यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (विषय: अल-अमल (Al Amal : UAE Mars Mission)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): अल-अमल (Al Amal : UAE Mars Mission)

अल-अमल (Al Amal : UAE Mars Mission)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में संयुत्तफ़ अरब अमीरात ने मंगल ग्रह के लिए जापान के तानेगाशिमा अंतरिक्ष केन्द्र से अपना अंतरिक्षयान सफलता पूर्वक प्रक्षेपित कर नया इतिहास रचा है।
  • होप प्रोब नामक इस मिशन को एच-टू-ए नाम के प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2021 UAE के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2021 में UAE अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरा करेगा यह इस संदर्भ में और महत्वपूर्ण हो जाता है कि होप प्रोब भी फरवरी 2021 तक मंगल पर पहुँच सकता है।
  • इस मिशन को संयुक्त अरब अमीरात की अंतरिक्ष एजेंसी मोहम्मद बिन राशिद स्पेस सेंटर द्वारा निष्पादित किया जा रहा है। इसका अरबी नाम AI-Amal तथा अंग्रेजी नाम Hope रखा गया है।

होप प्रोब

  • यह मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद एक मंगलवर्ष यानी 687 दिनों तक उसकी कक्षा में चक्कर लगायेगा।
  • इसमें लगा हाई रिजोल्यूशन कैमरा कई एंगल से किसी क्षेत्र की तस्वीर खींचकर भेजने में सफल होगा। इसमें लगा अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोमीटर मंगल के पर्यावरण संबंधी डाटा/डेटा को संकलित करेगा।
  • इसमें इंन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर लगाया गया है जो मंगल के वातावरण के तापमान तथा जल एवं बर्फ के संभावित उपस्थिति का पता लगायेगा।
  • इस स्पेसक्रॉफ्रट में 900 वॉट के सोलर पैनल लगाये गये हैं जो ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
  • इसमें लगा 1.5 मीटर का एंटिना पृथ्वी से कम्यूनिकेशन स्थापित करने में सहायक होगा।

उद्देश्य

  • अभी इस मिशन का उद्देश्य मंगल के पर्यावरण और मौसम का अध्ययन करना है लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा लक्ष्य अगले 100 सालों में मंगल पर इंसानी बस्ती बनाने का भी है।
  • इस स्पेसक्रॉफ्रट के माध्यम से मंगल के वायुमंडल में मिथेन, ऑक्सीजन आदि गैसों की उपस्थिति का अध्ययन किया जायेगा।
  • उम्मीद की जा रही है कि सितंबर 2021 तक मंगल से डेटा पृथ्वी तक आने लगेगा, जिसे विश्व समुदाय के लिए खुला रखा जायेगा।
  • सूखे नदी तल और खनिजों से मिलते-जुलते साक्ष्य इंगित करते हैं कि प्राचीनतम मंगल वातावरण बहुत गर्म था।
  • इसलिए, वैज्ञानिक मंगल पर मौजूद पिछले वातावरण का अध्ययन करना चाहते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि समय के साथ किसी ग्रह की वासशीलता कैसे बदल सकती है।

मंगल का क्षयकारी वातावरण

  • वर्ष 2017 में, नासा के Maven अंतरिक्ष यान ने खुलासा किया कि सौर हवा और विकिरण ने मंगल के वातावरण को नष्ट कर दिया था, जो अरबों साल पहले जीवन की उत्पत्ति कर सकता था।
  • इस विनाश ने मंगल के वातावरण को बहुत ठंडा और दुर्बल बना दिया, मंगल की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी का लगभग 0.6 प्रतिशत (101,000 पास्कल) है।
  • मंगल के वातावरण में सूर्य के विकिरण या धूल भरी आंधियों से कोई सुरक्षा नहीं है। इसलिए किसी भी मानव ने अभी तक मंगल पर पैर नहीं रखा है।
  • इसके अलवा इसके दुर्बल वातावरण में ज्यादातर कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 96 प्रतिशत) है, साथ ही आर्गन और नाइट्रोजन जैसी अन्य गैसें मामूली मात्र में हैं।
  • यहाँ ऑक्सीजन नहीं है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यहां जीवित रहना मुश्किल है।