यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: कॉयर जियो टेक्सटाइल्स (Geotextiles)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): कॉयर जियो टेक्सटाइल्स (Geotextiles)

कॉयर जियो टेक्सटाइल्स (Geotextiles)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रलय के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास एजेंसी ने कहा है कि पीएमजीएसवाई-3 के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स (choir Jio textiles) का उपयोग किया जाएगा।

कॉयर जियो टेक्सटाइल्स क्या है

  • कॉयर जियो टेक्सटाइल्स एक प्राकृतिक पारगम्य फैब्रिक है, यह मजबूत होने के के साथ साथ अत्यधिक टिकाऊ, टूट-फूट, मोड़ एवं नमी प्रतिरोधी है व किसी भी सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) के हमले से मुक्त है।
  • कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग ढलानों/तटबंधों, नदी तटबंधों, खान के ढेर वाले ढलानों का स्थिरीकरण आदि में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
  • इसके तहत नारियल की भूसी से बने कार्बनिक कपड़ों को सड़कों और लॉन सहित ढालू सतहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि कॉयर फाइबर के आपसी जुड़ाव के कारण यह पानी को अवशोषित कर ले और जरूरत से अधिक पानी को निकाल दे।
  • केन्द्रीय एमएसएमई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रलय कॉयर फाइबर के वैकल्पिक उपयोग का पता लगाने के लिए प्रयासरत था। इस निर्णय से कॉयर उद्योग को विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के इस कठिन समय में बढ़ावा मिलेगा।

प्रमुख बिन्दु

  • सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई की नई प्रौद्योगिकी दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावों के प्रत्येक बैच के सड़कों की कुल लम्बाई के 15 प्रतिशत में नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके निर्माण किया जाना है।
  • इनमें से 5 प्रतिशत सड़कों का निर्माण इंडियन रोड्स कांग्रेस (आईआरसी) मान्यता प्राप्त प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया जाना है। आईआरसी ने अब ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को मान्यता दी है।
  • इन निर्देशों के अनुसार, पीएमजीएसवाई-3 के तहत 5 प्रतिशत ग्रामीण सड़कों का निर्माण कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके किया जाएगा। तदनुसार कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके आंध्र प्रदेश में 164 किलोमीटर, गुजरात में 151 किलोमीटर, केरल में 71 किलोमीटर, महाराष्ट्र में 328 किलोमीटर, ओडिशा में 470 किलोमीटर, तमिलनाडु में 369 किलोमीटर और तेलंगाना में 121 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
  • इस प्रकार 7 राज्यों में कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके 1674 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए एक करोड़ वर्ग मीटर कॉयर जियो-टेक्सटाइल्स की आवश्यकता होगी। इसकी अनुमानित लागत 70 करोड़ रु है।
  • इस निर्णय से देश में कॉयर जियो-टेक्सटाइल के लिए एक बड़ी बाजार की संभावना बनेगी और कोविड-19 से प्रभावित कॉयर उद्योग के लिए यह एक वरदान सिद्ध होगा।

पहली बार कहां बनी कॉयर जियो टेक्साटाइल्स की सड़क

  • इस तकनीकी का प्रयोग सबसे पहले फ्री ट्रायल के रूप में केरल के कोन्नीस स्थित राजीव गांधी इंनडोर स्टेडियम में किया गया था।
  • कर्नाटक, केरल और तमिलनाडू में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण में जियो-टेक्सटाइल का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट किफायती और संतोषजनक आई है। विदेशों में सड़कों को मजबूती प्रदान करने के लिए जियो-टेक्सटाइल का इस्तेमाल बहुतायत में होता है, लेकिन भारत में अभी इसका प्रचलन व्यापक स्तर पर शुरू नहीं हुआ है।

इंडियन रोड्स कांग्रेस

  • इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) देश में राजमार्ग इंजीनियरों की सर्वाेच्च संस्था है।
  • आईआरसी की स्थापना दिसंबर, 1934 में भारतीय सड़क विकास समिति की सिफारिशों पर की गई थी, जिसे सरकार द्वारा स्थापित जयकर समिति के रूप में जाना जाता है।
  • इंडियन रोड्स कांग्रेस का उद्देश्य भारत में सड़क विकास को बढ़ावा देना है।

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