यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: भारत के एस्ट्रोसैट की उपलब्धि (Achievement of India's ASTROSAT Telescope)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): भारत के एस्ट्रोसैट की उपलब्धि (Achievement of India's ASTROSAT Telescope)

भारत के एस्ट्रोसैट की उपलब्धि (Achievement of India's ASTROSAT Telescope)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में पुणे स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) ने एस्ट्रोसैट (AstroSat) नामक बहुतरंगीय उपग्रह (Multi Wavelength Satellite) की मदद से एक आकाशगंगा से निकलने वाली तीव्र पराबैंगनी (यूवी) किरण का पता लगाया है। यह आकाशगंगा पृथ्वी से 9.3 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।
  • इस खोज के लिए लगी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम की अगुआई भारत कर रहा था। इस टीम में भारत के अलावा अमेरिका, फ्रांस, नीदरलैंड, स्विट्जरलैण्ड और जापान के वैज्ञानिक शामिल थे।

प्रमुख बिन्दु

  • शारत का पहला बहु तरंगदैघ्‍र्य उपग्रह, एस्ट्रोसैट में पाँच अद्वितीय एक्स-किरण तथा पराबैंगनी दूरबीन अनुबद्ध रूप से कार्यरत हैं तथा उसने पृथ्वी से 9.3 अरब प्रकाश वर्षों की दूरी पर स्थित एयूडीएफएस 01 (AUDFs01) नामक आकाशगंगा से अति तीव्र पराबैंगनी किरण का संसूचन किया है।
  • वैज्ञानिकों की टीम ने एस्ट्रोसैट से तीव्र गहन क्षेत्र (Extreme Deep Field) में स्थित गैलेक्सी का अवलोकन किया। ये अवलोकन अक्टूबर 2016 में 28 घटों से कुछ ज्यादा समय के लिए किए गए थे, लेकिन इन आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन करने में लगभग दो साल का समय लग गया।
  • इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि ये पराबैंगनी विकिरण पृथ्वी पर आने से पहले ही ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, इसीलिए इस शोध के लिए अंतरिक्ष में स्थित टेलीस्कोप की मदद लेनी पड़ी।
  • इससे पहले नासा का हबल स्पेस टेलीस्कोप (HST) भी इन पराबैंगनी विकरण को पकड़ नहीं पाया था, जो कि एक अल्ट्रावायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) से भी बड़ा टेलीस्कोप है। इस पराबैंगनी किरणों का ऊर्जा उत्सर्जन अधिक था। इसकी ऊर्जा 13.6 eV से भी ज्यादा थी, लेकिन दूरी की वजह से यह एक बहुत ही धुंधली दिखाई दी।
  • एस्ट्रोसैट या UVIT इन विकरणों को पकड़ने में सफल हो सका क्योंकि UVIT डिटेक्टर की पृष्ठभूमि की आवाज हबल टेलीस्कोप की पृष्ठभूमि की आवाज से काफी कम थी।

वैज्ञानिकों के अनुसार महत्वपूर्ण है यह शोध

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ छोटी आकाश गंगाएं मिल्की वे आकाशगंगा की तुलना में 10-100 गुणा अधिक गति से नए तारों का निर्माण करती हैं। गौरतलब है कि ब्रह्मांड की अरबों आकाशगंगाओं में बड़ी संख्या में ऐसी छोटी आकाशगंगाएं हैं जिनका द्रव्यमान मिल्की वे आकाशगंगाओं की तुलना 100 गुणा कम है।
  • दो भारतीय दूरबीनों के जरिए वैज्ञानिकों ने अपने अध्‍ययन में पाया कि इन आकाशगंगाओं के इस विचित्र व्‍यवहार की वजह उनमें अव्यवस्थित हाइड्रोजन का वितरण और आकाशगंगाओं के बीच की टक्कर है।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि हाइड्रोजन किसी भी तारे के निर्माण के लिए जरूरी तत्व है। बड़ी संख्‍या में तारों के निर्माण के लिए आकाशगंगाओं में हाइड्रोजन के उच्च घनत्व की जररूत होती है।

एस्‍ट्रोसैट क्या है?

  • एस्‍ट्रोसैट भारत की बहु तरंगदैध्‍र्य दूरबीन (India's multiwavelangth space telescope) है। यह वैज्ञानिक उपग्रह मिशन ब्रह्मांड को अधिक विस्तृत रूप में समझने का प्रयास करता है। इसे 2015 में इसरो द्वारा लॉन्च किया गया था।