यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: दक्षिणी महासागर (Southern Ocean)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): दक्षिणी महासागर (Southern Ocean)

दक्षिणी महासागर (Southern Ocean)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका (National Geographic magazine) ने विश्व महासागर दिवस (8 जून) के मौके पर ‘दक्षिणी महासागर’ को दुनिया के पांचवें महासागर के रूप में मान्यता दी है।

प्रमुख बिन्दु

  • दक्षिणी महासागर वास्तव में अंटार्कटिका के आसपास का महासागरीय इलाका है। यह बहुत लंबे समय से विवाद का विषय रहा है कि क्या इस महासागरीय क्षेत्र को अलग नाम दिया भी जाए या नहीं। इसीलिए अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अलग से महासागर घोषित नहीं किया जा सका था।
  • अंटार्कटिका के आसपास का 60 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक का इलाका दक्षिणी महासागर कहलाएगा। इसमें डार्क पैसेज और स्कोटिया सागर शामिल नहीं होगा।
  • इसके अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट (Antarctic Circumpolar Current, ACC) द्वारा भी इसे परिभाषित किया गया है जिसका विकास 34 मिलियन वर्ष पहले हुआ था। अंटार्कटिका के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की ओर मझासागरीय धाराएँ प्रवाहित होती है।

अंटार्कटिका सर्कम्पोलर करंट

  • अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट (ACC) अंटार्कटिका के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है, एक व्यापक उतार-चढ़ाव वाले बैंड में, जो लगभग 60 डिग्री दक्षिण के अक्षांश के आसपास केंद्रित है। यह वह रेखा है जिसे अब दक्षिणी महासागर की उत्तरी सीमा के रूप में परिभाषित किया गया है। ACC के अंदर, पानी ठंडा है और उत्तर में समुद्र के पानी की तुलना में थोड़ा कम खारा है।
  • सतह से समुद्र तल तक फैले हुए, ACC किसी भी अन्य महासागरीय प्रवाह की तुलना में अधिक पानी का परिवहन करता है। यह अटलांटिक, प्रशांत और हिंद महासागरों से पानी खींचता है, जिससे एक वैश्विक परिसंचरण प्रणाली को चलाने में मदद मिलती है जिसे कन्वेयर बेल्ट (Conveyor belt) के रूप में जाना जाता है, जो ग्रह के चारों ओर हीट का परिवहन करता है।
  • वैज्ञानिक वर्तमान में अध्ययन कर रहे हैं कि मानव संचालित जलवायु परिवर्तन दक्षिणी महासागर को कैसे बदल रहा है।

मान्यता का महत्व

  • दक्षिणी महासगर में बेहद अनोखे और नाजुक जलीय ईकोसिस्टम (Aquatic Ecosystem) पाए जाते हैं जहां वेल, पेंग्विन्स और सील्स जैसे जीव रहते हैं। ऐसी हजारों प्रजातियां हैं जो सिर्फ यहीं रहती हैं, और कहीं नहीं पाई जातीं।
  • इस क्षेत्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों का काफी असर पड़ा है। क्रिल (Krill) और पैटागोनियन (Patagonian) टूथफिश जैसी प्रजातियों पर औद्योगिक मछली पकड़ने का प्रभाव दशकों से दक्षिणी महासागर में एक चिंता का विषय रहा है। ऐसे में संरक्षण की जरूरत के चलते भी इसे अलग से मान्यता देना अहम हो जाता है।
  • दक्षिणी महासागर का पारिस्थितिक प्रभाव कहीं और भी है। कुछ समुद्री पक्षी अंदर और बाहर भी प्रवास करते हैं। दक्षिणी महासागर की ओर ध्यान आकर्षित करके, नेशनल ज्यॉग्रैफिक सोसाइटी इसके संरक्षण को बढ़ावा देने की उम्मीद करती है।

इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन

  • इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) ने वर्ष 1937 में अपने दिशानिर्देशों में दक्षिणी महासागर को मान्यता दी लेकिन विवाद के कारण 1953 में इस पदनाम को निरस्त कर दिया गया। उसने इस मामले पर तब से विचार-विमर्श कर रहा है, लेकिन अभी तक दक्षिणी महासागर को बहाल करने के लिए अपने सदस्यों से पूर्ण सहमति प्राप्त नहीं हुई थी।
  • साल 1999 में नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOA) ने भी दक्षिणी महासागर को पांचवे महासागर के तौर पर पहचान दी थी। लेकिन साल 2000 में इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) इससे सहमत नहीं हुई। विदित है कि IHO ही सभी सागरों, महासागरों और संचालन पानी का सही तरीके से सर्वे करने के बाद उसका नक्शा बनाता है।