यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: लोक अदालत (Lok Adalat)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): लोक अदालत (Lok Adalat)

लोक अदालत (Lok Adalat)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में ओडिशा के कंधमाल जिले में एक दैनिक मजदूर ने लोक अदालत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है। वह अपने फिंगरप्रिंट को तकनीकी खराबी के कारण विभिन्न प्रयासों के बावजूद अपने आधार कार्ड में दर्ज करवाने में विफल रहा है। इस कारण उसने लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

लोक अदालत क्या है?

  • लोक अदालत एक ऐसी अदालत/मंच है जहाँ पर न्यायालयों में विवादों/लंबित मामलो या मुकदमेबाजी से पहले की स्थिति से जुड़े मामलो का समाधान समझौते से और सौहार्दपूर्ण तरीके से किया जाता है। इसमें विवादों के दोनों पक्ष के मध्य उत्त्पन हुए विवाद को बातचीत या मध्यस्ता के माध्यम से उनके आपसी समझौते के आधार पर निपटाया जाता है।
  • लोक अदालत का अर्थ है लोगों का न्यायालय। यह एक ऐसा मंच है जहां विवादों को आपसी सहमति से निपटाया जाता है। यह गांधी जी के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • लोक अदालत विवादों को निपटाने का वैकल्पिक साधन है। लोक अदालत बेंच सभी स्तरों जैसे सर्वाेच्च न्यायालय स्तर, उच्च न्यायालय स्तर, जिला न्यायालय स्तर पर दो पक्षों के मध्य विवाद को आपसी सहमति से निपटानें के लिए गठित की जाती है।
  • लोक अदालत को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत लोक अदालत को वैधानिक दर्जा दिया गया है। जिसके तहत लोक अदालत के अवार्ड (निर्णय) को सिविल न्यायालय का निर्णय माना जाता है, जो कि दोनों पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है। लोक अदालत के अवार्ड (निर्णय) के विरुद्ध किसी भी न्यायलय में अपील नहीं की जा सकती है।

लोक अदालत में किन विवादों को निपटाया जाता है?

  • न्यायालय में लंबित मुकदमां का समझौता-केवल ऐसे आपराधिक मुकदमों को छोड़कर जिनमें समझौता कानूनन संभव नही है, सभी प्रकार के सिविल एवं आपराधिक मुकदमें भी इन लोक अदालतों में आपसी समझौते के द्वारा निपटाये जातें हैं।
  • न्यायालय में मुकदमा जाने से पहले समझौता ख ऐसे विवाद जिन्हें न्यायालय के समक्ष दायर नही किया गया है उनका भी प्री लिटिगेशन स्तर पर यानि मुकदमा दायर किये बिना ही दोनो पक्षों की सहमति से लोक अदालतों में निस्तारण किया जा सकता है।

लोक अदालत की विशेषताएँ

  • इसमें कोई कोर्ट फीस नही होती। यदि न्यायालय में लंबित मुकदमें में कोर्टं फीस जमा भी करवाई गई हो तो लोक अदालत में विवाद का निपटारा हो जाने पर वह फीस वापिस कर दी जाती है।
  • इसमें दोनों पक्षकार जज के साथ स्वयं अथवा अधिवक्ता के द्वारा बात कर सकतें हैं जो कि नियमित कोर्ट में संभव नही होता।
  • लोक अदालत का मुख्य गुण है अनौपचारिकता व त्वरित न्याय।
  • लोक अदालत के द्वारा पास अवार्ड दोनो पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है। इसे डिक्री कहा जाता है और इसके विरूद्ध अपील नही होती।

स्थायी लोक अदालत क्या हैं?

  • स्थायी लोक अदालत का गठन विधिक सेवाएं प्राधिकरण अधि नियमए 1987 की धारा 22-बी की उप धारा (1) के अंतर्गत हुआ है। जनहित सेवाओं से संबंधित विभाग जैसे बिजली, पानी, अस्पताल आदि से संबंधित मामलों को, मुकदमें दायर करने से पहले आपसी सुलह से निपटाने के लिए राज्य प्राधि करण द्वारा स्थायी लोक अदालतों की स्थापना की गई है।
  • कोई भी पक्ष जिसका संबंध इन जनहित सेवाओं से है वह इन विवादों को निपटाने के लिए स्थायी लोक अदालत में आवेदन कर सकता है।