिसके कारण यह विज्ञापन और राजस्व का एक माध्यम बन गए हैं।

फेक न्यूज सम्बंधित चुनौतियां?

  • सोशल मीडिया कंपनियां अपनी मध्यस्थ भूमिका को बताते हुए इससे किनारा कर लेती हैं।
  • दरअसल सोशल मीडिया पर प्रचलित कंटेंट/ सूचनाओं का एक बड़ा हिस्सा यूजर्स जेनरेटेड कंटेंट है।
  • इसमें कंपनियां यह तर्क रखती हैं कि वह मात्र एक मध्यस्थ के रूप में काम करती हैं।
  • यदि सरकार द्वारा इस पर नियंत्रण लगाने की कोशिश की जाती है तो मीडिया के द्वारा इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताती हैं।
  • मैसेजिंग सेवा में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक और गोपनीयता तो सुनिश्चित करती है लेकिन वहीं इसके दुरुपयोग की संभावना को भी बढ़ा देती हैं।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फेक न्यूज में शामिल कन्टेंट क्या है, इसको परिभाषित करने की जरुरत है।

सरकार का पक्ष

  • सरकार द्वारा सोशल मीडिया की अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन का उपयोग अक्सर किया जाता है।
  • आधार को सोशल मीडिया अकाउंट से जोड़ने जैसे विचार भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अटॉर्नी जनरल द्वारा सुझाए गए हैं। परन्तु सरकार सोशल मीडिया पर अंकुश लगाती है तो लोग इसे नागरिकों
    की जासूसी बताते हैं।
  • सरकार फर्जी खबरों के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए अधिक सार्वजनिक-शिक्षा पहल करने की योजना बना रही है।

सर्वोच्च न्यायालय का पक्ष

  • प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि अदालत इस मामले में केंद्र के हलफनामे से सहमत नहीं है।
  • इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि सरकार के पास इस तरह की शिकायतों को सुनने के लिए केबल टीवी नेटवर्क अधिनियम के तहत कौनसी शक्तियां हैं और कैसे वह केबल टीवी की सामग्री को नियंत्रित कर सकती है।
  • शीर्ष अदालत ने केंद्र को 3 हफ्तों में फर्जी खबरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है, यह बताने के लिए भी कहा है।

आगे की राह

  • सामाजिक और अन्य मीडिया में प्रसारित किए जा रहे डेटा को सत्यापित करने के लिए सरकार के पास स्वतंत्र एजेंसी होनी चाहिए। एजेंसी को वास्तविक तथ्यों और आंकड़ों को प्रस्तुत करने का काम सौंपा जाना चाहिए।
  • सोशल मीडिया वेबसाइटों को ऐसी गतिविधियों के प्रति जवाबदेह बनाया जाना चाहिए ताकि फर्जी खबरों के प्रसार पर बेहतर नियंत्रण रखना उनकी जिम्मेदारी बन जाए।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक, विशेष रूप से मशीन लर्निंग और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, नकली समाचार समस्या से निपटने के लिए बेहतर तरीका हो सकता है।