यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - III (सामान्य अध्ययन-2: शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध) - 22, मई 2020


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-3: सामान्य अध्ययन-2: (शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न - राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों है?
  • परिचय
  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में विभिन्न जिला प्रशासनों द्वारा स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हमले में सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के अंतर्गत कार्यवाही करने का निर्णय लिया है।

परिचय

वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी सरकार के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम बनाया गया। यह अधिनियम केंद्र तथा राज्य सरकारों को किसी भी व्यक्ति को देश के कल्याण और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी प्रकार से कार्य करने से रोकने के लिए एक व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है। ऐसे व्यक्ति या तो विदेशी देशों के साथ भारतीय संबंधों को हानि पहुँचा सकता है या समुदाय को आवश्यक सेवाओं के रखरखाव और आपूर्ति में बाधा डाल सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, के प्रावधान

  • यदि कोई व्यक्ति भारत के नियमों और कानूनों का उल्लंघन करता है या अन्य देशों के साथ मिलकर भारत को क्षति पहुँचाता है, या ड्यूटी कर रहे पुलिस कर्मचारियों को क्षति पहुँचाता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है उसे इस अधिनियम के अंतर्गत गिरफ्तार किया जा सकता है।
  • इसमें संबंधित अधिकारी के पास किसी भी कारण को बताए बिना संदिग्ध को 5 दिनों तक कैद में रखने की शक्ति होती है।
  • विशेष परिस्थितियों में यह स्थिति 10-12 दिनों की भी हो सकती है।
  • गिरफ्तार व्यक्ति किसी भी संदर्भ में किसी भी कानूनी व्यवसायी की सहायता प्राप्त नहीं कर सकता है।
  • यह कानून केंद्र सरकार को किसी विदेशी व्यक्ति को उसकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए गिरफ्तार करने या निष्कासित करने का अधिकार देता है।
  • इसमें निरोध की अधिकतम अवधि 12 महीने है।
  • साथ ही जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त द्वारा अपने संबंधित क्षेत्रधिकार के तहत निरोध का आदेश भी दिया जा सकता है।

अधिनियम की आलोचना

  • अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के दुरूपयोग के कारण इसकी आलोचना की जाती है।
  • कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि, सरकारों द्वारा कभी-कभी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का एक अतिरिक्त-न्यायिक शक्ति के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • शांतिकाल में भी विभिन्न सरकारों द्वारा इस अधिनियम का प्रयोग किया जाता रहा है।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो देश में अपराध के आंकड़ों को एकत्र करता है परंतु इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित होने वाले मामलों को सम्मिलित नहीं किया जाता है। क्योंकि इसमें एफ़आईआर दर्ज नहीं की जाती है इसी कारण इसके स्पष्ट आंकड़ें उपलब्ध नहीं होते हैं।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का निर्माण हुए 40 वर्ष हो चुके हैं। इस अधिनियम में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसका उपयोग मनमाने ढंग से नहीं किया जायेगा। अधिनियम के विपरीत उपयोग से लोकतंत्र और व्यक्ति के मूल अधिकारों का हनन होता है।

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