यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: भारत में असाफोटिडा (हींग) की खेती (Asafoetida Cultivation in India)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): भारत में असाफोटिडा (हींग) की खेती (Asafoetida Cultivation in India)

भारत में असाफोटिडा (हींग) की खेती (Asafoetida Cultivation in India)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में सीएसआईआर-आईएचबीटी ने पहली बार भारतीय हिमालयी क्षेत्र में असाफोटिडा (हींग) की खेती शुरू करके इतिहास रचा है।

क्या है असाफोटिडा (हींग)?

  • हींग भारत में उच्च मूल्य की एक मसाला फसल के साथ भारतीय रसोई का एक प्रमुख मसाला भी है।
  • इसे फेरुला अस्सा-फोटिडा नाम के पौधों से प्राप्त किया जाता है।
  • हींग के पौधे के वृद्धि के लिए ठंडी और शुष्क परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं।
  • दुनिया में फेरुला की लगभग 130 प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन असाफोटिडा (हींग) के उत्पादन के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजाति फेरुला अस्सा-फेटिडिस का ही उपयोग किया जाता है।
  • भारत में फेरुला अस्सा-फोटिडा नहीं है, लेकिन इसकी अन्य प्रजातियां फेरुला जेस्सेकेना पश्चिमी हिमालय (चंबा, हिमाचल प्रदेश) में और फेरुला नार्थेक्स कश्मीर एवं लद्दाख में पायी जाती हैं, जोकि असाफोटिडा (हींग) पैदा करने वाली प्रजातियां नहीं हैं।
  • भारत में फेरुला अस्सा-फोटिडा नाम के पौधों की रोपण सामग्री का अभाव इस फसल की खेती में एक बड़ी अड़चन थी।
  • उल्लेखनीय है कि भारत अफगानिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान से सालाना लगभग 1200 टन कच्ची हींग आयात करता है और इसके लिए प्रति वर्ष लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करता है।

हींग की खेती में सीएसआईआर-आईएचबीटी के प्रयास

  • भारत में असाफोटिडा (हींग) की खेती की शुरुआत करने के उद्देश्य से, सीएसआईआर-आईएचबीटी के दल ने अक्टूबर, 2018 में आईसीएआर- नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (आईसीएआर-एनबीपीजीआर), नई दिल्ली के माध्यम से ईरान से लाये गये बीजों के छह गुच्छों का इस्तेमाल शुरू किया।
  • 15 अक्टूबर, 2020 को सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ-संजय कुमार द्वारा लाहौल घाटी के क्वारिंग नाम के गांव में एक किसान के खेत में असाफोटिडा (हींग) के पहले पौधे की रोपाई की गई।
  • आईसीएआर-एनबीपीजीआर ने इस बात की पुष्टि की कि पिछले तीस वर्षों में देश में असाफोटिडा (फेरुला अस्सा-फोटिडा) के बीजों के इस्तेमाल का यह पहला प्रयास था।
  • आईसीएआर-आईएचबीटी ने एनबीपीजीआर की निगरानी में हिमाचल प्रदेश स्थित सीईएचएबी, रिबलिंग, लाहौल और स्पीति में हींग के पौधे उगाए।
  • जैसा कि उपर्युक्त में वर्णित है कि हींग के पौधे के वृद्धि के लिए ठंडी और शुष्क परिस्थितियाँ अनुकूल हैं और इसकी जड़ों में ओलियो-गम नाम के राल के पैदा होने में लगभग पांच साल लगते हैं। यही वजह है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र के ठंडे रेगिस्तानी इलाके असाफोटिडा (हींग) की खेती के लिए उपयुक्त हैं।

सीएसआईआर-आईएचबीटी

  • सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी) हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थित है।
  • यह धौलाधार पर्वतमाला में स्थित हिमाचल प्रदेश में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की एकमात्र राष्ट्रीय प्रयोगशाला है।
  • इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य शोध द्वारा स्थायी तरीको या सतत उपायों से जैव संसाधनों के उपयोग से जैव-आर्थिकी को बढ़ावा देना है।