यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: पदार्थ की पांचवीं अवस्था (Fifth State of Matter)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): पदार्थ की पांचवीं अवस्था (Fifth State of Matter)

पदार्थ की पांचवीं अवस्था (Fifth State of Matter)

चर्चा का कारण

  • वैज्ञानिकों को अन्तरिक्ष में पहली बार Fifth state of matter यानी पदार्थ के पांचवें अवस्था, जिसे बोस-आइंस्टाइन क्वांटम भी कहा जाता है, का सबूत मिला है। इस रिसर्च से क्वांटम यूनिवर्स की कुछ अबूझ पहेलियों को सुलझाने में मदद मिल सकती है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन ने पदार्थ की इस अवस्था के बारे में लगभग 100 साल पहले बताया था। इसलिए इसे बोस-आइंस्टाइन कंडेनसेट्स (बीईसी) भी कहते हैं।

नासा ने किया रिसर्च

  • NASA की एक टीम ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से अपने BECs एक्सपेरिमेंट के पहले रिजल्ट पेश किए। ये रिसर्च स्पेस स्टेशन पर इसीलिए की जा रही है क्योंकि यहां पृथ्वी पर आने वाली मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। इस स्टेट को माइक्रोग्रैविटी में स्टडी किया जा रहा है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि इस स्टडी से उन्हें कई तरह की मददगार जानकारियां मिलेंगी। यह रिसर्च जर्नल नेचर में प्रकाशित किया गया है।

कब बनती है पदार्थ की पांचवी अवस्था

  • पदार्थ की यह अवस्था तब बनती है, जब किसी तत्व के परमाणुओं को परम शून्य ताप (जीरो डिग्री केल्विन या माइनस 273.15 डिग्री सेल्सियस) तक ठंडा किया जाता है। इसके चलते उस तत्व के सारे परमाणु मिलकर एक हो जाते हैं यानी सुपर एटम बनता है। इसे ही पदार्थ की पांचवी अवस्था कहते हैं।
  • किसी भी पदार्थ में उसके परमाणु अलग-अलग गति करते हैं, लेकिन पदार्थ की पांचवी अवस्था में एक ही बड़ा परमाणु होता है और इसमें तरंगे उठती हैं।

प्रमुख बिन्दु

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि BECs में अंतरिक्ष की रहस्यमयी डार्क एनर्जी के बारे में कुछ रहस्य छुपे हुए हैं। वैज्ञानिक ब्रह्मांड के त्वरित विस्तार के पीछे पहेली बनी हुई इस डार्क एनर्जी को मानते हैं। उनका मानना है कि BECs से उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकती है।
  • हालांकि, BECs बहुत ही संवेदनशील होते हैं। बाहरी वातावरण के जरा से भी संपर्क से ये अपने कंडेनसेशन यानी संघनन के सीमा से ज्यादा गर्म हो जाती हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों के लिए धरती पर उनका अध्ययन करना लगभग असंभव है, क्योंकि उनके ऑब्जर्वेशन में उन्हें उनके जगह पर स्थिर रखने के लिए मैग्नेटिक फील्ड की जरूरत होती है, लेकिन धरती पर गुरुत्वाकर्षण

पदार्थ की चार अवस्थाएं

  • पदार्थ की चार अवस्थाएं होती हैं। ठोस, द्रव, गैस और प्लाज्मा। प्लाज्मा गैसीय अवस्था ही होती है, लेकिन यह आयनित होती है। तारे प्लाज्मा से ही बने होते हैं। ब्रह्मांड में 96% प्लाज्मा ही है।