यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: आर्मीनिया-अजरबैजान विवाद (Armenia-Azerbaijan Dispute)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): आर्मीनिया-अजरबैजान विवाद (Armenia-Azerbaijan Dispute)

आर्मीनिया-अजरबैजान विवाद (Armenia-Azerbaijan Dispute)

चर्चा का कारण

  • आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच विवादित नागोर्नाे- काराबाख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र को लेकर युद्ध की शुरुआत हो गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी हिंसक युद्ध को तत्काल प्रभाव से रोकने और बिना किसी पूर्व शर्त के दोबारा वार्ता शुरू करने को कहा है।
  • नागोर्नाे-काराबाख इलाके से गैस और कच्चे तेल की पाइपलाइनें गुजरती है इस कारण इस इलाके के स्थायित्व को लेकर जानकार चिंता जता रहे हैं।

नागोर्नाे-काराबाख की पहाड़ी

  • दक्षिणपूर्वी यूरोप में पड़ने वाली कॉकेशस के इलाके की पहाडि़यां रणनीतिक तौर पर बेहद अहम मानी जाती हैं।
  • 1920 के दशक में जब सोवियत संघ बना तो आर्मीनिया और अजरबैजान उसका हिस्सा बन गए। ये सोवियत गणतंत्र कहलाते थे। नागोर्नाे-काराबाख की अधिकतर आबादी आर्मीनियाई है लेकिन सोवियत अधिकारियों ने उसे अजरबैजान के हाथों सौंप दिया। इसके बाद दशकों तक नागोर्नाे-काराबाख के लोगों ने कई बार ये इलाका आर्मीनिया को सौंपने की अपील की। लेकिन असल विवाद 1980 के दशक में शुरू हुआ जब सोवियत संघ का विघटन शुरू हुआ और नागोर्नाे-काराबाख की संसद ने आधिकारिक तौर पर खुद को आर्मीनिया का हिस्सा बनाने के लिए वोट किया।
  • वैश्विक कानूनों के तहत इस 4,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अजरबैजान का बताया जा चुका है, लेकिन यहां आर्मेनियाई मूल (ईसाई) की आबादी अधिक है।
  • मई 1994 में दोनों देशों के बीच संघर्ष को बढ़ते देख रूस ने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध विराम की मध्यस्थता की, किंतु समय-समय पर संघर्ष विराम उल्लंघन और हिंसा के उदाहरण देखने को मिलते हैं। गौरतलब है कि आर्मीनिया के साथ तुर्की के कोई आधिकारिक संबंध नहीं हैं- 1993 में जब आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच सीमा विवाद बढ़ा तो अजरबैजान का समर्थन करते हुए तुर्की ने आर्मीनिया के साथ सटी अपनी सीमा बंद कर दी।

नागोर्नाे-काराबाख रणनीतिक महत्व

  • ऊर्जा संपन्न अजरबैजान ने काकेशस (काला सागर और कैस्पियन सागर के बीच का क्षेत्र) से तुर्की और यूरोप तक कई गैस और तेल पाइपलाइनों का निर्माण किया है।
  • इसमें बाकू-तबलिसी-सेहान तेल पाइपलाइन (एक दिन में 1.2 बिलियन बरै ल परिवहन की क्षमता के साथ), पश्चिमी मार्ग निर्यात तेल पाइपलाइन, ट्रांस-अनातोलियन गैस पाइपलाइन और दक्षिण काकेशस गैस पाइपलाइन शामिल हैं।
  • इनमें से कुछ पाइपलाइनें संघर्ष क्षेत्र (सीमा के 16 किमी के भीतर) के करीब से गुजरती हैं। दोनों देशों के बीच एक खुले युद्ध में, पाइपलाइनों को लक्षित किया जा सकता है, जो ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करेगा।

रूस एवं तुर्की की प्रतिक्रिया

  • अजरबैजान और आर्मेनिया के युद्ध में रूस के शामिल होने की संभावना अब बढ़ने लगी है- क्योंकि आर्मेनिया के साथ रूस का रक्षा समझौता है। ऐसे में अगर आर्मेनिया की बात होगी तो रूस का होना भी अनिवार्य है।
  • 28 सितंबर को, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दाेगन ने अर्मेनिया को हालिया संघर्ष के लिए दोषी ठहराया और अजरबैजान को समर्थन की पेशकश की है। मीडिया रेपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की, काकेशस में अजरबैजान का साथ देने के लिए पश्चिम एशिया के भाड़े के सैनिकों की भर्ती कर रहा है।
  • रूस अजरबैजान और आर्मेनिया दोनों के साथ अच्छे संबंध रखता है और दोनों को हथियारों की आपूर्ति करता है। लेकिन अर्मेनिया ऊर्जा संपन्न, महत्वाकांक्षी अजरबैजान की तुलना में रूस पर अधिक निर्भर है। रूस का आर्मेनिया में भी सैन्य अड्डा है। लेकिन मास्को, कम से कम सार्वजनिक रूप से, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

अन्य देशों की प्रतिक्रिया

  • अ मरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंसा रोकने के लिए अपील की है। फ्रांस ने भी दोनों देशों से तुरंत लड़ाई बंद कर बातचीत का रास्ता तलाशने की अपील की है। फ्रांस में बड़ी संख्या में आर्मीनियाई लोग रहते हैं।
  • ईरान विवाद में फंसे दोनों देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है। उसने कहा है कि दोनों देश बातचीत की मेज पर आएं तो वो मध्यस्थता करने के लिए तैयार है।