यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (विषय: दल बदल विरोधी अधिनियम एवं न्यायिक समीक्षा (Anti-defection Act. and Judicial Review)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): दल बदल विरोधी अधिनियम एवं न्यायिक समीक्षा (Anti-defection Act. and Judicial Review)

दल बदल विरोधी अधिनियम एवं न्यायिक समीक्षा (Speaker's Decision and Judicial Review)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष सीपी जोशी द्वारा कांग्रेसी नेता सचिन पायलट और 18 अन्य असंतुष्ट विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता नोटिस जारी किया था। इस अयोग्यता नोटिस को विधायकों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, किन्तु राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्पीकर के नोटिस पर फिलहाल रोक लगाते हुए यथा स्थिति को बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं।
  • इन असंतुष्ट विधायकों का तर्क है कि विधानसभा के बाहर कुछ नेताओं के निर्णयों और नीतियाें से असहमत होने के आधार पर उन्हें संसदीय ‘दलबदल विरोधी कानून’ के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

मामला क्या था?

  • राजस्थान सरकार में उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के कुछ बागी विधायक हाल ही में कांग्रेस विधायक दल की बैठकों में बार-बार निमंत्रण देने के बावजूद शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद राज्य में पार्टी के मुख्य सचेतक की अपील पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इन विधायकों को अयोग्यता संबंधी नोटिस जारी किया गया था।

असंतुष्ट विधायकों का पक्ष

  • बागी (REBEL) विधायकों ने अपनी रिट याचिका में नोटिस को रद्द करने की मांग करते हुए तर्क दिया है कि उनके द्वारा सदन की सदस्यता का त्याग नहीं किया गया है, इसलिए ‘दल बदल विरोधी कानून’ का उन पर प्रयोग नहीं किया जा सकता, और न ही बैठकों में शामिल न होने में विफल रहने के आधार पर उन्हें दल बदल विरोधी कानून के तहत उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।
  • बागी विधायकों के द्वारा रिट याचिका राजस्थान विधानसभा सदस्यों की वैधता (पार्टी बदलने के आधार पर अयोग्यता) नियम’, 1989 और संविधान की दसवीं अनुसूची के क्लॉज 2(1)(।) को चुनौती देने के लिये दायर की गई है, जो कहता है कि स्वेच्छा से एक राजनीतिक पार्टी की सदस्यता का त्याग करने पर सदस्य दल बदल कानून के तहत अयोग्यता के लिये उत्तरदायी होगा।

विधानसभा अध्यक्ष का पक्ष

  • जब तक विधानमंडल के सभापति द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत सदस्यों को अयोग्यता पर अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता तब तक न्यायपालिका अयोग्यता कार्यवाही की न्यायिक समीक्षा नहीं कर सकती है।

किहोतो होलोहन बनाम जाचिल्हू

  • इस वाद में न्यायालय ने कहा कि सभापति द्वारा दल बदल विरोधी कानून के तहत अंतिम निर्णय लेने से पहले की गई कार्यवाही की बीच में न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है । हालांकि इसी वाद में न्यायपालिका ने निर्णय दिया था कि दल बदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिये गए निर्णय में त्रुटियों की जाँच का न्यायिक पुनरावलोकन किया जा सकता है।
  • अंतर्वर्ती अयोग्यता’ (Interlocutory Disqualifications) या निलंबन ऐसे मामले हैं जिनके गंभीर, तत्काल और अपरिवर्तनीय नतीजे और परिणाम हो सकते हैं, इसलिए इन पर न्यायालय बीच में दखल दे सकता है ।
  • न्यायपालिका केवल संवैधानिक जनादेश के उल्लंघन पर आधारित दुर्भावना, प्राकृतिक न्याय के नियमों का पालन नहीं करने और दुराग्रह के मामलों में ही न्यायिक समीक्षा करेगा।

दल बदल विरोधी कानून

  • दसवीं अनुसूची को 1985 में 52 वें संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में डाला गया था। दल बदल के आधार पर अयोग्यता के रूप में प्रश्न पर निर्णय ऐसे सदन के अध्यक्ष या अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। ये कानून संसद और राज्य विध शनसभाओं दोनों पर लागू होता है।
  • यदि किसी राजनीतिक दल से संबंधित सदन का सदस्य स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है, या अपने राजनीतिक दल के निर्देशों के विपरीत, वोट नहीं देता है या विधायिका में वोट नहीं करता है। यदि सदस्य ने पूर्व अनुमति ले ली है, या इस तरह के मतदान या परहेज से 15 दिनों के भीतर पार्टी द्वारा निंदा की जाती है, तो सदस्य को अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा।