यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - II (सामान्य अध्ययन-1: भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज) - 06, जून 2020


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • पेपर - II: सामान्य अध्ययन- I: भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज )

प्रश्न - भारत में लोक कला/जनजातीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा किये जा रहे विभिन्न प्रयासों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों है?
  • परिचय
  • मुख्य भाग
  • भारत में लोक/जनजातीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा किये जा रहे विभिन्न प्रयास।
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में संस्कृति मंत्रालय द्वारा लोक कला/जनजातीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने तथा संरक्षण प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनायें प्रारंभ की गई हैं।

परिचय -

संस्कृति मंत्रालय ने देश में लोक कला जनजातीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने तथा संरक्षण प्रदान करने के लिए जोनल कल्चरल काउंसिल (ZCC) की स्थापना की है। इसके मुख्यालय पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में स्थापित किए गये हैं। ये जोनल कार्यालय पूरे देश में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। ये जोनल कार्यालय लोक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने तथा प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रारंभ करते हैं।

संस्कृति मंत्रालय द्वारा भारत में लोक कला/जनजातीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयास -

  • युवा प्रतिभाशाली कलाकारों को पुरस्कार - यह विशेष रूप से दुर्लभ कला के प्रदर्शनों के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं और प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रोत्साहित करने और उनकी पहचान करने के लिए यह योजना प्रारंभ की गई है।
  • गुरू शिष्य परंपरा - यह योजना आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी मूल्यवान परंपराओं को प्रसारित करने की परिकल्पना करती है।
  • शिष्यों को कला के उन स्वरूपों में प्रशिक्षित किया जाता है जो दुर्लभ और लुप्त हैं।
  • इसमें क्षेत्र के दुर्लभ और लुप्त हो रहे कला रूपों की पहचान की जाती है और ‘‘गुरूकुलों’’ की परंपरा में कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए प्रख्यात प्रशिक्षकों का चयन किया जाता है।
  • राज्यों के सांस्कृतिक मामलों के विभागों द्वारा गुरूओं के नामों की सिफारिश की जाती है।
  • रंगमंच कायाकल्प - स्टेज शो और प्रोडक्शन ओरिएंटेड वर्कशॉप आदि सहित रंगमंच की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए, समूहों को उनकी साख के साथ-साथ उनके द्वारा प्रस्तुत परियोजना की योग्यता के आधार पर अंतिम रूप दिया जाता है।
  • अनुसंधान और प्रलेखन - इसका उद्देश्य प्रिंट/ऑडियो - दृश्य मीडिया में संगीत, नृत्य, रंगमंच, साहित्य, ललित कला आदि के क्षेत्र में लोक जनजातीय और शास्त्रीय कला सहित लुप्त दृश्य और प्रदर्शन कला रूपों को बढ़ावा देना और प्रचार करना है। इसमें राज्य सांस्कृतिक विभाग के परामर्श से कला को अन्तिम तौर पर सम्मिलित किया जाता है।
  • शिल्पग्राम - ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले कारीगरों के लिए संगोष्ठी, कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों, शिल्प मेलों, डिजाइन विकास और विपणन सहायता का आयोजन करके क्षेत्र की लोक और आदिवासी कला और शिल्प को बढ़ावा देना।
  • ऑक्टेव - उत्तर पूर्व क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना और प्रचारित करना, इसमें आठ राज्य सम्मिलित हैं, अरूणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा।
    नेशनल कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम (NCEP) - इसे जोनल सांस्कृतिक केंद्रों की जीवन रेखा कहा जा सकता है।
  • इस योजना के अन्तर्गत, सदस्य राज्यों में प्रदर्शन कला, प्रदर्शनियों, यात्राओं आदि के विभिन्न उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
  • अन्य क्षेत्रों/राज्यों के कलाकारों को इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
  • देश के अन्य हिस्सों में आयेाजित होने वाले त्योहारेां में जोन के कलाकारों की भागीदारी की भी सुविधा है।
  • आंचलिक केंद्र भी इन त्योहारों के दौरान प्रदर्शन की व्यवस्था करके सदस्य राज्यों में होने वाले प्रमुख त्योहारों में भाग लेते हैं जहां बड़ी संख्या में दर्शकों को अन्य क्षेत्रों के कला रूपों का आनंद लेने और समझने का मौका मिलता है।
  • ये त्योहार हमारे देश की विभिन्न संस्कृतियों को स्वाद और समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष -

साहित्य अकादमी देश भर में विभिन्न आंचलित परिषदों के साथ-साथ विशेष रूप से गैर-मान्यता प्राप्त और आदिवासी भाषाओं के साथ-साथ आदिवासियों के विभिन्न कला और सांस्कृतिक रूपों के संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अकादमी समय-समय पर इस संबंध में भाषा सम्मेलनों और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है।

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