यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: रिफॉर्म लिंक्ड बॉरोइंग विंडो (Reform Linked Borrowing Window)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): रिफॉर्म लिंक्ड बॉरोइंग विंडो (Reform Linked Borrowing Window)

रिफॉर्म लिंक्ड बॉरोइंग विंडो (Reform Linked Borrowing Window)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्थिरता सुनिश्चित करते हुए महामारी के दौरान जन कल्याण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साबित हुआ है, लेकिन भारतीय राज्य रिफॉर्म लिंक्ड बॉरोइंग विंडो’ (Reform Linked Borrowing window) के कारण वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1.06 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त उधार लेने में सक्षम थे।

रिफॉर्म लिंक्ड बॉरोइंग विंडो

  • मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत भारत सरकार ने घोषणा की कि राज्य सरकारों को 2020-21 के लिए ज्यादा उधार लेने की अनुमति होगी। अतिरिक्त 2% जीएसडीपी की अनुमति दी गई, जिसमें 1% पर कुछ आर्थिक सुधारों को लागू करने की शर्त जोड़ी गई।
  • इसने राज्यों को अतिरिक्त फंड पाने के लिए प्रगतिशील नीतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। 23 राज्यों ने संभावित ₹2.14 लाख करोड़ में से ₹1.06 लाख करोड़ की अतिरिक्त उधारी ली।
  • रिफॉर्म लिंक्ड बॉरोइंग विंडो जनता और विशेष रूप से गरीब, कमजोर और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए जीवन की सुगमता में सुधार से जुड़ा था। इसके अंतर्गत राज्यों द्वारा राजकोषीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया गया।
  • अक्टूबर 2020 में केंद्र सरकार ने चार महत्त्वपूर्ण सुधारों के कार्यान्वयन के लिये राज्यों को उधार लेने की अनुमति प्रदान की थी। ये चार सुधार हैं -एक राष्ट्र एक राशन कार्ड प्रणाली का कार्यान्वयन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार, शहरी स्थानीय निकाय एवं विद्युत क्षेत्र में सुधार।

एक राष्ट्र एक राशन कार्ड प्रणाली का कार्यान्वयन

  • एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ नीति के तहत राज्य सरकारों को सुनिश्चित करना था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्य में सभी राशन कार्ड, परिवार के सभी सदस्यों की आधार संख्या से जुड़ें और उचित मूल्य दुकानों में ‘इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल’ डिवाइस हों।
  • इसके लिए 17 राज्यों ने राशन-कार्ड पोर्टेबिलिटी की सुविधा दी और उचित मूल्य की दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट-ऑफ-सेल डिवाइस स्थापित किए। इसके लिए उन्हें 37,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी दी गई। इससे प्रवासी मजदूरों को देश में कहीं भी राशन लेने की सुविधा प्राप्त हुई।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार

  • 20 राज्यों ने 39,521 करोड़ रुपये की उधारी लेने के लिए व्यवसायों द्वारा सामना किए जाने वाले लालफीताशाही को कम करने के लिए सुधारों को पूरा किया। उल्लेखनीय है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में कारोबार सुगमता के लिए कई तरह के पैमाने रखे गए हैं- इनमें लेबर रेगुलेशन, ऑनलाइन सिंगल विंडो, सूचनाओं तक पहुंच, पारदर्शिता इत्यादि शामिल हैं।

शहरी स्थानीय निकाय में सुधार

  • राज्यों को संपत्ति कर, पानी और सीवरेज शुल्क की न्यूनतम दरों को वर्तमान लागत के अनुरूप अधिसूचित करना जरूरी था। यह शहरी क्षेत्रों में स्टाम्प डड्ढूटी गाइडलाइंस, लेन-देन के लिये मूल्य एवं वर्तमान लागत के अनुरूप था। 11 राज्यों ने इन सुधारों को पूरा किया और उन्हें ₹15,957 करोड़ की अतिरिक्त उधारी दी गई। इस कदम से शहरी गरीबों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

विद्युत क्षेत्र में सुधार

  • चौथा सुधार किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (क्ठज्) के माध्यम से बिजली सब्सिडी प्रदान करना था। इसके लिए वर्ष के अंत तक प्रायोगिक आधार पर एक जिले में क्रियान्वयन के साथ राज्यव्यापी योजना तैयार करनी थी। इससे जीएसडीपी के 0.15% अतिरिक्त उधारी जुड़ी थी।