यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में विकास परियोजना (Development Project in Andaman and Nicobar Islands)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में विकास परियोजना (Development Project in Andaman and Nicobar Islands)

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में विकास परियोजना (Development Project in Andaman and Nicobar Islands)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप के लिये नीति आयोग की विकासात्मक परियोजना हेतु पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की मंजूरी दी गई है।

मुख्य बिन्दु

  • हाल ही में भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की पर्यावरण मूल्यांकन समिति (Environment Appraisal Committee- EAC) ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप हेतु नीति आयोग की विकासात्मक परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की मंजूरी दे दी है।
  • हालांकि पूर्व में पर्यावरण मूल्यांकन समिति (EAC) ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में नीति आयोग की विकासात्मक परियोजना के संबंध में चिंता व्यक्त की थी। लेकिन समिति ने अब इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की मंजूरी दी है।

नीति आयोग की विकासात्मक परियोजना

  • नीति आयोग ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के विभिन्न द्वीपों व क्षेत्रों (यथा- ग्रेट निकोबार द्वीप, लिटिल अंडमान द्वीप आदि) के लिए विकासात्मक परियोजना का माडल बनाया है। दरअसल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त, 2020 में घोषणा की थी कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ‘मेरीटाइम एंड स्टार्टअप हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उसके बाद से नीति आयोग ने इस केंद्र शासित प्रदेश के लिए विकासात्मक परियोजना का माडल बनाया था। इसके लिए नीति आयोग ने विजन डॉक्यूमेंट भी पेश किया है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में नीति आयोग की विकासात्मक परियोजना के तहत निम्नलिखित सुविधाएं विकसित की जाएंगी, यथा-
  • अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांस-शिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, बिजली संयंत्र, टाउनशिप कॉम्प्लेक्स, कन्वेंशन सेंटर, अस्पताल, विशेष वन रिसॉर्ट।
  • गौरतलब है कि नीति आयोग ने अपने विजन डॉक्यूमेंट में लिटिल अंडमान द्वीप के लिए एक मेगासिटी प्लान (megacity plan) का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है। यह मेगासिटी लिटिल अंडमान द्वीप के 680 वर्ग किमी क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसके तहत एक नई ग्रीनफील्ड तटीय शहर (New Greenfield Coastal City) बनाकर तैयार की जाएगी, जिसे एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Zone) के रूप में विकसित किया जाएगा। यह मुक्त व्यापार क्षेत्र सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। इसमें अंडरवाटर रिजॉर्ट्स, कसीनो, गोल्फ कोर्स, कन्वेंशन सेंटर,अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अस्पताल, विशेष वन रिसॉर्ट इत्यादि का भी विकास किया जाएगा।

नीति आयोग की विकासात्मक परियोजना से संबन्धित मुद्दे

  • नीति आयोग की अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लिए इस विकासात्मक परियोजना की पर्यावरणविदों द्वारा आलोचना की जा रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के विभिन्न क्षेत्रों को काफी क्षति होगी और यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जाएगा। कुछ पर्यावरणविदों ने निम्नलिखित तीन आधारों पर इस विकासात्मक परियोजना के बारे में गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं-
  • पारिस्थितिकी संवेदनशीलता (Ecological Fragility)
  • स्थानीय अधिकार (Indigenous Rights)
  • भूकंप और सुनामी के प्रति सुभेद्यता (Vulnerability to Earthquakes and Tsunamis)

नीति आयोग का तर्क

  • नीति आयोग का कहना है कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लिए विकासात्मक परियोजना से इस पूरे क्षेत्र का विकास सुनिश्चित होगा।
  • इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व में और इजाफा होगा।
  • इस विकासात्मक परियोजना से स्थायी और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बारे में

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी में स्थित भारत का एक संघ राज्य क्षेत्र है, जिसमें छोटे-बड़े लगभग 576 द्वीप शामिल हैं।
  • इन द्वीपों को दो प्रमुख द्वीपसमूहों में बाँटा गया है - उत्तर में अंडमान द्वीप समूह और दक्षिण में निकोबार द्वीप समूह।
  • अंडमान द्वीप समूह और निकोबार द्वीप समूह 100 चैनल द्वारा एक-दूसरे से अलग होते हैं।
  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पूर्व में स्थित अंडमान सागर इसे थाईलैंड और म्यांमार देशों से अलग करता है। भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी ‘बैरन द्वीप’ यहीं स्थित है।
  • अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर या चट्टानी प्रवाल की 555 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो पर्यावरणीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।
  • इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक मुख्य भूमि से अलगाव के कारण ये द्वीप कई प्रजातियों के उद्भव के लिए हॉटस्पॉट बने, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों स्थानिक प्रजातियाँ और उप प्रजातियाँ यहाँ विकसित हुई हैं।