यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: सूर्य ग्रहण एवं उसका महत्व (Solar Eclipse and Its Importance)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): सूर्य ग्रहण एवं उसका महत्व (Solar Eclipse and Its Importance)

सूर्य ग्रहण एवं उसका महत्व (Solar Eclipse and Its Importance)

चर्चा का कारण

  • 21 जून, 2020 को भारत के उत्तरी हिस्सों में वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annual Solar Eclipse) दिखाई दिया, जो खगोलीय विज्ञान में महत्वपूर्ण घटना है। गौरतलब है कि 25 साल बाद ये पहला मौका है जब सूर्य वलायाकार यानी अंगूठी की तरह दिखा, इससे पहले वर्ष 1995 में इस तरह का ग्रहण देखा गया था।
  • खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में 21 मई 2031 को दिखाई देगा, जबकि अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण 20 मार्च, 2034 को देखा जाएगा।

ग्रहण क्या है

  • ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब एक खगोलीय पिंड पर दूसरे खगोलीय पिंड की छाया पडती है, तब ग्रहण होता है। ग्रहण शब्द का उपयोग प्रायः सूर्य अथवा चंद्र ग्रहण का विवरण करने में होता है।
  • जितने भी ग्रहण होते हैं, उनमें से 70% सूक्ष्म ग्रहण तथा 30% स्थूल ग्रहण होते हैं। मानव केवल 30% भौतिक ग्रहणों को ही समझ पाता है। इस प्रकार मानव सूक्ष्म ग्रहणों से पूर्णतया अनभिज्ञ रहता है।

सूर्य ग्रहण क्या है?

  • भौतिक विज्ञान के अनुसार जब सूर्य व पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
  • गौरतलब है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और पृथ्वी की इसी प्रक्रिया के दौरान कभी कभी चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे वह सूर्य की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है, इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना अमावस्या को ही होती है।
  • सूर्य ग्रहण मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं- आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse), वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annual Solar Eclipse) तथा पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse)।

सूर्य ग्रहण का महत्व

  • सौर कोरोना की संरचना को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अलग-अलग धारणाएं प्रचलित हैं क्योंकि सूर्य के तीव्र चमक के चलते इसका अध्ययन बेहतर तरीके से करना संभव नहीं है। लेकिन पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कोरोना का अध्ययन आसानी से किया जा सकता है।
  • सूर्य के आस-पास के वातावरण में सौर तूफान और सौर चमक जैसी बहुत-सी हलचलें होती रहती हैं, जो अंतरिक्ष में उपग्रहों के संचालन, टेलीकम्युनिकेशन्स, जीपीएस नेविगेशन नेटवर्क और इलेक्ट्रिक पावर ग्रिड जैसी आधुनिक तकनीकों को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार की खगोलीय घटनाओं को समझना काफी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये पृथ्वी समेत सौर प्रणाली के शेष सभी हिस्सों को प्रभावित करते ह

सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानियाँ

  • सूर्य ग्रहण के दौरान सोलर रेडियेशन से आँखों के नाजुक टिशू खराब हो सकते हैं, जिससे स्थायी अंधापन या रेटिना में जलन हो सकती है। इसे जिसे सोलर रेटिनोपैथी (Solar Retinopathy) कहते हैं। सूर्य ग्रहण को खास फिल्टर वाले चश्मों से देखने की सलाह दी जाती है जिन्हे आइक्लिप्स ग्लासेस कहा जाता है।