यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Earth's Magnetic Field)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Earth's Magnetic Field)

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Earth's Magnetic Field)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर पड़ रहा है। पृथ्वी का यह चुंबकीय क्षेत्र अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका (Africa and South America) के बीच में तेजी से कमजोर पड़ रहा है। इसे दक्षिण अटलांटिक विषमता (South Atlantic Anomaly) कहा जा रहा है।

प्रमुख बिन्दु

  • वैज्ञानिक यूरोपीय स्पेस एजेंसी से हासिल किए गए स्वार्म सैटेलाइट समूह के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं और दक्षिण अंटलाटिक विषमता के कारणों को जानने का प्रयास कर रहे हैं।
  • यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक, यह चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की सतह के नीचे की बाह्य क्रोड़ (outer core) वाली परत में बह रहे गर्म तरल लोहे के कारण बनता है। यह परत हमारी पृथ्वी की सतह के 3 हजार किलोमीटर नीचे है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने इस परत में बहुत स्पष्ट बदलाव देखा। वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले 200 सालों में धरती की चुंबकीय शत्तिफ़ में 9% की कमी आई है।
  • यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक, यह चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की सतह के नीचे की बाह्य क्रोड़ (outer core) वाली परत में बह रहे गर्म तरल लोहे के कारण बनता है। यह परत हमारी पृथ्वी की सतह के 3 हजार किलोमीटर नीचे है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने इस परत में बहुत स्पष्ट बदलाव देखा। वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले 200 सालों में धरती की चुंबकीय शत्तिफ़ में 9% की कमी आई है।
  • इसके पीछे जिस कारण का अनुमान सबसे ज्यादा लगाया जा रहा है वो ये है कि हो सकता है कि पृथ्वी के ध्रुव के व्यापक बदलाव का समय नजदीक आ रहा है।

प्रभाव

  • चुंबकीय क्षेत्र का कमजोर होने से अंतरिक्ष से आने वाले आवेशित कण वहां स्थित हमारे उपग्रहों में घुस कर उनके काम पर असर डाल सकते हैं। उपकरणों को खराब कर सकते हैं। अभी वैज्ञानिक यह बता पाने की स्थिति में तो नहीं हैं कि यह असर कितना व्यापक होगा, लेकिन उनका मानना है कि यह निश्चित है कि सबसे पहले उपग्रहों पर ही असर हो सकता है।
  • यदि चुंबकीय क्षेत्र कमजोर हुआ तो सैटेलाइट पृथ्वी की परिक्रमा नहीं कर पाएंगे। ऐसा अनुमान है कि चंद्रमा की परिक्रमा भी प्रभावित हो सकती है।
  • उल्लेखनीय है कि चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी के बाहर ब्रह्मांड की दूसरी वस्तुओं को पृथ्वी की ओर आकर्षित करता है। शायद इसी चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव के कारण चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। नासा और इसरो जैसे संस्थान जो सेटेलाइट छोड़ते हैं वह इसी चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव के कारण पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।

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