यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: ओडिशा के जनजातीय समूहों में कोविड संक्रमण का प्रसार (Spread of COVID-19 in PVTGs in Odisha)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): ओडिशा के जनजातीय समूहों में कोविड संक्रमण का प्रसार (Spread of COVID-19 in PVTGs in Odisha)

ओडिशा के जनजातीय समूहों में कोविड संक्रमण का प्रसार (Spread of COVID-19 in PVTGs in Odisha)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में बोंडा और डोंगरिया कोंध जनजातियों सहित विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal Groups- PVTGs) के बीच संक्रमण फैल गया है।

प्रमुख बिन्दु

  • एकांत जीवन शैली के लिए जानी जाने वाली बोंडा जनजाति के 12 सदस्यों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। इसी तरह, एक अन्य पीवीटीजी समूह डोंगरिया कोंध जनजाति के 23 सदस्यों ने रायगडा के कल्याणसिंहपुर ब्लॉक के परसली पंचायत में वायरल बीमारी के लिए सकारात्मक परीक्षण किया है।

ओडिशा में जनजातीय समूह

  • 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल आदिवासी आबादी में ओडिशा का हिस्सा 9% था। आदिवासी राज्य की आबादी का 22.85 प्रतिशत हैं। अपनी जनजातीय आबादी की संख्या के मामले में, ओडिशा भारत में तीसरे स्थान पर है।
  • ओडिशा, देश में सबसे बड़ी और सबसे विविध जनजातीय आबादी में से एक है। ओडिशा में रहने वाले 62 आदिवासी समूहों में से 13 को पीवीटीजी के रूप में मान्यता प्राप्त है।ओडिशा राज्य में 13 ‘विशिष्टतः असुरक्षित जनजातीय समूह’ (PVTGs) निम्नलिखित हैं- डोंगरिया कोंध (Dungaria Kandha), बोंडा (Bonda), बिरहोर (Birhor), चुक्तिया भुंजिया (Chuktia Bhunjia), दीदई (Didayi), हिल खरिया (Hill Kharia), जुआंग (Juang), कुटिया कोंध (Kutia Kondh), लांजिया सोरा (Lanjia Saora), लोढ़ा (Lodha), मनकीडिया (Mankirdia), पाउड़ी भुइयां (Paudi Bhuyan) और सौरा (Saora)।
  • बोंडा ओडिशा के सबसे दक्षिणी जिले मलकानगिरी में समुद्र तल से 3,500 फीट ऊपर ऊंचे इलाकों में रहते हैं। ओडिशा में करीब 6,000 बोंडा हैं। इसी तरह 10,000 डोंगरिया कोंध रायगडा-कालाहांडी सीमा पर नियमगिरि पर्वत पठार पर 112 गांवों में रहते हैं।

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs)

  • सर्वप्रथम 1973 में ढेबर आयोग द्वारा जनजातीय समूहों में से सर्वाधिक कम विकसित समुदायों के लिए पृथक से "आदिम जनजातीय समूह" (primitive tribal group) के नाम से श्रेणीबद्ध किया गया।
  • सर्वप्रथम वर्ष 1975 में भारत सरकार द्वारा 52 अनुसूचित जनजातियों PVTGs नामक एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया गया। इसके पश्चात वर्ष 1993 में 23 और अनुसूचित जनजातियों को आदिम जनजातीय समूह (primitive tribals groups) के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
  • भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजातियों में कुछ जनजतियों को विशिष्ट मानदंडों जैसे- कम होती या स्थिर जनसंख्या (declining in population or stagnant population), कम साक्षरता दर (low literacy rate), प्राकृतिक कृषि तकनीक (pre-agriculture technique), आर्थिक पिछड़ापन (economically backwordness) एवं पृथक्करण (separation) आदि आधार पर चिन्हित किया जाता है।

PVTGs हेतु योजनाएं

  • PVTGs के विकास संबंधी योजना में 75 चिन्हित PVTGs शामिल हैं। इस योजना में PVTGs के विकास हेतु आवास, भूमि वितरण, भूमि और कृषि विकास आदि पर बल दिया जाता है। यह पूर्णतः केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • नौकरियों और स्वरोजगार के लिए जनजातीय क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण की योजना बनाना एवं उसका क्रियान्वयन करना। जनजातीय जनसंख्या के समग्र विकास के लिए वनबंधु कल्याण योजना।
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006: यह जनजातीय के व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता प्रदान करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत PVTGs के आवास संबंधी अधिकार का प्रावधान किया गया है।

PVTGs से संबन्धित तथ्य

  • भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा पीवीटीजी समूह के लिए निर्दिष्ट उपर्युत्तफ़ मानदण्डों के आधार पर देश में वर्तमान में 75 पीवीटीजी समूहों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया है। इसके लिए नोडल एजेंसी भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय ही है।
  • ये पीवीटीजी समूह देश के 18 राज्यों तथा एक संघ राज्य क्षेत्र (अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह) में निवास करते हैं।
  • राज्यों में सबसे ज्यादा ओडिशा में पीवीटीजी समूह (13) हैं, जबकि राजस्थान, मणिपुर और त्रिपुरा में एक-एक पीवीटीजी समूह हैं।
  • अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 5 पीवीटीजी समूह हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं- ग्रेट अण्डमानीज, जारवा, ओंग, सेंटिनलीज, शोम पेन।
  • देश में पीवीटीजी की जनसंख्या लगभग 27,68,22 है। 12 पीवीटीजी ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या 50 हजार या इससे अधिक है जबकि अन्य समूह की जनसंख्या 1000 या इससे कम है।
  • राजस्थान में निवास करने वाले पीवीटीजी ‘सहारिया’ की जनसंख्या सबसे अधिक ‘4,50,217’ है, जबकि अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह की सेंटिनलीज और ग्रेट अण्डमानीज की संख्या सबसे कम क्रमशः 39 और 43 है।