यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - III (सामान्य अध्ययन-2: शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध) - 21, अक्टूबर 2019


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-3: सामान्य अध्ययन-2: (शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न - भारत के पड़ोसी-प्रथम नीति के आलोक में बांग्लादेश के महत्वों पर चर्चा कीजिए। (200 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों है ?
  • भारत के लिए बांग्लादेश का महत्व
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने चार दिवसीय दौरे पर भारत आयीं इस अवसर पर भारत और बांग्लादेश के बीच सात नए करार हुए हैं।

भारत के लिए बांग्लादेश का महत्व

विभिन्न उतार-चढ़ाव भरे संबंधों के बावजूद अनेक कारणों से बांग्लादेश अपने निर्माण के समय से लेकर अब तक भारत के लिए प्रासंगिक रहा है, जिसको निम्न शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है-

  • भौगोलिक कारकः बांग्लादेश का भूगोल बांग्लादेश के भू-राजनीतिक (जियो-पॉलिटिकल) महत्व को बढ़ाता है। भारत के लिए अगर पाकिस्तान मध्य एशिया में जाने का प्रवेश द्वार है तो बांग्लादेश पूर्वी एशिया जाने का द्वार। यही नहीं भारत के उतर पूर्वी राज्यों की सीमा चीन से लगती है। ऐसे में भारत के लिए बांग्लादेश का सामरिक महत्तव भी बढ़ जाता है।
  • आर्थिक कारकः अर्थतंत्र ने भारत औश्र बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के बहुआयामी व्यापार, लेन-देन, क्रेडिट व्यवस्था, संयुक्त उद्यम, पारगमन सुविधाओं और परिवहन विकास रिका को अपनाया गया है। यहाँ तक कि प्रतिकूल राजनीतिक स्थितियों के दौरान भी, दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को बिना किसी बाधा के जारी रखा और प्रसारित किया है।
  • गौरतलब है कि आज बांग्लादेश भारत के निर्यात के लिए सबबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बांग्लादेश में भारत का कुल निर्यात 8 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • उतर-पूर्व राज्यों के विकास में: भारत के उतर पूर्वी राज्यों के विकास में बांग्लादेश की अब महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है। यह इलाका भौगोलिक रूप से बांग्लादेश के काफी नजदीक है। किसी जमाने में बांग्लादेश इनके लिए समस्या था, क्योंकि उतर पूर्वी राज्यों में गरीबी और बेरोजगारी के कारण बांग्लादेशी घुसपैठ करते थे लेकिन अब स्थिति बदल गयी है।
  • बांग्लादेश पिछले बीस सालों में आर्थिक ताकत बन गया है। अब उतर पूर्वी राज्यों को बांग्लादेशी निवेश की जरूरत है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि त्रिपुरा ने बांग्लादेशी उद्यमियों को त्रिपुरा में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।
  • निवेश में संभावनाएँ: आज बांग्लादेश में बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में निवेश की भारी संभावनाएं हैं। कई एशियाई देशों के निवेश का बड़ा केंद्र इस समय बांग्लादेश बन गया है।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक कारकः तमाम विवादों के बावजूद दोनों देशों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्ध मजबूत हैं। दरअसल पश्चिम बंगाल की भाषा, संस्कृति, वेशभूषा, रीति रिवाज बांग्लादेश से मिलती जुलती हैं। नतीजतन सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आयी है और दोनों देशों के बीच पीपल टू पीपल संबंध बढ़ा है।
  • शांति एवं विकासः बांग्लादेश, भूटान, भारत व नेपाल मोटर वाहन समझौते (BBIN-MV) में जहा बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण पक्ष है वहीं वह सार्क (SAARC) बिम्सटेक (BIMSTEC) जैसे क्षेत्रीय सहयोग समझौतों में प्रमुख भागीदार है। अतः इस प्रकार क्षेत्रीय शांति एवं विकास को बढ़ावा देने में यह अहम सहयोगी है। इसके साथ ही बांग्लादेश दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव एवं कट्टरपंथी शक्तियों का मुकाबला करने में भी भारत का सहयोग कर रहा है। 

निष्कर्ष

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है। दोनों देश विश्व पटल पर आर्थिक मोर्चे पर साथ खेड़े दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में भारत बांग्लादेश के ‘सदाबहार मित्र’ के रूप में उभरा है क्योंकि भारत का क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव बढ़ रहा है, जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।

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