यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - III (सामान्य अध्ययन-2: शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध) - 15, जनवरी 2020


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-3: सामान्य अध्ययन-2: (शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न - हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को मंजूरी प्रदान की गई, यह अध्यादेश किस प्रकार से कोयला क्षेत्र में नई संभावनाओं को खोलेगा, चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों हैं?
  • परिचय -
  • मुख्य भाग -
  • कोयला क्षेत्र की अभी तक की स्थिति
  • कोयला क्षेत्र पर अध्यादेश का प्रभाव
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों हैं?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला खनन (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2015 के साथ ही खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 में संशोधन करने के लिए खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश 2020 की घोषणा को मंजूरी दी है।

परिचय

खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश 2020, पूर्ण रूप से उपयोग तथा नीलामी के लिए, पूर्व के प्रतिबंधों में छूट प्रदान करते हुए, सभी स्थानीय तथा वैश्विक फर्मों को कोयले के वाणिज्यक खनन की अनुमति प्रदान करता है। इस अध्यादेश का उद्देश्य भविष्य में कोयला क्षेत्र में नीलामी से संबंधित प्रतिबंधों में छूट प्रदान करना है। इसे राष्ट्रपति की अनुमति के पश्चात् आगामी बजट सत्र से लागू किया जायेगा। सरकार द्वारा भारत में वाणिज्यक कोयला खनन की नीलामी को प्रारम्भ करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कोयला क्षेत्र की अभी तक की स्थिति

  • अभी तक भारत में कोयला खानों में नीलामी कुछ क्षेत्रों को छोड़ कर सभी के लिए प्रतिबंधित थी।
  • भारत में अभी तक कोयला क्षेत्र में नीलामी का अधिकार केवल ऊर्जा, लौह और इस्पात कंपनियों को ही था। साथ ही बोलीदाताओं को भारत में खनन से सम्बन्धित पूर्व जानकारी का होना आवश्यक था।
  • इसमें बोली लगाने वालों का दायरा सीमित था, जिससे सरकार को इससे पूर्णतः लाभ नहीं प्राप्त हो पाता था।
  • कोयले के प्रयोग से संबंधित प्रतिबंधों ने घरेलू बाजार को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

कोयला क्षेत्र पर अध्यादेश का प्रभाव

  • कारोबार में सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।
  • निवेश के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए कोयला खनन सेक्टर को खोल देने से इसका लोकतंत्रीकरण होगा।
  • पूर्वेक्षण लाइसेंस-सह-खनन लीज के जरिए खनन के लिए बिना तलाशे गए एवं आंशिक रूप से तलाशे गए कोयला ब्लाकों की पेशकश की जा सकेगी।
  • भागीदारी के लिए पाबंदी एवं पात्रता पैमाना समाप्त कर कोयला खनन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
  • इसकी सहयोगी कंपनी अथवा होल्डिंग कंपनी के किसी भी संयंत्र में खनन किए गए कोयले का उपयोग करने के लिये सफल बोलीदाता/आवंटी को अनुमति दी जा सकेगी।

निष्कर्ष

भारत में कोयला खनन के क्षेत्र में पाबंदी हटने से महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का एकाधिकार समाप्त हो जायेगा। यह लगभग 3 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि, इसमें बी एस एन एल के समान ही निजी क्षेत्र के प्रवेश के पश्चात् भी कोल इंडिया लिमिटेड के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। निजी क्षेत्र के साथ ही कोल इंडिया को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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