यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: ‘डबल म्यूटेंट’ कोरोना वायरस वेरिएंट ('Double Mutant' Corona Virus Variant)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): ‘डबल म्यूटेंट’ कोरोना वायरस वेरिएंट ('Double Mutant' Corona Virus Variant)

‘डबल म्यूटेंट’ कोरोना वायरस वेरिएंट ('Double Mutant' Corona Virus Variant)

चर्चा का कारण

  • भारत में कोरोनावायरस का एक नया वेरिएंट मिला है जिसे डबल म्युटेंट का नाम दिया जा रहा है। यह महाराष्ट्र और दिल्ली कर्नाटक जैसे राज्यों में पाया जा रहा है, जिसकी वजह से कोरोना के नए मामले और मृत्यु की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है।

प्रमुख बिन्दु

  • देश के 18 राज्यों में कई ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न्स’ (VOCs) पाए गए हैं। इसका अर्थ है कि देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस के अलग-अलग प्रकार पाए गए हैं जो स्वास्थ्य पर हानिकारक असर डाल सकते हैं। इनमें ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील के साथ-साथ भारत में पाया गया नया ‘डबल म्यूटेंट’ वेरिएंट भी शामिल है।
  • भारत में कलेक्ट किए गए सैंपल में कोरोना वायरस का एक नया डबल म्यूटेंट वेरिएंट मिला है। देश के 18 राज्यों के 10,787 सैंपल में कुल 771 वेरिएंट मिले हैं। इनमें 736 यूके, 34 साउथ अफ्रीकन और एक ब्राजीलियन है। जिन राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं, वहां अलग म्यूटेशन प्रोफाइल का पता चला है। देश में पिछले छह-आठ महीने में सबसे ज्यादा फैलने वाले कोविड वेरिएंट में नए वेरिएंट शामिल हैं।
  • कोरोना का डबल म्यूटेंट वेरिएंट करीब 15-20% सैंपल में मिला है। यह पहले से दर्ज किए गए वेरिएंट से मैच नहीं करता। इसे महाराष्ट्र के 206 सैंपल में पाया गया जबकि दिल्ली के नौ सैंपल में नागपुर में करीब 20% सैंपल इसी वेरिएंट के हैं। विशेषज्ञों का हालांकि कहना है कि इस 20% को सभी मामलों से जोड़कर देखना संभव नहीं है।

क्या होता है वेरिएंट?

  • किसी भी वायरस का एक जेनेटिक कोड होता है। यह एक तरह का मैनुअल है, जो वायरस को बताता है कि उसे कब, क्या और कैसे करना है। वायरस के जेनेटिक कोड में लगातार छोटे-छोटे बदलाव होते रहते हैं। अधिकतर बदलाव बेअसर होते हैं मगर कुछ बदलाव की वजह से वायरस तेजी से फैलने लगता है या घातक हो जाता है। इसी बदले हुए वायरस को वेरिएंट कहते हैं।
  • दूसरे शब्दों में कहें तो वायरस जब रिप्रोडड्ढूस करता है तो वह परफेक्ट नहीं होता है और वही म्यूटेशन होता है। और जब उस म्यूटेशन का हम पर असर होता है तो उसे वेरिएंट कहते हैं।
  • वायरस की यह नई किस्म शरीर के इम्यून सिस्टम से बचकर संक्रामकता को बढ़ाता है।

कितने खतरनाक हैं कोरोना के ये वेरिएंट?

  • भारत में जो अबतक कोरोना वायरस के मामले सामने आए थे, वो SARS-CoV-2 वेरिएंट के थे। लेकिन जो दो नए म्यूटेंट वेरिएंट मिले हैं उनका नाम E484Q and L452R है। जो यूके से संबंधित हैं। दिसंबर 2020 के बाद से ही महाराष्ट्र में इससे संबंधित केस बढ़े हैं।
  • इस तरह के म्यूटेंट इम्युन सिस्टम को कमजोर करते हैं और संक्रमण को फैलाते हैं। करीब 20 फीसदी मामलों में ये दो म्यूटेंट ही पाए गए हैं, यही कारण है कि चिंता बढ़ रही है। सरकार ने इन मामलों को काबू में पाने के लिए फिर से टेस्ट-ट्रैक और ट्रीट की नीति अपनाने का निर्देश दिया है।

वेरिएंट ऑफ कंसर्नः

  • वेरिएंट ऑफ कंसर्न ऐसे वेरिएंट हैं जो संक्रामकता में वृद्धि करते हैं। ये वेरिएंट पिछले संक्रमण या टीकाकरण में कम एंटीबॉडी के निर्माण, उपचार या टीके की कम प्रभावशीलता या लक्षणों का सही से पता लगाने की विफलता के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।

जीनोम सीक्वेंसिंग

  • जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है।

भारतीय सार्स सीओवी-2 जीनोमिक कंसोर्टिया (INSACOG)

  • देश में कोरोना वायरस की समूची ‘जीनोम सीक्वेंसिंग’के विस्तार और यह समझने के लिए भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स INSACOG कंसोर्टियम स्थापित किया गया है। INSACOG जीनोम सिक्वेंसिग वायरस के फैलने की जांच कर रहा है।