यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (National Medical Commission)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (National Medical Commission)

राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (National Medical Commission)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में लोकसभा में National Medical Commission Bill 2019 पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य 63 साल पुराने भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (MCI) को खारिज कर एक नई चिकित्सा शिक्षा प्रणाली मुहैया कराने की है।
  • गौरतलब है कि विधेयक के संसद से पारित होने के बाद देश में मेडिकल शिक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए MCI की जगह राष्ट्रीय मेडिकल आयोग MNC के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। जिसमें पर्याप्त और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता, चिकित्सा पेशेवरों के जरिए आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान को अपनाना, चिकित्सा संस्थानों का समय समय पर मूल्यांकन करना, और एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र तैयार करने जैसे फैसले शामिल है।

राष्ट्रीय मेडिकल आयोग

  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में कुल 29 सदस्य होंगे जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
  • इसके अलावा एक सर्च कमिटी चेयरपर्सन, पार्ट टाइम सदस्यों और छब्प्ैड के अंतर्गत गठित चार स्वायत्त बोर्ड के प्रेजिडेंट्स के नामों का सुझाव केंद्र सरकार को देगी।
  • सर्च कमिटी में कुल पांच सदस्य होंगे, जिनमें कैबिनेट सेक्रेटरी और केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन विशेषज्ञ शामिल होंगे।
  • भारतीय चिकित्सा परिषद को हटा कर राष्ट्रीय मेडिकल आयोग विधेयक क्यों लाया गया है:
  • ध्यावत है कि MCI की कार्यशैली से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में उसके कामकाज की निगरानी के लिए 6 सदस्यीय कमेटी का गठन का फैसला सुनाया था। लेकिन इसके बाद भी एमसीआई पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
  • हालाँकि वर्तमान में सरकार भारतीय चिकित्सा परिषद MCI का कामकाज 12 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स यानी BOG देख रेख में चल रहा है।
  • मौजूदा वक्त में सरकार की कोशिश देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी को दूर करना है ताकि लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकें।

चुनौतियाँ

  • WHO के मुताबिक स्वास्थ्य केवल बीमारी या दुःख का होना ही नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तंदरूस्ती भी पूरी तरह से जरूरी है।
  • देश में मौजूद स्वास्थ्य संकट की मुख्य वजहों में बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, गरीबी और खाद्य असुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार हैं।
  • इसके अलावा डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी, स्वास्थ्य पर कम खर्च और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण होने से स्वास्थ्य सेवाएं काफी महंगी हुई है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में औसतन एक डॉक्टर पर करीब 11 हजार की जनसंख्या निर्भर हैं। जबकि WHO के तय मानकों के मुताबिक 1 डॉक्टर पर सिर्फ 1 हजार जनसंख्या होनी चाहिए।

संविधान में स्वास्थ्य संबंधित प्रावधान

  • भारत में नागरिकों को स्वास्थ्य का अधिकार संविधान की धारा 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मिला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन का अधिकार बताया है।
  • इसके अलावा संविधान का अनुच्छेद 47 भी राज्यों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के सुधार, पोषण स्तर में बढ़ावा और जीवन स्तर को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी देता है।

आगे की राह

  • मौजूदा वक्त में यदि कानून द्वारा व्यवस्था नहीं बदली जाती है तो WHO के मानकों के आधार पर तय लक्ष्यों को हांसिल कर पाना भारत के लिए मुश्किल होगा। इसलिए अब समय आ गया है कि देश में डॉक्टरों की संख्या, बेहतर प्रशिक्षण और हर क्षेत्र में उनकी उपलब्धता को जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।