यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - III (सामान्य अध्ययन-2: शासन व्यवस्था, संविधान शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध) - 20, जून 2020


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • पेपर III: सामान्य अध्ययन II: (शासन व्यवस्था, संविधान शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न - नये सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने में भारत कितना सक्षम है? चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों है?
  • परिचय
  • नये सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए भारत की तैयारी
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में चीन के वुहान शहर में कोरोनावायरस-2019 nov cov का प्रकोप देखा गया है जो धीरे-धीरे विश्व के अन्य क्षेत्रों में भी फैल रहा है। यह प्रकोप हमें वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और आने वाली चुनौतियों पर विचार करने को मजबूर करता है।

परिचय -

आज विश्व में देश एक-दूसरे से अर्न्तसम्बन्धित हो गये है जिसके परिणामस्वरूप किसी एक देश में पाये जाने वाले संक्रमण का किसी भी अन्य देश तक विस्तार हो सकता है। इससे संक्रमण से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या में द्रुतगति से वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार के संक्रमण न सिर्फ किसी देश की स्वास्थ्य आपदा को बढ़ाते हैं बल्कि अन्तराष्ट्रीय व्यापार तथा यातायात को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। वर्तमान में उभरती हुई नई स्वास्थ्य समस्याएं न सिर्फ भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।

संक्रामक रोग किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहते हैं, पिछले दो दशकों में स्वाइन फ्लू, इबोला, सार्स तथा निपाह आदि स्वास्थ्य समस्याओं ने विश्व के अनेक देशों को अपनी चपेट में लिया है।

नये सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करने के लिए भारत कितना तैयार है?

  • अभी तक राष्ट्रों के द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति से निपटने के लिए कोई भी ठोस कार्यवाही किये जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।
  • ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी इंडेक्स 2019 के आकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत सहित विश्व के अधिकांश राष्ट्र संक्रामक रोगों से निपटने में पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं।
  • भारत स्वास्थ्य अवसंरचनाओं पर अत्याधिक भार के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने को पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है।
  • भारत में शहरी जनसंख्या में तीव्र दर से वृद्धि हो रही है। जिससे शहरों में संक्रामक रोगों के महामारी के रूप फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। शहरों के चारों ओर मलिन बस्तियों का विस्तार इस प्रकार की समस्या को बढ़ा सकता है।
  • बेहतर स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य आधार होता है। परन्तु वर्तमान में बुनियादी स्वास्थ् संबंधी अवसंरचनाओं की स्थिति निराशाजनक है।
  • हालांकि भारत में H1N1 वायरस का पता चलने के पश्चात् प्रयोगशाला स्तर पर काफी सुधार हुआ है।
  • भारत में जीवन प्रत्याशा की स्थिति भी बेहतर हुई है। शिशु तथा मातृ मृत्यु दर में लगातार भारत की स्थिति में सुधार हो रहा है।
  • सरकार द्वारा स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं/कार्यक्रमों ने भी लोगों को जागरूक किया है।
  • स्वच्छ भारत अभियान, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से लोगों में जागरूकता आई है।

भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए संबंधी सुझाव -

  • ‘‘मेक इन इंडिया’’ योजना से चिकित्सा उपकरणों के घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे रोगियों को विभिन्न उपचारों और उपकरणों के लिए कम भुगतान करना पड़ेगा। जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं सम्बन्धित खर्चे में कमी आयेगी।
  • भारत में नीतिगत वातावरण और नियामकों को आवश्यक हस्तक्षेप के साथ ऑन लाइन फार्मेसी जैसी तकनीकों को भी बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमारियों के उपचार और कल्याण के लिए नवोन्मेष की आवश्यकता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए दो-तरफा दृष्टिकोण अपनाने का आवश्यकता है जिसमें एक पद्धति और दक्षता में सुधार और दूसरा रोग के बोझ को कम करने से सम्बन्धित हो।
    नियामक मोर्चे पर, जैविक आपदा 2008 के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दिशा निर्देशों को अद्यतन करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष -

निजी क्षेत्र भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरा है। कोरोनावायरस जैसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए, निजी अस्पतालों ने स्वयं को तैयार कर लिया है। हालांकि, छोटे शहरों और गाँवों में उनका नेटवर्क खराब है और बहुत से लोग इन उपचारों का खर्च नहीं उठा सकते है। भारत में केंद्रीय और राज्य स्वास्थ्य ऐजेंसियों को मिलकर आपात स्थितियों के समाधान के लिए कार्य करना चाहिए।

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