यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (विषय: चन्द्रमा की उपसतह पर पूर्व अनुमानों से अधिक धातुओं की उपस्थिति (Moon is more Metallic than Thought Before)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): चन्द्रमा की उपसतह पर पूर्व अनुमानों से अधिक धातुओं की उपस्थिति (Moon is more Metallic than Thought Before)

चन्द्रमा की उपसतह पर पूर्व अनुमानों से अधिक धातुओं की उपस्थिति (Moon is more Metallic than Thought Before)

चर्चा का कारण

  • नासा ने हाल ही में घोषणा की, कि लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्ष यान को इस बात के प्रमाण मिले हैं कि चंद्रमा के उपसतह में पहले से कहीं अधिक मात्र में लोहा और टाइटेनियम जैसी धातुएँ हैं।

पृष्ठभूमि

  • चंद्रमा की निचली सतह पर इस धात्विक वितरण को LRO पर स्थापित ‘सुक्ष्म रेडियो फ्रीक्वेंसी (Miniature Radio Frequency-Mini-RF) उपकरण द्वारा देखा गया है।
  • नासा के अनुसार यह खोज पृथ्वी और चद्रंमा के बीच एक स्पष्ट सम्बन्ध बनाने में सहायता कर सकती है चंद्रमा की उत्पत्ति को समझने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा वर्षों से पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा पर धातु के भडांर की उपस्थिति का पता लगान ेका प्रयास किया गया है और जैसे जैसे समय के साथ अधिक डेटा उपलब्ध होता गया है शोधकर्ता अपनी परिकल्पना को और अधिक परिष्कृत करने में सक्षम होते गए हैं

चंद्रमा की उत्पत्ति

  • चंद्रमा के उत्पति से संबंधित प्रचलित सिद्धांत यह है कि लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व मंगल ग्रह के आकार का एक आदि-ग्रह (Proto-planet) पृथ्वी निर्माण के आरंभिक काल में ही पृथ्वी से टकरा गया, जिसके फलस्वरूप पृथ्वी का एक टुकड़ा विखंडित होकर इसका उपग्रह बन गया।
  • इस परिकल्पना के पक्ष में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, जैसे कि चन्द्रमा तथा पृथ्वी की रासायनिक संरचना में लगभग समानता, आदि।

नासा की घोषणा का आधार

  • नासा के LRO अंतरिक्ष यान के Mini-RF उपकरण द्वारा चंद्रमा के उत्तरी गोलार्ध में स्थित क्रेटरों की सतह पर मिट्टðी में विद्युतीय गुण (electrical property) का परीक्षण किया गया।
  • परीक्षण में यह पाया गया कि क्रमिक रूप से 5 किमी व्यास के आकार तक बड़े क्रेटरों में पराविद्युत गुणों के स्तर में सापेक्षिक रूप से वृद्धि पायी गयी।
  • इससे बड़े आकार के क्रेटर में पराविद्युत स्थिरांक (dieletric constant) का मान सामान पाया गया।
  • इन निष्कर्षों ने इस संभावना को जन्म दिया कि बड़े क्रेटरों में पराविद्युत स्थिरांक में वृद्धि होने का कारण, उल्काओं द्वारा इन बड़े क्रेटरों का निर्माण के दौरान चंद्रमा की सतह के नीचे से लौह तथा टाइटेनियम ऑक्साइडयुक्त धूल का उपरी सतह पर आ जाना है।

इन निष्कर्षों का महत्व

  • ध्यातव्य है कि पृथ्वी की पर्पटी में चंद्रमा की अपेक्षा लौह ऑक्साइड की मात्र काफी कम पायी जाती है, वैज्ञानिक इसका कारण समझने का प्रयास कर रहे हैं।
  • अब, चंद्रमा पर धातु की अधिक मात्र की नई खोज ने वैज्ञानिकों के काम को और भी कठिन बना दिया है क्योंकि इससे, चंद्रमा-निर्माण संबधित परिकल्पनाओं की सत्यता पर प्रश्न-चिन्ह लगता है।
  • इसका एक संभावित कारण यह माना जा रहा है कि चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी की निचली सतह की सामग्री से हुआ हो, या हाल ही में चंद्रमा पर पायी गयी धातुओं की उपस्थिति चंद्रमा की पिघली हुई सतह के धीरे-धीरे ठंडा होने का परिणाम हो सकती है।

लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO)

  • LRO नासा का एक रोबोटिक अंतरिक्षयान है जो वर्तमान में चंद्रमा की परिक्रमा करते समय चित्रें का उपयोग करके डेटा एकत्र करता है और चंद्रमा की सतह का अध्ययन करता है।
  • LRO और लूनर क्रेटर ऑब्जर्वेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट मिशन 18 जून, 2009 को पृथ्वी से छोड़ा गया और इसने 23 जून, 2009 को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया।
  • इसे भविष्य के मानवयुक्त चन्द्र मिशन तथा मंगल मिशन संबंधी तैयारियों के क्रम में ‘लूनर प्रीकर्सर एंड रोबोटिक प्रोग्राम’ (LPRP) के अंतर्गत निर्मित किया गया है।
  • LRO नासा के न्यू विजन फॉर स्पेस एक्सप्लोरेशन’ के अंतर्गत पहला मिशन है।
  • LRO अंतरिक्षयान पर लगे उपकरण चंद्रमा के दिन-रात का तापमान, वैश्विक भू-स्थानिक ग्रिड (Global Geodetic Grid), चंद्रमा का एल्बिडो और उच्च रिजॉल्यूशन कलर इमेजिंग (High resolution color imaging) से संबंधित जानकारियाँ उपलब्ध करा रहे हैं।