यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: नेफेड के शहद एफपीओ कार्यक्रम (NAFED's Honey FPO Program)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): नेफेड के शहद एफपीओ कार्यक्रम (NAFED's Honey FPO Program)

नेफेड के शहद एफपीओ कार्यक्रम (NAFED's Honey FPO Program)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने पांच राज्यों में नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) के शहद किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

प्रमुख बिन्दु

  • यह कार्यक्रम सहकारी संस्था नाफेड ने बनाया है। एक केंद्रीय योजना के तहत 10,000 एफपीओ का गठन किया जाना है। इसके लिए सरकार द्वार तय चार कार्यान्वयन एजेंसियों में से एक नाफेड है, जिसका उद्देश्य कृषि को आत्मनिर्भर बनाना है।
  • कार्यक्रम के तहत, नेफेड पांच राज्यों - पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में मधुमक्खी पालकों के लिए एफपीओ स्थापित करने में मदद करेगा।
  • शहद एफपीओ के माध्यम से, नाफेड बेरोजगार महिलाओं और आदिवासी आबादी के लिए एक व्यवसाय के रूप में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने और उनकी आजीविका के स्तर को बढ़ाने के लिए भी काम करेगा।
  • नाफेड ने पहले ही मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन के तहत पहला शहद एफपीओ चंबल एफईडी शहद उत्पादक सहकारी समिति स्थापित करने में मदद की है, जिसे 11 नवंबर, 2020 को पंजीकृत किया गया था। यह एफपीओ राज्य के मुरैना जिले के लगभग 68 गांवों वाले पांच ब्लॉकों को अपने दायरे में लेगा।
  • अन्य चार एफपीओ सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), पूर्वी चंपारण (बिहार), मथुरा (उत्तर प्रदेश), और भरतपुर (राजस्थान) में स्थापित किए जाएंगे। एक साथ मिलकर, यह पांच राज्यों में 340 गांवों को अपने दायरे में लेगा। इन पांच एफपीओ के माध्यम से, 4,000-5,000 मधुमक्खी पालकों और शहद संग्राहकों को सीधे लाभान्वित किया जाएगा।

भारत में मधुमक्खी पालन

  • भारत में मधुमक्खी पालन का काम असंगठित क्षेत्र में अधिकतम ग्रामीण और आदिवासी आबादी के बीच प्रचलित है। देश में शहद उत्पादन की एक बड़ी क्षमता होने के बावजूद, मधुमक्खी पालन उद्योग अभी भी अविकसित है।

मीठी क्रांति

  • मधुमक्खी पालन और इससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2016 में मीठी क्रांति को शुरू किया गया था। केंद्र सरकार की कोशिश है कि आने वाले वक्त में यह मीठी क्रांति न केवल सफल हो, बल्कि इस लक्ष्य तक पहुंचे कि दुनिया में शहद की दृष्टि से भारत एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकें।
  • देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों की बड़ी आबादी को साथ लेकर व कंधे से कंधा मिलाकर चलना जरूरी है। इस स्कीम से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि कृषि उपज का उत्पादन व
    उत्पादकता भी बढ़ेगी, किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित होंगे, एफपीओ के माध्यम से उन्हें अपनी कृषि उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।

शहद एफपीओ कार्यक्रम से लाभ

  • शहद एफपीओ न केवल अपने सदस्यों को वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन में उनके कौशल को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि शहद तथा मोम और प्रोपोलिस जैसे संबद्ध उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए अत्याधुनिक ढांचागत सुविधाओं की स्थापना में भी मदद करेगा।
  • इसके अलावा, वे गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला संग्रह, भंडारण, बॉटलिंग और विपणन में भी मदद करेंगे। इन बीपीओ को राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के नेशनल मधुमक्खी पालन एवं हनी मिशन (एनबीएचएम) के तहत सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
  • सभी पांच राज्यों के मधुमक्खी पालकों और शहद संग्रहकर्ताओं को नाफेड के विपणन चौनलों के माध्यम से अपने शहद और अन्य संबद्ध उत्पादों की ब्रांडिंग और सामूहिक विपणन में मदद की जाएगी। इसके अलावा मधुमक्खी पालकों और शहद संग्रहकर्ताओं के आय में सुधार के लिए विदेशी बाजार का पता लगाने का भी प्रयास किया जाएगा।