यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: विश्व ऊर्जा निवेश रिपोर्ट, 2021 (IEA World Energy Investment Report 2021)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): विश्व ऊर्जा निवेश रिपोर्ट, 2021 (IEA World Energy Investment Report 2021)

विश्व ऊर्जा निवेश रिपोर्ट, 2021 (IEA World Energy Investment Report 2021)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency- IEA) ने विश्व ऊर्जा निवेश रिपोर्ट (World Energy Investment Report) 2021 प्रकाशित की है।

प्रमुख बिन्दु

  • वैश्विक ऊर्जा निवेश में बढ़ोतरीः इस साल वैश्विक ऊर्जा निवेश में फिर से उछाल आने और इसके सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 1.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने की उम्मीद है।
  • अक्षय ऊर्जाः इस निवेश का अधिकांश हिस्सा पारंपरिक जीवाश्म ईंधन उत्पादन से हटकर बिजली और अंतिम उपयोग क्षेत्रों की ओर प्रवाहित होगा। नई बिजली उत्पादन क्षमता पर होने वाले कुल खर्च ($ 530 मिलियन) का लगभग 70% अक्षय ऊर्जा पर किया जाएगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) द्वारा जारी विश्व ऊर्जा निवेश रिपोर्ट, 2021 के अनुसार, भविष्य के ऊर्जा दृष्टिकोण के रूप में नवीकरणीय का पर्याप्त लाभ होगा क्योंकि यह तकनीकी विकास, अच्छी तरह से स्थापित आपूर्ति श्रृंखला और कार्बन-तटस्थ बिजली के लिए उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर है।
  • जीवाश्म ईंधनः ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में भी निवेश में पर्याप्त वृद्धि (10 प्रतिशत) देखने को मिलेगी, हालांकि जीवाश्म ईंधन की कम कीमत एक निवारक के रूप में कार्य कर सकती है।
  • तेल के उत्पादन और अन्वेषण में 10% निवेश बढ़ने की उम्मीद है। जीवाश्म ईंधन में इस विस्तार की योजना कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (Carbon Capture and Storage- CCS) तथा बायोएनर्जी (Bioenergy CCS) सीसीएस जैसी नई प्रौद्योगिकियों के साथ बनाई गई थी, जिन्हें अभी तक व्यावसायिक सफलता नहीं मिली है।
  • उत्सर्जन में वृद्धिः उपरोक्त सकारात्मक परिदृश्य अभी भी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में वृद्धि को रोक नहीं पाएंगे, वर्ष 2020 में COVID-19 महामारी से प्रेरित आर्थिक मंदी के कारण। के कारण उत्सर्जन में संकुचन तो हुआ किन्तु ऊर्जा एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि इस साल वैश्विक उत्सर्जन में 1.5 अरब टन की वृद्धि होगी।

नेट जीरो एमिशन की प्रगति संतोषजनक नहीं

  • साल 2015 में पेरिस में जलवायु समझौता हुआ था। उसमें 2050 को ध्यान में रखते हुए उत्पादित ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas) उत्सर्जन और वातावरण से निकाले गए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के बीच एक समग्र संतुलन प्राप्त करना है।
  • अब इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को जीवाश्म ईंधनों की वजह से हो रहे कार्बन उत्सर्जन को कम करना होगा और इन ईंधनों का विकल्प भी तलाशना होगा। ये विकल्प ऐसे होंगे जो किसी तरह का प्रदूषण न फैलाएं। किन्तु कई विकासशील देशों की नीति नेट जीरो एमिशन (Net Zero Emission) के लक्ष्यों के अनुरूप नहीं हैं।
  • चीन कोयला आधारित बिजली उत्पादन में जबरदस्त विस्तार दिखा रहा है। दिसंबर 2020 में चीन की कोयले की खपत एक ऐतिहासिक उच्च स्तर पर थी, हालांकि चीन ने अक्षय ऊर्जा के विकास में सराहनीय विकास किया है।

विकसित राष्ट्रों की जिम्मेदारी

  • इस रिपोर्ट के अनुसार उत्सर्जन को रोकने में विकसित राष्ट्रों की जिम्मेदारी-हिस्सेदारी को कम नहीं किया जाना चाहिए। विकसित देशों में उत्सर्जन की वृद्धि मध्यम है, लेकिन उनका निर्यात उत्सर्जन चिंता का विषय है। हाल के विश्लेषण के अनुसार, कोयले के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया का निर्यात उत्सर्जन घरेलू उत्सर्जन से दोगुना है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के नए राष्ट्रपति ने पेरिस समझौते में फिर से शामिल होकर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बहुपक्षीय संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के प्रति नई प्रतिबद्धता दिखाई है। लेकिन सस्ते शेल गैस के प्रति देश का आकर्षण निवेश में गड़बड़ी पैदा कर रहा है और भारत जैसे देशों के विकास पथ की स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के ढांचे में स्थापित एक स्वायत्त अंतर सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1974 में हुई थी और इसका मुख्यालय फ्रांस के पेरिस में स्थित है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना 1973-74 में तेल संकट के कारण हुई थी।
  • यह संगठन मुख्य रूप से ऊर्जा नीतियों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण आदि शामिल हैं।
  • भारत आर्थिक सहयोग और विकास संगठन का सदस्य नहीं है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का भी सदस्य नहीं है। लेकिन, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के तहत उन्नत मोटर ईंधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम के सदस्य के रूप में भारत इससे जुड़ा हुआ है।