यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: चीन का मंगल मिशन तियानवेन -1 (China's Mars Mission Tianwen-1)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): चीन का मंगल मिशन तियानवेन -1 (China's Mars Mission Tianwen-1)

चीन का मंगल मिशन तियानवेन -1 (China's Mars Mission Tianwen-1)

चर्चा में क्यों

  • गौरतलब है कि चीन जुलाई, 2020 में अपना पहला मार्स मिशन तियानवेन-1 लॉन्च करने वाला है।
  • मिशन की सफलता के पश्चात् चीन यूएसएसआर और संयुत्तफ़ राज्य अमेरिका के बाद लैंडिंग करने वाला तीसरा देश बन जायेगा।
  • चीन का पिछला, यिंगहुओ-1 मंगल मिशन, जिसे एक रूसी अंतरिक्ष यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया था, 2012 में प्रशांत महासागर में गिरने के बाद विफल हो गया था।

तियानवेन-1

  • तियानवेन-1, 13 पेलोड (सात कक्षा और छह रोवर) ले जाएगा। यह मंगल की सतह पर पानी, बर्फ, मिट्टीकी विशेषताओं की जाँच करने और अन्य उद्देश्यों को पूरा करने के साथ वहाँ के वातावरण का भी अध्ययन करेगा।
  • इसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर है।
  • चीनी मिशन, मंगल ग्रह की सतह पर एक भू-मर्मज्ञ (जिओ-पेनेट्रेटिंग) रडार स्थापित करेगा, जो भूवैज्ञानिक शोध करने में सक्षम होगा।

पूर्व में हुए अन्य मंगल मिशन

  • 1971 में USSR मंगल पर लैंडिंग करने वाला पहला देश बना था हालाँकि इसका ‘मार्स 3’ लैंडर, विफल हो गया विफल होने से पहले मंगल ग्रह की सतह से 20 सेकंड के लिए डेटा संचारित करने में सक्षम रहा। दुबारा सोवियत संघ ने 1973 में दुसरे मिशन के तहत मंगल पर लैंडिंग कराई।
  • मंगल की सतह पर पहुंचने वाला दूसरा देश, अमेरिका है। 1976 के बाद से, इसने 8 सफल मार्स लैंडिंग की जिसमें नवीनतम 2019 में ‘इनसाइट’ मार्स मिशन है।
  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, भी मंगल की कक्षा में अपने अंतरिक्ष यान को रखने में सक्षम हो गए हैं।

भारत का मंगल मिशन

  • भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) या मंगलयान सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में पहुंच गया था, इसे नवंबर 2013 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा आंध्र प्रदेश में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था।
  • भारत अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ के बाद मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला चौथा राष्ट्र बन गया है और उसने पहले प्रयास में ही ऐसा किया।
  • यह नासा के मावेन ऑर्बिटर की तुलना में सस्ता होने के कारण, सबसे अधिक लागत वाला प्रभावी मिशन था।
  • MOM द्वारा भेजी गई हजारों तस्वीरों का उपयोग करते हुए, यह एक Martian Atlas बनाने की तैयारी है।
  • मार्स ऑर्बिटर मिशन-2 (एमओएम 2) जिसे मंगलयान-2 भी कहा जाता है, भारत का दूसरा इंटरप्लेनेटरी मिशन है, जिसे मंगल ग्रह के प्रक्षेपण के लिए योजनाबद्ध किया गया है।

मंगल मिशन का महत्व

  • चंद्रमा के बाद, सौर मंडल में सबसे अधिक अंतरिक्ष मिशन मंगल ग्रह पर हुए हैं। हालांकि मंगल पृथ्वी से कई मायनों में अलग है, लेकिन इसमें कई विशेषताएं पृथ्वी जैसी भी हैं जैसे कि बादलों, ध्रुवीय बर्फ की चादरें, घाटी, ज्वालामुखी और मौसमी पैटर्न।
  • पिछले कुछ वर्षों में, मंगल मिशनों ने ग्रह पर तरल पानी की संभावित उपस्थिति की खोज करने में सफलता पाई है। पानी की संभावित उपस्थिति ने अंतरिक्ष खोजकर्ताओं को इस बारे में अधिक उत्सुक बना दिया है कि क्या मंगल ग्रह जीवन को बनाए रख सकता है।

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