यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: टिड्डी दल का प्रकोप (Locust Outbreak)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): टिड्डी दल का प्रकोप (Locust Outbreak)

टिड्डी दल का प्रकोप (Locust Outbreak)

चर्चा का कारण

  • यमन से लेकर अफ्रीकी और एशियाई देशों में टिड्डी दल (Locust swarms) ने फसलों पर हमला किया है। संयुत्तफ़ राष्ट्र (यूएन) के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने टिड्डी दलों के बिहार, ओडिशा तक पहुंचने की संभावना व्यक्त करने के साथ ही मानसूनी हवाओं के साथ जुलाई में दोबारा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान लौटने की चेतावनी दी है।

प्रमुख दिशा-निर्देश

  • वर्तमान में इथोपिया और सोमालिया जैसे देशों यानी हॉर्न ऑफ अफ्रीका में पिछले 25 सालों में टिड्डी दलों का सबसे भयानक हमला जारी है। भारत में, साधारणतया ये टिड्डी दल जुलाई से अक्टूबर के बीच दिखते हैं, साथ ही अच्छी बारिश और परिस्थितियाँ अनुकूल होने की स्थिति में ये तेजी से प्रजनन करती हैं।

टिड्डी दल

  • दुनियाभर में टिड्डियों की 10 हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन भारत में केवल चार प्रजाति ही मिलती हैं। इसमें रेगिस्तानी टिड्डा, प्रव्राजक टिड्डा, बंबई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा शामिल हैं। इनमें रेगिस्तानी टिड्डों को सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
  • टिड्डियों के भारी संख्या में पनपने का मुख्य कारण वैश्विक तापवृद्धि के चलते मौसम में आ रहा बदलाव है। विशेषज्ञों ने बताया कि एक मादा टिड्डी तीन बार तक अंडे दे सकती है और एक बार में 95-158 अंडे तक दे सकती हैं। टिड्डियों के एक वर्ग मीटर में एक हजार अंडे हो सकते हैं। इनका जीवनकाल तीन से पांच महीनों का होता है। नर टिड्डों का आकार 60-75 एमएम और मादा का 70-90 एमएम तक हो सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार रेगिस्तानी टिड्डों की रफ्रतार 16-19 किलोमीटर प्रति घंटे होती है। हवा की वजह से इनकी रफ्रतार में बढ़ोत्तरी भी हो जाती है। इस तरह ये एक दिन में 200 किमी का सफर तय कर सकती हैं। एक वर्ग किलोमीटर में फैले दल में करीब चार करोड़ टिड्डियाँ होती हैं, जो एक दिन में 35,000 लोगों के पेट भरने लायक भोजन को चट कर जाती है।

जलवायु परिवर्तन और टिड्डियों के बीच संबंध

  • टिड्डियों को लेकर जारी हुई नई रिपोर्टों में कहा गया है कि इनकी तादाद और हमले बढ़ने के पीछे की एक मुख्य वजह बेमौसम बारिश भी होती है। पिछले एक साल के दौरान, भारत और पाकिस्तान समेत पूरे अरब प्रायद्वीप में बेमौसम बारिश होती रही है।
  • इस कारण नमी की वजह से ये तेजी से फैलती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले प्रजजन काल में टिड्डियाँ 20 गुना, दूसरे में 400 और तीसरे में 1,600 गुना तक बढ़ जाती हैं।

टिड्डियों से निपटने के उपाय

  • विशेषज्ञों के अनुसार टिड्डी के हमलों से बचने का सबसे बेहतर तरीका नियंत्रण और निगरानी है। इसके अलावा कीटनाशक का हवाई छिड़काव किया जा सकता है, लेकिन भारत में इस सुविधा का अभाव है। इसी प्रकार टिड्डियों के अंडों को पनपने से पहले नष्ट किया जा सकता है।
  • फसलों पर क्लोरपाइरीफॉ (Chlorpyri Fos) रसायन का छिड़काव किया जाना चाहिये क्योंकि यह विषाक्त रसायन नहीं है। वैज्ञानिकों ने अंडों को नष्ट करने के लिए खेतों में पानी भरकर रखने की सलाह दी है।

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