यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: जेलों में भीड़भाड़: एक बारहमासी समस्या (Overcrowding in Prisons: A Perennial Problem)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): जेलों में भीड़भाड़: एक बारहमासी समस्या (Overcrowding in Prisons: A Perennial Problem)

जेलों में भीड़भाड़: एक बारहमासी समस्या (Overcrowding in Prisons: A Perennial Problem)

चर्चा में क्यों?

  • भारत के जेलों में भीड़भाड़ एक बारहमासी समस्या रही है, किन्तु कोरोना महामारी के दौरान यह गंभीर स्थिति को प्रदर्शित करता है। इस समस्या के समाधान के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में पात्र कैदियों की अंतरिम रिहाई का निर्देश दिया है।

प्रमुख बिन्दु

  • सुप्रीम कोर्ट ने देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के होने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का एक जगह होना बड़ी समस्या है और यह कोरोना वायरस की दूसरी लहर के फैलने का बड़ा कारण हो सकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का उद्देश्य जेलों में भीड़भाड़ कम करना तथा कैदियों के जीवन तथा स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा करना है।
  • पिछले साल कोर्ट ने इस तरह का एक आदेश बहुत पहले ही पारित कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश देशव्यापी तालाबंदी से पहले ही आया था। अदालत ने तब सभी राज्यों को निवारक कदम उठाने के साथ-साथ उच्चाधिकार प्राप्त समितियों का गठन करने का आदेश दिया था ताकि उन कैदियों की श्रेणी निर्धारित की जा सके जिन्हें एक निर्दिष्ट अवधि के लिए जमानत या पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि जेल में कई अधिकारियों के अलावा कई विजिटर्स भी आते हैं। इस वजह से कैदियों को वायरस का संक्रमण लगने की आशंका ज्यादा होती है। बेंच ने यह भी कहा कि जेल कोरोना वायरस के फैलने का कारण बन सकते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) में निर्धारित मानदंडों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, जिसके तहत पुलिस को अनावश्यक गिरफ्रतारी नहीं करने के लिए कहा गया था, खासकर उन मामलों में जिनमें जेल की सजा सात साल से कम है।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436-A

  • सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि देश के सभी जिलों के अधिकारी आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure- Cr.P.C) की धारा 436-ए को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436-ए के तहत अगर कोइ कैदी अपने उस कथित अपराध के लिये कानून में निर्धारित सजा की आधी अवधि पूरी कर चुका हो तो उसे जमानत या निजी मुचलके पर रिहा किया जा सकता है।
  • हालांकि, यह लाभ उन विचाराधीन कैदियों को नही मिल सकता जिनके िखलाफ किसी ऐसे अपराध में लिप्त होने का आरोप है जिनमें मौत की सजा का प्रावधान है या फिर कोई अन्य स्पष्ट प्रावधान किया गया हो।

अंडरट्रायल कैदियों की क्षमता से अधिक संख्या

  • दिल्ली की तिहाड़ जेल और संभवतः पूरे भारत में लगभग 82% कैदी अंडरट्रायल हैं। देश भर के 19 राज्यों की जेल अपनी 100 फीसदी क्षमता से ज्यादा भरी हैं। इन जेलों में 67.7 फीसदी वो कैदी हैं, जो अंडरट्रायल हैं।
  • यानी जिनका केस या तो अभी सुना जा रहा है। या उनके आरोपों की जांच चल रही है। आश्चर्यजनक बात ये है कि एक दशक पहले भी जेलों में 66 फीसदी अंडरट्रायल कैदी बंद थे। पूरे दस साल बाद भी अंडरट्रायल कैदियों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ गई है।

आगे की राह

  • बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि कोरोनावायरस की महामारी की वजह से ही शायद देश की जेलों की हालत में सुधार हो जाये और सजायाफ्ता कैदियों की तुलना में कहीं ज्यादा बंद विचाराधीन कैदियों में ज्यादातर की रिहाई हो जाये।
  • यदि ऐसा होता है तो इससे छोटे मोटे अपराध के आरोप में बंद हुये आरोपियों को समाज में फिर से पुनर्वास का अवसर ही नहीं मिलेगा बल्कि इससे जेलों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ भी कम करने में मदद मिलेगी।