यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: कश्मीर से पूर्वोत्तर तक अब केसर की महक (Saffron Cultivation in Northeast)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): कश्मीर से पूर्वोत्तर तक अब केसर की महक (Saffron Cultivation in Northeast)

कश्मीर से पूर्वोत्तर तक अब केसर की महक (Saffron Cultivation in Northeast)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में सिक्किम में एक पायलट परियोजना के रूप में केसर की खेती का सफल प्रयोग किया गया।
  • इस सफल प्रयोग से आशा बढ़ गयी है कि "केसर का कटोरा जो अभी तक कश्मीर तक ही सीमित था अब उसका जल्द ही भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र तक विस्तार हो सकता है।"
  • उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जुलाई में कश्मीर में पैदा होने वाले केसर को ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (जीआई) प्रमाण पत्र मिल गया है।

क्या है केसर के लिए पायलट परियोजना?

  • उत्तर पूर्वी प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं प्रसार केंद्र (NECTAR) और सिक्किम सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बॉटनी और हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में केसर उगाने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए
    पायलट परियोजना में मदद प्रदान की।
  • सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के बॉटनी और हॉर्टिकल्चर विभाग ने सिक्किम के यांगयांग क्षेत्र की मिट्टी और उसके वास्तविक पीएच स्थितियों को समझने के लिए परीक्षण किए।
  • इस पायलट परियोजना में केसर के बीजों से निकले पौधे कश्मीर से सिक्किम ले जाए गए और उन्हें वहां रोपा गया। ये पौधे पूर्वोत्तर राज्य के दक्षिण भाग में स्थित यांगयांग में फल-फूल रहे हैं।
  • इस परियोजना के परिणाम का सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के अन्य भागों में भी उपयोग करने की योजना है।

भारत में केसर की खेती की वर्तमान स्थिति

  • केसर का उत्पादन लंबे समय से केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर में एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र तक ही सीमित है।
  • भारत में पंपोर क्षेत्र को आमतौर पर कश्मीर के केसर के कटोरे के रूप में जाना जाता है। इसका केसर के उत्पादन में मुख्य योगदान है।
  • इसके बाद बडगाम, श्रीनगर और किश्तवाड़ जिलों का स्थान हैं।
  • केसर पारंपरिक रूप से प्रसिद्ध कश्मीरी व्यंजनों के साथ जुड़ा हुआ है। इसके औषधीय गुणों को कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है।
  • केसर की खेती कश्मीर के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित रही है इसलिए इसका उत्पादन भी सीमित ही रहा है।
  • हालांकि नेशनल मिशन ऑन केसर ने इसकी खेती को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन ये उपाय अभी तक विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित थे।

राष्ट्रीय केसर मिशन

  • वर्ष 2010-2011 में भारत सरकार द्वारा 411 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय केसर मिशन परियोजना की शुरुआत की गयी थी।
  • राष्ट्रीय केसर मिशन को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत एक उपयोजना के रूप में केसर के उत्पादन में वृद्धि करने के उद्देश्य से लांच किया गया था।
  • इसके तहत 3,715 हेक्टेयर केसर की क्यारियों के जीणोद्धार का प्रस्ताव किया गया था।
  • मिशन के तहत पंपोर के डूसू क्षेत्र में इंडिया इंटरनेशनल केसर ट्रेड सेंटर (केसर पार्क) नाम से एक व्यापार केंद्र बनाया गया है।
  • इस केंद्र पर, किसानों को फसल की कटाई चुनाई के बाद के काम के लिए उच्च तकनीक की सुविधाएं मिलेंगी।
  • इसके अलावा इस केंद्र में केसर की ई-नीलामी के माध्यम से केसर के विपणन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।