यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: आर्कटिक क्षेत्र में सैन्यीकरण के खिलाफ अमेरिका (America Against Militarization in the Arctic Region)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): आर्कटिक क्षेत्र में सैन्यीकरण के खिलाफ अमेरिका (America Against Militarization in the Arctic Region)

आर्कटिक क्षेत्र में सैन्यीकरण के खिलाफ अमेरिका (America Against Militarization in the Arctic Region)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में सैन्यीकरण से बचना चाहता है, हालांकि रूस ने आइसलैंड की राजधानी रेकजाविक में फ्आर्कटिक काउंसिलय् की मंत्रिस्तरीय बैठक में इस रणनीतिक क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों का बचाव किया है।

प्रमुख बिन्दु

  • राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल के वर्षों में रूस के आर्कटिक क्षेत्र को एक रणनीतिक प्राथमिकता बना दिया है और सैन्य बुनियादी ढांचे और खनिज निष्कर्षण में निवेश का आदेश दिया है, जिससे आर्कटिक परिषद के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ गया है।
  • अगर आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में वृद्धि होती है तो संभव है कि यह क्षेत्र अशांत हो सकता है जिससे इस क्षेत्र में शांतिपूर्ण और स्थाई भविष्य के साझा लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।

आर्कटिक क्षेत्र

  • आर्कटिक क्षेत्र, जो उत्‍तरी ध्रुव के चारों ओर एक विशाल क्षेत्र है तथा इस धरती के लगभग 1/6 भाग पर फैला है (तकरीबन रूस, चीन और भारत के आकार को एक साथ मिलाकर)।

आर्कटिक परिषद के बारे में

  • आर्कटिक परिषद एक उच्च-स्तरीय अंतर-सरकारी फोरम है जो आर्कटिक सरकारों और आर्कटिक के स्वदेशी लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दों को संबोधित करता हैं।
  • आर्कटिक परिषद आर्कटिक देशों, आर्कटिक के स्थानीय समुदायों तथा अन्य आर्कटिक वासियों के साथ साझा आर्कटिक मुद्दों पर सहयोग एवं समन्वय को बढ़ावा देता है।
  • आर्कटिक परिषद की स्थापना साल 1996 में ओटावा घोषणापत्र के द्वारा हुई है।
  • आर्कटिक परिषद विशेष रूप से सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर आर्कटिक देशों, क्षेत्र के स्वदेशी समुदायों और अन्य निवासियों के बीच सहयोग, समन्वय और बातचीत को बढ़ावा देती है।

आर्कटिक परिषद के सदस्य देश

  • कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और अमेरिका, आर्कटिक परिषद के सदस्य हैं।
  • पर्यवेक्षक सदस्यः जर्मनी, अंतर्राष्ट्रीय आर्कटिक विज्ञान समिति, नीदरलैंड, पोलैंड, उत्तरी मंच, यूनाइटेड किंगडम, भारत चीन इटली, जापान दक्षिण कोरिया और सिंगापूर।
  • गैर सरकारी सदस्यः यूएनडीपी, आईयूसीएन, रेडक्रॉस, नार्डिक परिषद्, यूएनईसी।

संरचना

  • सचिवालय और मंत्रिस्तरीय बैठक आर्कटिक परिषद के मुख्य अंग हैं। सचिवालय का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है तथा इसकी अध्यक्षता और स्थान प्रत्येक दो वर्षों पर सदस्यों के मध्य आवर्तित होते हैं। मंत्रिस्तरीय बैठकों के निर्णय सर्वसम्मति से लिये जाते हैं। यह बैठक प्रत्येक दो वर्ष के अंतराल पर आयोजित की जाती है।

गतिविधियां

  • आर्कटिक क्षेत्र में पर्यावरण की रक्षा करने के लिये एक आकटिक पर्यावरणीय संरक्षण रणनीति (एईपीएस) को अपनाया गया। इसके अतिरित्तफ़ पांच और कार्यक्रम विकसित किये गये, जो इस प्रकार हैं-आर्कटिक विश्लेषण और आकलन योजना (एएमएपी)_ आर्कटिक सामुद्रिक पर्यावरण संरक्षण (पीएएमई)_ आपातकाल, निवारण तैयारी और प्रतिक्रिया (ईपीपीआर)_ आर्कटिक जीव, जंतु और पादप संरक्षण (सीएएफएफ), तथा_ सतत विकास एवं उपयोग (एसडीयू)।
  • आर्कटिक परिषद आर्कटिक क्षेत्र को हमारे भूमंडल के लिये एक शीघ्र पर्यावरणीय चेतावनी प्रणाली के रूप में परिभाषित करती है और यह आशा रखती है कि संपूर्ण विश्व इस बात का अनुभव करेगा कि सांस्कृतिक और पर्यावरणीय अधोगति का एकमात्र निदान पर्यावरण के मुद्दे पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है।

आर्कटिक क्षेत्र में चुनौतियाँ

  • जलवायु परिवर्तन तथा इसकी वजह से आर्कटिक आइस कैप का तेजी से पिघलना सबसे महत्‍वपूर्ण घटना है जो आर्कटिक पर वैश्विक संदर्श को फिर से परिभाषित कर रही है। वर्तमान वैज्ञानिक अभिमत से पता चलता है कि 2030 के दशक तक आर्कटिक क्षेत्र में गर्मी के महीने लगभग आइस फ्री हो सकते हैं जिससे न केवल पार्श्विक राज्‍यों के लिए अपितु समूचे अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के लिए भी प्रचुर अवसरों के साथ-साथ चुनौतियों के द्वार खुलेंगे।
  • यद्यपि आर्कटिक आयल एवं गैस भंडारों, समुद्री सजीव संसाधनों जिनका दोहन नहीं किया गया है तथा प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरों को जोड़ने वाले छोटे पोत परिवहन मार्ग आदि के आकर्षण से इन्‍कार नहीं किया जा सकता है, फिर भी देशज समुदायों, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तथा वैश्विक तापन में वृद्धि पर पिघलते आर्कटिक आइस कैप के प्रतिकूल प्रभावों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।