यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: G4 सुरक्षा परिषद में समयबद्ध सुधार कि मांग (Demand for time bound reform in G4 Security Council)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): G4 सुरक्षा परिषद में समयबद्ध सुधार कि मांग (Demand for time bound reform in G4 Security Council)

G4 सुरक्षा परिषद में समयबद्ध सुधार कि मांग (Demand for time bound reform in G4 Security Council)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में G-4 समूह (भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी) के विदेश मंत्रियों ने एक आभासी बैठक (virtual meeting) में भाग लिया। जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लंबित सुधारों के लिए ‘निर्णायक कदम’ उठाए जाने की मांग की गयी।

पृष्ठभूमि

  • जी 4 उन देशों का एक समूह है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे हैं। ये चार देश संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से परिषद के चुने हुए गैर-स्थायी सदस्यों के रूप में कार्यरत है।
  • इन देशों का कहना है कि उनका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव पिछले दशकों में काफी बढ़ा है, जो स्थायी सदस्यों (पी 5) के बराबर है, अतः उन्हें स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।
  • इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र महासभा के होने वाले 75 वें सत्र के दौरान चार देशों ने लिखित रूप में और एक समय सीमा के भीतर ठोस परिणाम देने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र अपनी 75 वीं वर्षगांठ 24 अक्टूबर 2020 को मनाएगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव की जरूरत क्यों?

  • सुरक्षा परिषद 1945 की राजनीति के हिसाब से बनाई गई थी। मौजूदा भू-राजनीति द्वितीय विश्व युद्ध से काफी अलग है।
  • शीतयुद्ध के बाद से ही इसमें सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। इसमें कई तरह के सुधार की जरूरत है जिनमें बनावट और प्रक्रिया सबसे अहम है।
  • परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्राँस, रूस और चीन को 7 दशक पहले केवल एक युद्ध जीतने के आधार पर किसी भी परिषद के प्रस्ताव या निर्णय पर वीटो का विशेषाधि कार प्राप्त है।
  • अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका का कोई भी देश सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है। जबकि संयुक्त राष्ट्र का 50 प्रतिशत से अधिक कार्य अकेले अफ्रीकी देशों से संबंधित है।
  • पीस कीपिंग अभियानों (peacekeeping operations) में अहम भूमिका निभाने के बावजूद मौजूदा सदस्यों द्वारा उन देशों के पक्ष को नजरंदाज कर दिया जाता है। जिसका भुग्तभोगी-भारत है।
  • संयुक्त राष्ट्रसंघ के ढांचे में सुधार की एक और जरूरत इसलिए भी है क्यूंकि यहां अमेरिका का वर्चस्व है। सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति है। अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के बल पर संयुक्त राष्ट्रसंघ के या किसी दूसरे भी अंतराष्ट्रीय संगठनों की अनदेखी करता रहा है।
  • वीटो के चलते कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला नहीं हो पता

UNSC में सुधार की अड़चनें

  • UNSC के P-5 सदस्यों की संयुक्त राष्ट्र सुधारों के बारे में अलग-अलग राय है। अलग अलग राय होना UNSC के सुधार को और जटिल बना देता है।
  • अमेरिका जहां बहुपक्षवाद के खिलाफ है। तो वहीं रूस भी किसी तरह के सुधार के पक्ष में नहीं है।
  • सुरक्षा परिषद् में एशिया का एकमात्र प्रतिनिधि होने की मंशा रखने वाला चीन भी संयुक्त राष्ट्र में किसी तरह का सुधार नहीं चाहता।
  • इसके अलावा सुरक्षा परिषद के दो अन्य सदस्य ब्रिटेन और फ्रांस ब्रेग्जिट के चलते उलझे हुए हैं जिसका असर UNSC पर भी पड़ा है।
  • साथ ही ये सभी देश एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और यूरोपीय संघ में उभरते नई वैश्विक ताकतों से चिंतित हैं।

UNSC सुधारों के लिए भारत का आह्वान

  • संयुक्त राष्ट्र, विशेष रूप से इसके प्रमुख अंग, सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करने में भारत सबसे आगे रहा है। भारत, जनवरी 2021 में यूएनएससी पर दो साल का गैर-स्थायी कार्यकाल शुरू करेगा।
  • भारत की दावेदारी इस लिए जरूरी है कि क्यूंकि भारत तेजी से अंतराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है। भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की लगभग सभी पहलों में शामिल रहा है।