यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: बासमती के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद (Dispute between India and Pakistan over Basmati Issue)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): बासमती के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद (Dispute between India and Pakistan over Basmati Issue)

बासमती के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद (Dispute between India and Pakistan over Basmati Issue)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ से बासमती चावल के लिए ‘संरक्षित भौगोलिक संकेतक’ (Protected Geographical Indication– PGI) दर्जा हासिल करने के लिए आवेदन किया है। वहीं पाकिस्तान यूरोपीय संघ में भारत के इस आवेदन का विरोध कर रहा है।

प्रमुख बिन्दु

  • भारत के बासमती चावल के जीआई टैग के दावे को पाकिस्तान इस तर्क पर खारिज करता है कि उसके देश में भी बासमती उगाया जाता है।
  • जानकारों का कहना है कि भारत के बासमती को जीआई टैग मिलने का मतलब है कि फिर दुनियाभर में यही माना जाएगा कि असली और सबसे अच्छी गुणवत्ता का बासमती सिर्फ भारत में पैदा होता है। इसका असर पाकिस्तान के बासमती निर्यात पर पड़ेगा।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2015 में भारत ने अपने देश में बासमती चावल का जीआई रजिस्ट्रेशन करा लिया था। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया और वह बगैर जीआई टैग के ही बासमती चावल की बिक्री करता रहा, जिसकी वजह से दूसरे देशों में भारतीय बासमती चावल के मुकाबले पाकिस्तान के बासमती को कारोबार के मोर्चे पर काफी नुकसान उठाना पड़ा।

क्यों जरूरी है जीआई?

  • एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र वाले उत्पाद के लिए जियोग्राफिकल इंडीकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। इसका अर्थ यह कि उत्पत्ति की विशेष भौगोलिक पहचान से जोड़ने के लिए किसी उत्पाद को जीआई टैग दिया जाता है।
  • उत्पाद को दूसरों से अलग और ख़ास बनाए रखने के साथ ही विशिष्ट पहचान कायम रखने के लिए जीआई टैग महत्वपूर्ण है।
  • विदित हो कि मूल क्षेत्र के होने की वजह से ऐसे उत्पादों की विशिष्टता एवं प्रतिष्ठा होती है। जीआई टैग की वजह से किसी ख़ास उत्पाद के साथ गुणवत्ता खुद ही जुड़ जाती है।
  • जीआई टैग वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के ‘अग्रीमेंट ऑन ट्रेड-रिलेटेड आस्पेक्ट्स ऑफ इंट्लेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स’ (TRIPS) के जरिए हासिल किया जाता है। साथ ही, कई देशों में अपनी संस्थाएं भी हैं, जो घरेलू स्तर पर चीजों को जीआई टैग देती हैं। धीरे-धीरे ये व्यवस्था ऐसी बनी कि वैश्विक जीआई टैग हासिल करने के लिए पहले अपने ही देश में उस चीज को जीआई टैग मिलना जरूरी है।

जीआई टैग का उद्देश्य

  • जीआई टैग का मकसद आज भी वही है। चीजों की गुणवत्ता बरकरार रखना। फर्जी दावों से चीजों की बिक्री रोकना, उत्पादकों के हितों और ग्राहकों को मिलने वाली गुणवत्ता की रक्षा करना।

बासमती का इतिहास

  • जब भारत राइसटेक कंपनी के खिलाफ अमेरिका में कानूनी लड़ाई लड़ रहा था, तब अपने दावे के पक्ष में भारत ने 50 हजार पन्नों के दस्तावेज पेश किए थे। इन पन्नों में एक जिक्र ये भी था कि बासमती भारत में सोहनी-महिवाल के वक्त से उगाया जा रहा है। सोहनी-महिवाल सिंध-पंजाब प्रांत की एक दुखद प्रेम कहानी है, जिसका जिक्र 18वीं सदी से मिलता है।
  • भाषाविद् बताते हैं कि बासमती शब्द संस्कृति के वस (Vas) और मायप (mayup) शब्दों से मिलकर बना है। वस का अर्थ सुगंध और मायप का अर्थ है ‘गहरे तक जमा हुआ’। बताते हैं कि ये ‘मायप’ बाद में ‘मती’ हो गया, जिससे चावल को ‘बासमती’ नाम मिला। ‘मती’ का एक अर्थ ‘रानी’ भी बताया जाता है, जिससे बासमती का अर्थ बनता है ‘सुगंध की रानी’। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में दर्ज 'Basmati' हिंदी के बासमती से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ सुगंध होता है।

भारत-पाकिस्तान के लिए अहम क्यों है बासमती?

  • दुनिया में जितना चावल पैदा होता है, उसका 90 फीसदी उत्पादन और खपत एशिया में होती है। चावल की पैदावार में भारत दुनिया में दूसरे और निर्यात करने में पहले नंबर पर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक से भारत दुनिया में सबसे ज्यादा चावल निर्यात कर रहा है। भारत दुनिया का करीब 65 फीसदी बासमती निर्यात करता है, जबकि बचे हुए मार्केट पर पाकिस्तान का कब्जा है।
  • बासमती दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में बेहद अहम योगदान अदा करता है। चूंकि इस मार्केट में भारत-पाकिस्तान के अलावा कोई और खिलाड़ी है नहीं, इसलिए दोनों देशों के बीच बाजार में बड़े कब्जे की होड़ भी है। जीआई टैग का संघर्ष इसी होड़ का नतीजा है।