यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना कार्यक्रम (MP Local Area Development Scheme Program)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना कार्यक्रम (MP Local Area Development Scheme Program)

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना कार्यक्रम (MP Local Area Development Scheme Program)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD) योजना को फिर से शुरू करने की मांग की है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अप्रैल 2020 में ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम’ का प्रयोग करते हुए ‘सांसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD) योजना को निलंबित कर दिया था।

आवश्यकता क्यों?

  • लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के अनुसार COVID-19 की दूसरी लहर और चक्रवाती तूफान यास के कारण बंगाल और ओडिशा में हुई तबाही के कारण MPLAD फंड को शुरू किया जाये ताकि प्रभावित लोगों की सहायता हो सके।
  • COVID-19 की दूसरी लहर को देखते हुए दस्ताने, मास्क और ऑक्सीमीटर जैसी छोटी वस्तुओं के अलावा पीपीई किट, ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर आदि महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना क्या है

  • एमपीलैड योजना 1993 में शुरू की गयी थी। इस योजना के तहत प्रत्येक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए तक की लागत के कार्यों के बारे में जिला कलेक्टर को सुझाव देने का विकल्प दिया गया है।
  • संसद-सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, जिन्हें आमतौर पर MPLAD फंड के रूप में जाना जाता है, का मुख्य उद्देश्य विकासात्मक कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराना है, जिसकी सिफारिश संसद सदस्यों द्वारा की जाएगी।
  • एमपीलैड पूर्ण रूप से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है, इस योजना के तहत एक संसदीय क्षेत्र के लिये वार्षिक रूप से दी जाने वाली राशि की अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपए हैं। इस योजना के माध्यम से संसद सदस्य अपने संसदीय क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को शुरू करने के लिये सुझाव दे सकते हैं।
  • एमपीलैड के लिए दिशानिर्देश, जिसे मंत्रालय ने निर्धारित किया है, जिसमें अलग-अलग विकास कार्यों के सुझाव दिए गए है। इसमें रेलवे हॉल्ट स्टेशनों का निर्माण, मान्यता प्राप्त शैक्षिक निकाय, सहकारी समितियाँ और वित्तीय सहायता के साथ अन्य संगठन प्रदान करना, वर्षा जल संचयन प्रणाली और साथ ही ब्ब्ज्ट कैमरे आदि लगाना आदि शामिल किया गया है।

एमपीलैड कितना सफल रहा

  • हाल में सरकार ने बताया कि एमपीलैड के तहत जारी कुल राशि में 5275 करोड़ रुपये खर्च नहीं किये गये। साल 2014 में चुने गये सांसदों ने 2004 और 2009 में चुने गये सांसदों के मुकाबले अपने फंड का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं किया था।
  • एमपीलैड योजना के तहत 15वीं से 16वीं लोकसभा के बीच खर्च न की जानेवाली राशि में 214 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी। जबकि, सांसद द्वारा स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कृषि और सड़कों आदि के विकास के लिए इस राशि को खर्च किया जाना चाहिए।
  • इस योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक हितों को ध्यान में रख कर इस राशि का इस्तेमाल किया जाये, लेकिन अक्सर यह होता नहीं।
  • संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए सांसदों को दी जानेवाली इस राशि से जुड़ा मामला जब सर्वाेच्च न्यायालय में गया, तो न्यायालय को बताया गया कि सांसद तो केवल विकास कार्यों के लिए अपना सुझाव देते हैं। विकास कार्य को करने की जिम्मेदारी तो सरकारी अधिकारियों की होती है। व्यावहारिक तौर पर देखें, तो ऐसा कौन सा आइएएस ऑफिसर है, जो अपने क्षेत्र के सांसद की बात नहीं मानेगा।
  • इसके अतिरिक्त पिछले कई वर्षो से सासंद निधि को लकेर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रही हैं। जमीनी स्तर पर विकास किये जाने के लिये आवंटित सांसद निधि की रकम आमतौर पर राजनीतिक लाभ के लिये खर्च की जाती है या फिर राजनेताओं के अपने काम में खर्च होती है।
  • प्रशासनिक आयोग भी सांसद निधि समाप्त करने की सिफारिश कर चुका है। आयोग का तर्क है कि सांसदों का काम प्रशासनिक खर्च पर नजर रखना है, न कि स्थानीय निकायों के काम करना।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद निधि पर निगरानी रखने के लिये थर्ड पार्टी द्वारा निगरानी रखने का फैसला किया था। लेकिन उसके बाद भी सरकार का आकलन है कि सांसद निधि के इस्तेमाल में पारदर्शिता नहीं है।

आगे की राह

  • अब जबकि एमपीलैड योजना को फिर से शुरू करने की मांग की गयी है, ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना महामारी को देखते हुए सांसद अपने निधि का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें।
  • एमपीलैड योजना को फिर से शुरू करने से कोविड 19 को समाप्त करने मे मदद तो मिलगी ही साथ ही स्वास्थ्य प्रणाली को और सुदृह किया जा सकेगा।
  • बाढ़, चक्रवात, सुनामी, भूकंप, तूफान और अकाल जैसी आपदाओं से ग्रसित क्षेत्रों में एमपीलैड के माध्यम से कई कार्यों को कार्यान्वित किया जा सकता है।