यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: महाराष्ट्र द्वारा वन अधिकार अधिनियम में संशोधन (Maharashtra amends Forest Rights Act)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): महाराष्ट्र द्वारा वन अधिकार अधिनियम में संशोधन (Maharashtra amends Forest Rights Act)

महाराष्ट्र द्वारा वन अधिकार अधिनियम में संशोधन (Maharashtra amends Forest Rights Act)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act & FRA), 2006 को संशोधित करते हुए एक अधिसूचना जारी की है, जिसके जरिये आदिवासी और अन्य पारम्परिक रूप से वन-आवास वाले परिवारों को आस पड़ोस के वन क्षेत्रें में घर बनाने की अनुमति प्रदान की गयी है।

पृष्ठभूमि

  • राज्यपाल द्वारा यह अधिसूचना संविधान की अनुसूची 5 के अनुच्छेद 5 के उपबिंदु (1) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
  • सरकार के इस फैसले से आदिवासी और अन्य पारम्परिक रूप से वन आवास वाले परिवार को एक बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही वन-निवासी परिवारों को अपने मूल गाँवों से बाहर प्रवास करने से रोकने और उनके पड़ोस की वन भूमि में ग्राम क्षेत्रें का विस्तार करके उन्हें आवास देने में भी मदद मिलेगी।

क्या है वनाधिकार अधिनियम 2006?

  • भारत में, आजादी के पहले के शोषणकारी अंग्रेजी कानून के कारण आदिवासियों और जंगलवासियों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया था। दशकों तक उन्हें जमीन और अन्य संसाधनों से वंचित रखा गया।
  • इस समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार ने दिसंबर 2006 में वनाधिकार कानून पारित किया। यह कानून पारंपरिक जंगलवासियों और समुदायों के अधिकारों को कानूनी मान्यता देता है। इसका आधिकारिक नाम-अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 है।

इस कानून के जरिये कौन-कौन से अधिकार दिए गए हैं?

  • मालिकाना हक- आदिवासियों या वनवासियों को उस जमीन का पट्टा दे दिया जाएगा जिस पर वो खेती कर रहे हैं या लगभग तीन पीढि़यों या 75 साल से रह रहे हैं। ये पट्टा अधिकतम 4 हेक्टेयर तक दिया जा सकता है। स्वामित्व केवल उस भूमि के लिए है जो वास्तव में संबंधित परिवार द्वारा खेती की जा रही है, इसका मतलब है कि कोई नई भूमि नहीं प्रदान की जाएगी।
  • वन उत्पादों के उपयोग का अधिकार- लघु वन उपज, चारागाह, और आने जाने के रास्ते के उपयोग का हक होगा।
  • राहत और विकास से जुड़े हक- वन्य सुरक्षा को देखते हुए अवैध निकासी या जबरन विस्थापन के मामले में पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं का अधिकार होगा।
  • वन प्रबंधन का अधिकार- जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा का हक दिया गया है।

संविधान की पांचवीं अनुसूची

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, ‘अनुसूचित क्षेत्र’ को भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के पैरा 6(1) के अनुसार- ‘ऐसे क्षेत्रें के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया हो’।
  • भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 6(2) के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल के परामर्श से राज्य में किसी भी अनुसूचित क्षेत्र के क्षेत्र में वृद्धि कर सकते हैं, और किसी भी राज्य के संबंध में उन क्षेत्रें को पुनर्परिभाषित करने के लिए नए आदेश दे सकते हैं, जिसे अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया जाना है।

अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने के लिए मानदंड

पांचवीं अनुसूची के तहत किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र के रूप में घोषित करने के लिए मानदंड हैंः

  • जनजातीय आबादी की प्रधानता,
  • क्षेत्र की सघनता और उचित आकार,
  • एक व्यवहार्य प्रशासनिक इकाई जैसे जिला, ब्लॉक या तालुक, और
  • पड़ोसी क्षेत्रें की तुलना में क्षेत्र का आर्थिक पिछड़ापन
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