यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - IV (सामान्य अध्ययन-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा- प्रबंधन) - 23, मई 2020


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-4: सामान्य अध्ययन-3: (प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा- प्रबंधन)

प्रश्न - कोविड-19 महामारी का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए टेलीमेडिसिन किस प्रकार से सहायक हो सकता है? टेली मेडिसिन के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा - निर्देश का उल्लेख कीजिए साथ ही इसकी सीमाओं पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों है?
  • परिचय
  • टेलीमेडिसीन कोविड-19 महामारी से प्रभावी रूप से लड़ने के लिए किस प्रकार सहायक है?
  • टेलीमेडिसीन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई गाइड लाइन
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और नीति आयोग ने टेलीमेडिसीन के माध्यम से मरीजों को परामर्श देने के लिए चिकित्सकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

परिचय

  • टेलीमेडिसीन को स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी के रूप में परिभाषित किया जाता है इसमें बीमारी रोकथाम चोटों के उपचार के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा सूचना का प्रयोग किया जाता है, इसमें दूरी एक महत्वपूर्ण कारक होता है।
  • यह स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यक डिलीवरी है जहाँ दूरी एक महत्वपूर्ण कारक है।
  • भारत में चिकित्सकों तथा चिकित्सा स्टॉफ की संख्या मरीजों की तुलना में बहुत कम है इस प्रकार की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्ति के लिए टेलीमेडिसीन एक आवश्यक घटक है।

टेलीमेडिसीन कोविड-19 से लड़ने के लिए किस प्रकार से प्रभावी है-

  • यह लोगों (मरीजों) चिकित्सकों और स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच के अंतर को कम करने में सहायक हो सकता है। विशेषकर रोगियों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • इसमें लोग वर्चुअल चैनल के माध्यम से चिकित्सकों से संवाद कर सकते हैं। इस प्रकार यह बड़े पैमाने पर आबादी में वायरस के प्रसार को कम करने में सहायक हो सकता है।
  • यह दीर्घकालीन बीमारी के रोगियों के लिए नियमित देखभाल प्रदान करने में मदद कर सकता है इस प्रकार यह लोगों को वायरस से दूर करने में सहायक हो सकता है और ऐसे लोगों की देखभाल भी कर सकता है।
  • टेलीमेडिसीन उन मेडिकल कर्मचारियों की भी मदद करेगा जो इस समय महामारी से लड़ रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई गाइडलाइन

वर्तमान में, भारत में इस प्रकार की गाइडलाइन का अभाव है। ये दिशा-निर्देश नीति आयोग द्वारा तैयार किए गये हैं।

  • इस गाइडलाइन के अनुसार, केवल पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर राज्य में पंजीकृत नेशनल रजिस्टर ऑन द इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 के अंतर्गत टेलीमेडिसीन का अभ्यास कर सकते हैं। सभी मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को टेलीमेडिसीन परामर्श प्रदान करने के लिए तीन वर्ष के भीतर एक ऑनलाइन कोर्स पूरा करना आवश्यक होगा।
  • टेलीमेडिसीन परामर्श अज्ञातकृत (Anonymous) नहीं होना चाहिए।
  • यह रोगियों और चिकित्सकों को एक प्लेटफार्म पर लाने के लिए स्थापित किया गया एक महत्वपूर्ण तंत्र है।
  • चिकित्सक को रोगी के स्वास्थ्य संबंधी पर्चा बनाते समय रोगी की आयु को जानने का अधिकार होगा।
  • इन दिशा-निर्देशों में टेलीमेडिसीन के कई पहलुओं की जानकारी भी दी गई है जिसमें निदान और उपचार के लिए कौन से प्लेटफार्म का उपयोग किया जाये, और किस प्रकार से प्रौद्योगिकी, मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए एकीकृत सेवाओं का प्रयोग किया जाये, जैसी जानकारियाँ भी दी गई है।

सीमायें

भारत के अस्पताल में इसके लिए आवश्यक प्रबंधन तंत्र उपलब्ध नहीं है जिसके कारण उच्च स्वास्थ्य जोखिम वाले रोगियों के लिए, टेलीमेडिसीन नैदानिक पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं हो सकता है।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति में टेलीमेडिसीन का पारंपरिक रूप से उपयोग नहीं किया गया है कई प्रकार की स्वास्थ्य चिकित्सा में इस प्रकार से इलाज संभव नहीं है।
  • ब्राडबैण्ड तक पहुँच सुनिश्चित करना एक प्रमुख मुद्दा है। कई अस्पतालों में ब्राडबैंड की सुविधाओं का अभाव है।

निष्कर्ष

वर्षो से, टेलीमेडिसीन की लागत को कम करके, देखभाल के लिए पहुँच को आसान बनाने, नियुक्तियों को और अधिक कुशल बनाने तथा दवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। कोरोना वायरस महामारी के कारण एक बार फिर टेलीमेडिसीन की चर्चा होने लगी है।

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