यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Manufacturing Purchasing Managers Index)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Manufacturing Purchasing Managers Index)

मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Manufacturing Purchasing Managers Index)

चर्चा का कारण

  • आईएचएस मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (IHS Markit PMI) सर्वे के अनुसार देश की विनिर्माण गतिविधियों (Manufacturing activities) में लगातार सुधार हो रहा है। बिक्री में सुधार के बीच कंपनियों के उत्पादन में 13 सालों में (अक्टूबर, 2007 के बाद) सबसे तेज वृद्धि हुई है।

प्रमुख बिन्दु

  • आईएचएस मार्किट इंडिया का विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (Purchasing Managers' Index) अक्टूबर में बढ़कर 58.9 पर पहुंच गया, जो सितंबर में 56.8 था।
  • रोजगार में हालांकि मासिक गिरावट जारी है। बड़े पैमाने पर छंटनी हुई और इसका स्तर सितंबर की छंटनी जैसा रहा। यही नहीं, सभी उल्लििखत सब-सेक्टर्स में पेरोल का आंकड़ा घटा है। मैन्यूफैक्चरिंग
    और सर्विस दोनों ही सेक्टर्स की कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या घटी है। इसके कारण प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की संख्या में लगातार 8वें महीने गिरावट आई है।
  • सर्विस सेक्टर में इनपुट कॉस्ट 8 माह के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन सर्विस प्रॉडक्ट में कीमत में हल्की बढ़ोतरी हुई है। इस बीच कोरोनावायरस का टीका मिलने की उम्मीद जगने से अगले 12 महीने के लिए बेहतर कारोबारी उम्मीद दिखाई पड़ी।

मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स

  • पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (पीएमआई) मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक सेहत को मापने का एक संकेतक है। इसके जरिए किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है। पीएमआई सेवा क्षेत्र समेत निजी क्षेत्र की अनेक गतिविधियों पर आधारित होता है। इसमें शामिल तकरीबन सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से होती है।
  • पीएमआई का मुख्‍य मकसद इकोनॉमी के बारे पुष्‍ट जानकारी को आधिकारिक आंकड़ों से भी पहले उपलब्‍ध कराना है, जिससे अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में सटीक संकेत पहले ही मिल जाते हैं। पीएमआई 5 प्रमुख कारकों पर आधारित होता है। इन पांच प्रमुख कारकों में नए ऑर्डर, इन्‍वेंटरी स्‍तर, प्रोडक्‍शन, सप्‍लाई डिलीवरी और रोजगार वातावरण शामिल हैं।
  • पीएमआई की शब्दावली में इंडेक्स के 50 से ऊपर रहने का मतलब यह होता है कि संबंधित उद्योग में विकास हुआ। इंडेक्स के 50 से नीचे रहने का मतलब यह हुआ कि उद्योग में गिरावट आई।
  • यह 50 से जितना नीचे या ऊपर होता है, उद्योग में उतनी ही अधिक गिरावट या विकास का पता चलता है। फरवरी के लिए यह पहला आधिकारिक आर्थिक संकेतक है, जो यह बता रहा है कि दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी वायरस का बुरा असर हो सकता है।

उत्पादन परिदृश्य में सुधार के संकेत

  • सर्वे के अनुसार, इस दौरान मुद्रास्फीतिक दबाव कुछ कम हुआ है। विनिर्माण के सामान के दामों में मामूली बढ़ोतरी हुई है, वहीं बिक्री मूल्य भी थोड़ा ही बढ़ा है। आगे के साल के लिए उत्पादन परिदृश्य में सुधार हुआ है। कंपनियों को उम्मीद है कि कोविड-19 के मामले घटने तथा अन्य कारोबार क्षेत्रों के खुलने से उत्पादन में अच्छी वृद्धि दर्ज होगी।