यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: जम्मू-कश्मीर में परिसीमन (Delimitation in Jammu and Kashmir)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): जम्मू और कश्मीर में परिसीमन (Delimitation in Jammu and Kashmir)

जम्मू और कश्मीर में परिसीमन (Delimitation in Jammu and Kashmir)

चर्चा में क्यों?

  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 (JKRA) के तहत विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के भाषण में साफ कर दिया था कि जम्मू-कश्मीर में पहले परिसीमन होगा, फिर चुनाव। इस प्रकार जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए परिसीमन महत्वपूर्ण है।

आवश्यकता क्यों?

  • 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हुआ, तब इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया। चूंकि, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा प्रस्तावित है, इस वजह से नए केंद्रशासित प्रदेश में परिसीमन जरूरी हो गया था।
  • इसी वजह से सरकार ने मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में परिसीमन आयोग बनाया। देसाई के अलावा चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त के के शर्मा इस परिसीमन आयोग के सदस्य हैं।

परिसीमन होता क्या है?

  • परिसीमन यानी सीमा का निर्धारण। संविधान के अनुच्छेद 82 में स्पष्ट कहा गया है कि प्रत्येक 10 साल में जनगणना के बाद सरकार परिसीमन आयोग बना सकती है। यह आयोग ही आबादी के हिसाब से लोकसभा और विधानसभा के लिए सीटें बढ़ा-घटा सकता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य आबादी के हिसाब से विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों को बराबरी से बांटना है ताकि पूरे देश में एक वोट की एक ही कीमत रहे। इसका उद्देश्य सीमाओं (पिछली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर) को इस तरह से फिर से बनाना है ताकि सभी सीटों की आबादी, जहां तक संभव हो व पूरे राज्य में समान हो।
  • एक निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को बदलने के अलावा, इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप राज्य में सीटों की संख्या में भी परिवर्तन हो सकता है।

परिसीमन से जम्मू-कश्मीर में क्या बदल जाएगा?

  • परिसीमन से जम्मू-कश्मीर में में 7 सीटें बढ़ने वाली हैं। इस समय राज्य में 107 सीटें हैं, जिनमें 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हैं। वहीं, चार सीटें लद्दाख में थीं, जिसके अलग होने से जम्मू-कश्मीर में इफेक्टिव स्ट्रेंथ 83 सीटों की हो जाएगी। पर, JKRA के तहत नए जम्मू-कश्मीर में 90 सीटें होंगी। यानी पहले से सात अधिक। PoK की 24 सीटें मिला दें तो सीटों की संख्या बढ़कर 114 हो जाएंगी।

जम्मू-कश्मीर के परिसीमन की खास बातें

  • जम्मू-कश्मीर में इससे पहले 1963, 1973 और 1995 में परिसीमन हुआ था। राज्य में 1991 में जनगणना नहीं हुई थी। इस वजह से 1996 के चुनावों के लिए 1981 की जनगणना को आधार बनाकर सीटों का निर्धारण हुआ था।
  • जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के तहत जम्मू-कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट (JKRA) के प्रावधानों का भी ध्यान रखना होगा। इसे अगस्त 2019 में संसद ने पारित किया था। इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें बढ़ाने की बात भी कही गई है।
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 में साफ तौर पर कहा गया है कि केंद्रशासित प्रदेश में परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा।

परिसीमन आयोग

  • संविधान के तहत केंद्र सरकार परिसीमन आयोग बनाता है। पहली बार परिसीमन आयोग 1952 में बना था। इसके बाद 1963, 1973, 2002 और 2020 में भी आयोग बनाए गए हैं।
  • परिसीमन आयोग द्वारा किए गए कार्यों व निर्णयों को किसी भी अदालत के समक्ष सवाल नहीं उठाया जा सकता है।
  • परिसीमन अधिनियम के लागू होने के बाद राष्ट्रपति द्वारा परिसीमन आयोग की नियुत्तिफ़ की जाती है और यह संस्था/निकाय निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर काम करती है।
  • परिसीमन आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश द्वारा की जाती है। इसके अतिरित्तफ़ इस आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा नामित कोई निर्वाचन आयुक्त तथा संबंधित राज्यों के निर्वाचन आयुक्त शामिल होते हैं।