यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: चीन का कृत्रिम सूर्य (China’s Artificial Sun)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): चीन का कृत्रिम सूर्य (China’s Artificial Sun)

चीन का कृत्रिम सूर्य (China’s Artificial Sun)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में चीन के ‘प्रायोगिक उन्नत सुपरकंडक्टिंग टोकामक’ (Experimental Advanced Superconducting Tokamak - EAST) ने 20 सेकंड के लिए 288 मिलियन डिग्री फारेनहाइट का उच्चतम तापमान हासिल किया, जो सूर्य के तापमान से दस गुना अधिक है। चीनी वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि प्रायोगिक उन्नत सुपरकंडक्टिंग टोकामक से चीन को एक असीमित हरित ऊर्जा का स्रोत मिल जाएगा।

प्रायोगिक उन्नत सुपरकंडक्टिंग टोकामक

  • प्रायोगिक उन्नत सुपरकंडक्टिंग टोकामक (ईएएसटी) रिएक्टर चीन के हेफेई में चीनी विज्ञान अकादमी (एएसआईपीपी) के प्लाज्मा भौतिकी संस्थान में स्थित एक उन्नत परमाणु संलयन प्रयोगात्मक अनुसंधान उपकरण है।
  • चीन ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2006 में की थी। चीन ने कृत्रिम सूरज को एचएल-2एम (HL-2M) नाम दिया है, इसे चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के साथ साउथवेस्टर्न इंस्टीटड्ढूट ऑफ फिजिक्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है।
  • EAST परियोजना अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर (ITER) का हिस्सा है, जो 2035 में चालू होने पर दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संलयन रिएक्टर बन जाएगा। इस परियोजना में भारत, दक्षिण कोरिया, जापान, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों का योगदान शामिल है।

उद्देश्य

  • इस कृत्रिम सूर्य का उद्देश्य परमाणु संलयन की प्रक्रिया को दोहराना है, यह वही प्रतिक्रिया है जो सूर्य को शत्तिफ़ प्रदान करती है। इससे ईंधन के लिए चीन की दूसरे देशों पर निर्भरता और प्रदूषण के स्तर में भी काफी कमी आने की उम्मीद है।

विशेषताएँ

  • चीन के आर्टिफिशियल सूरज में लगे न्यूक्लियर फ्यूजन (Nuclear Fusion) रिएक्टर ने 100 सेकेंड तक 12 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा किया है। यह तापमान सूरज के तापमान से 10 गुने से भी काफी ज्यादा है।
  • यह मशीन चीन की सबसे बड़ी और सबसे आधुनिक एटमिक फ्यूजन एक्सपेरिमेंटर रिसर्च डिवाइस गर्म प्लाज्मा को संलयन के स्तर तक पहुंचाने के लिए एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है।
  • इस डिवाइस को कभी भी खत्म न होने वाली स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सूरज और तारों के अंदर अपनेआप पैदा होने वाले परमाणु संलयन प्रक्रिया को दोहराने के लिए डिजाइन किया गया है। इसी कारण यह डिवाइस 12 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक का तापमान पैदा करने में सक्षम हो पाई है।

फ्यूजन रिएक्शन

  • न्यूक्लियर फ्यूजन से ही सूरज को ऊर्जा मिलती है। इसकी वजह से ऐसा प्लाज्मा पैदा होता है जिसमें हाइड्रोजन के आइसोटोप्स (डड्ढूटीरियम और ट्राइटियम) आपस में फ्रयूज होकर हीलियम और न्यूट्रॉन बनाते हैं। शुरुआत में रिएक्शन से गर्मी पैदा हो, इसके लिए ऊर्जा की खपत होती है लेकिन एक बार रिएक्शन शुरू हो जाता है तो फिर रिएक्शन की वजह से ऊर्जा पैदा भी होने लगती है।
  • ITER पहला ऐसा रिएक्टर है जिसका उद्देश्य है कि न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्शन के शुरू होने में जितनी ऊर्जा इस्तेमाल हो, उससे ज्यादा ऊर्जा रिएक्शन की वजह से बाद में उत्पाद के तौर पर निकले।
  • परमाणु हथियारों और न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में फ्यूजन की जगह फिजन (fission reaction) होता है। फ्यूजन रिएक्शन में किसी ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन नहीं होता है और इसमें किसी ऐक्सिडेंट की संभावना या अटॉमिक मटीरियल की चोरी का खतरा नहीं होता है।
  • बड़े स्तर पर अगर कार्बन-फ्री स्रोत के तौर पर यह एक्सपेरिमेंट सफल हुआ तो भविष्य में क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में दुनिया को अभूतपूर्व फायदा हो सकता है।

वैश्विक स्थिति

  • चीन एक मात्र ऐसा देश नहीं है जहां ऐसी परियोजना चल रही है बल्कि फ्रांस में भी दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु संलयन अनुसंधान परियोजना चल रही है, जिसकी 2025 में पूरा होने की उम्मीद है।
  • वहीं दक्षिण कोरिया का अपना कृत्रिम सूर्य, कोरिया सुपरकंडक्टिंग टोकामक एडवांस्ड रिसर्च (केएसटीएआर) भी है, जो 20 सेकंड के लिए 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान स्थिर रखने में सफल हुआ है।