यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project)

केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश की पहली महत्त्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना (केन-बेतवा लिंक) के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। ज्ञातव्य है की इस परियोजना के लिये दोनों राज्यों ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) के मौके पर केंद्र के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है परियोजना?

  • राष्ट्रीय नदी विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) द्वारा देश में प्रस्तावित 30 नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक केन-बेतवा लिंक परियोजना भी है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 45000 करोड़ है, जिसका 90 फीसद केंद्र सरकार वहन करेगी। इस परियोजना में केन नदी से बेतवा नदी में पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए 77 मीटर लंबा और 2 किमी. चौड़ा दाऊधन डैम बनाया जाएगा एवं 230 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण कार्य शामिल है। एक नहर के जरिए दोनों नदियों को जोड़ा जाएगा।
  • इस परियोजना में मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले हैं तो उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिले शामिल हैं।
  • मध्य प्रदेश में छतरपुर व पन्ना जिलों की सीमा पर केन नदी के मौजूदा गंगऊ बैराज के अपस्ट्रीम में 2.5 किमी की दूरी पर डोढ़न गांव के पास एक 73.2 मीटर ऊंचा ग्रेटर गंगऊ बांध बनाया जाएगा। कंक्रीट की 212 किमी लंबी नहर द्वारा केन नदी का पानी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में बेतवा नदी पर स्थित बरुआ सागर में डाला जाएगा।

परियोजना से लाभ

  • इस परियोजना के अमल में आने से बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे की समस्या से निपटना आसान होगा। किसानों की आत्महत्या पर अंकुश लगेगा,भूजल पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी तथा किसानों की आजीविका सुनिश्चित होगी।
  • इससे जल संरक्षण में तेजी आएगी,103 मेगावाट जल-विद्युत उत्पादन होगा तथा लगभग 62 लाख लोगों को स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
  • विशेषज्ञों के अनुसार पन्ना बाघ अभयारण्य के जल संकट वाले क्षेत्रों में बांधों का निर्माण होने से इस रिजर्व के जंगलों का जीर्णोद्धार होगा जिससे इस क्षेत्र में जैव विविधता भी समृद्ध होगी।
  • केन नदी मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास कैमूर की पहाडि़यों से निकलकर करीब 427 किमी उत्तर की ओर बहते हुए बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना नदी से मिलती है। इसी तरह बेतवा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलकर करीब 576 किमी बहकर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में यमुना से मिलती है। उल्लेखनीय है कि राजघाट, पारीछा और माताटीला बाँध बेतवा नदी पर निर्मित हैं। केन नदी पन्ना बाघ अभयारण्य से होकर गुजरती है।

चुनौतियाँ

  • यह पन्ना बाघ अभयारण्य के बड़े मार्ग को जलमग्न कर देगा। सरकार के अनुमान के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 4,200 हेक्टेयर भूमि बह जाएगी।
  • यह परियोजना जंगल के साथ केन नदी के सहजीवी संबंध को बिगाड़ देगा, क्योंकि केन नदी इस क्षेत्र के जैव विविधता का पोषण करती है, इसके आलवा जंगलों में पेड़ों की जड़ें और पत्तियां पानी रखती हैं और नदी के जलभरों (aquifers) को रिचार्ज करती हैं।
  • एक नदी के पानी को दूसरे में स्थानांतरित करने का विचार विज्ञान द्वारा समर्थित नहीं होना भी एक चुनौती है।
  • वहीं दूसरी ओर योजना में पारिस्थितिक रूप से लागत-लाभ विश्लेषण की जांच नहीं की गई है?
  • यही कारण है कि 2019 में, सर्वोच्च न्यायालय की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की एक रिपोर्ट ने परियोजना की व्यवहार्यता पर सवाल उठाया।

राष्ट्रीय नदी जोड़ों परियोजना (NRLP)

  • यह एक बड़े पैमाने पर प्रस्तावित सिविल इंजीनियरिंग परियोजना है। इसकी शुरूआत वर्ष 2005 में हुई थी। औपचारिक रूप से इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (NPP) के रूप में जाना जाता है।
  • राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (NRLP)- राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (NRLP) कमी का मुख्य उद्देश्य सूखाग्रस्त एवं वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाकर, ऐसे क्षेत्रों में पानी का अधिकाधिक वितरण सुनिश्चित करना है। यह परियोजना का प्रबंधन राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) द्वारा किया जाना है।
  • राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA)- राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की एक एजेंसी है। इसकी स्थापना 17 जुलाई, 1982 को भारत सरकार द्वारा सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत की गई। राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है। इसकी स्थापना विभिन्न प्रायद्वीपीय नदी प्रणालियों और हिमालयी नदी प्रणालियों में पानी की मात्र के बारे में विस्तृत अध्ययन करने के उद्देश्य से की गई थी।